NSNIS में नाबालिग खिलाड़ी से रेप का आरोप, कजाकिस्तानी साइकिलिंग कोच पर POCSO में FIR

पटियाला के NSNIS में नाबालिग खिलाड़ी से कथित दुष्कर्म के आरोप में कजाकिस्तानी साइकिलिंग कोच मैक्सत अयेज़बायेव पर POCSO और BNS की धाराओं में FIR दर्ज हुई है. जानें क्या है पूरा मामला?

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इस मामले में पुलिस की जांच जारी है (फोटो-ITG) इस मामले में पुलिस की जांच जारी है (फोटो-ITG)

मुनीश कौशल

  • पटियाला,
  • 22 सितंबर 2026,
  • अपडेटेड 2:43 PM IST

पटियाला के नेताजी सुभाष नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ स्पोर्ट्स (NSNIS) में नाबालिग खिलाड़ी से कथित दुष्कर्म का मामला सामने आया है. इस मामले में कजाकिस्तान के साइकिलिंग कोच मैक्सत अयेज़बायेव (Maxat Ayezbayev) के खिलाफ पटियाला पुलिस ने FIR दर्ज की है. पुलिस के मुताबिक कथित घटना 13 सितंबर को हुई थी, जबकि इसकी शिकायत 18 सितंबर को मिली. मामले की जांच के लिए पुलिस ने विशेष टीमें गठित की हैं.

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पटियाला के एसपी सिटी मोहित अग्रवाल ने बताया कि आरोपी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 64(2) और 351(3) के तहत मामला दर्ज किया गया है. इसके साथ ही POCSO Act की संबंधित धाराएं भी लगाई गई हैं. पुलिस अब मामले से जुड़े तथ्यों और उपलब्ध साक्ष्यों की जांच कर रही है. जांच के दौरान सामने आने वाली जानकारी के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी.

पुलिस को जानकारी मिली थी कि आरोपी दिल्ली में किसी साइकिलिंग कैंप में शामिल हो सकता है. इस सूचना के आधार पर पटियाला पुलिस की विशेष टीमों ने दिल्ली में उसकी तलाश की और कई जगहों पर छापेमारी की. हालांकि, पुलिस को आरोपी वहां नहीं मिला. इस दौरान पुलिस ने उसका पासपोर्ट अपने कब्जे में ले लिया है और उसकी तलाश जारी है.

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मामले में नाबालिग खिलाड़ी की जरूरी मेडिकल जांच भी कराई गई है. पुलिस के मुताबिक मेडिकल जांच के निष्कर्ष और जांच में सामने आने वाले अन्य तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई होगी. पुलिस आरोपी की लोकेशन और मामले से जुड़े दूसरे पहलुओं की भी जांच कर रही है. फिलहाल आरोपी की गिरफ्तारी नहीं हुई है और पुलिस उसकी तलाश में जुटी है.

पुलिस ने इस मामले में मीडिया और आम लोगों से विशेष सावधानी बरतने की अपील की है. पुलिस ने कहा है कि नाबालिग की पहचान किसी भी तरह सार्वजनिक नहीं की जानी चाहिए. इसके अलावा मीडिया या किसी अन्य व्यक्ति को पीड़िता और उसके परिवार से सीधे संपर्क करने से बचने को कहा गया है. POCSO कानून के तहत नाबालिग पीड़ित की पहचान की गोपनीयता बनाए रखना जरूरी है.

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