पति की हत्या कर शव के किए 3 टुकड़े, 11 महीने बाद प्रेमी के साथ पत्नी गिरफ्तार

कई बार गुमशुदगी के मामले सिर्फ लापता होने तक सीमित नहीं रहते, बल्कि लंबी जांच के बाद बेहद चौंकाने वाले खुलासे होते हैं. परिजनों का संदेह, तकनीकी साक्ष्य और लगातार पूछताछ कई ऐसे राज सामने लाते हैं, जो महीनों तक छिपे रहते हैं.

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नवी मुंबई में खौफनाक मर्डर, पति की हत्या के बाद शव के टुकड़े कर जंगल में फेंका. (Photo: Representational) नवी मुंबई में खौफनाक मर्डर, पति की हत्या के बाद शव के टुकड़े कर जंगल में फेंका. (Photo: Representational)

aajtak.in

  • ठाणे/मुंबई,
  • 14 जुलाई 2026,
  • अपडेटेड 9:24 PM IST

नवी मुंबई में करीब 11 महीने पहले लापता हुए 50 वर्षीय व्यक्ति की गुमशुदगी की जांच के दौरान दिल दहला देने वाला खुलासा हुआ है. पुलिस ने मृतक की पत्नी और उसके प्रेमी को गिरफ्तार किया है. आरोप है कि दोनों ने मिलकर पहले हत्या की, फिर शव के तीन टुकड़े किए और उन्हें जंगल में अलग-अलग जगह फेंक दिया.

पुलिस के मुताबिक, यह वारदात पिछले साल अगस्त 2025 में हुई थी, लेकिन मामला हाल ही में तब खुला, जब मृतक के भाई ने उसके अचानक गायब होने पर शक जताते हुए गुमशुदगी की शिकायत दर्ज कराई. शिकायत मिलने के बाद मृतक की पत्नी सुनीता (40) और उसके प्रेमी राहुल दशरथ प्रजापति (30) से पूछताछ की गई. 

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एक पुलिस अधिकारी ने बताया कि लगातार पूछताछ के दौरान दोनों के बयानों में विरोधाभास मिला. इसके बाद में दोनों ने हत्या करने और शव के टुकड़े कर जंगल में फेंकने की बात कबूल कर ली. मृतक बलिराम सूर्यनाथ कुशवाहा (50) अपनी पत्नी सुनीता और दो बच्चों के साथ नवी मुंबई के ऐरोली इलाके में रहता था.

पुलिस जांच में सामने आया कि सुनीता का ऑटोरिक्शा चालक राहुल दशरथ प्रजापति के साथ अवैध संबंध था. जब बलिराम को इस रिश्ते की जानकारी मिली और उसने इसका विरोध किया, तब दोनों ने उसकी हत्या की साजिश रच डाली. 9 अगस्त 2025 की रात आरोपियों ने पहले बच्चों को एक रिश्तेदार के घर भेज दिया. 

इसके बाद जब बलिराम सो रहा था, तब उसका गला घोंट दिया गया और फिर धारदार हथियार से उसका गला काट दिया गया. हत्या के बाद सबूत मिटाने के लिए दोनों ने शव के तीन हिस्से कर दिए. उन टुकड़ों को बोरियों में भरा गया. राहुल के ऑटोरिक्शा से गवली देव पहाड़ी के जंगल में ले जाकर अलग-अलग फेंक दिया गया.

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वारदात के बाद सुनीता ने अपना पुश्तैनी घर किराए पर दे दिया और दोनों बच्चों के साथ नवी मुंबई के घनसोली इलाके में रहने चली गई. इस दौरान बलिराम के बारे में वह अलग-अलग बातें बताती रही. करीब आठ महीने बाद, अप्रैल 2026 में बलिराम का भाई सुनीता से मिलने पहुंचा. उसे अपने भाई के गायब होने पर शक हुआ. 

इधर सुनीता भी लगातार गोलमोल जवाब दे रही थी. इसके बाद भाई ने थाने में बलिराम की गुमशुदगी की शिकायत दर्ज कराई. शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने मामले की गहराई से जांच शुरू कर दी. गिरफ्तारी से बचने के लिए दोनों आरोपी बार-बार अपने मोबाइल फोन और सिम कार्ड बदल रहे थे. इधर पुलिस मुस्तैद थी.

कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR) की जांच में दोनों के बीच लगातार संपर्क होने का पता चला. पुलिस ने मोबाइल नंबरों में बदलाव, कॉल डिटेल रिकॉर्ड और दोनों आरोपियों के बयानों का विश्लेषण किया. पूछताछ के दौरान मिले विरोधाभासों के बाद दोनों ने अपना जुर्म कबूल कर लिया. इसके साथ ही पूरे मामले का खुलासा कर दिया.

पुलिस ने बताया कि गवली देव के घने जंगल से मृतक के कुछ अवशेष बरामद किए गए हैं. हालांकि शव के अन्य हिस्सों की तलाश अभी भी जारी है. दोनों आरोपियों को रविवार को गिरफ्तार किया गया. उनके खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 103 (हत्या), 238 (सबूत मिटाना) और 3(5) के तहत केस दर्ज किया गया है.

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