कठुआ रेप-मर्डर केस: मुख्य आरोपी शुभम सांगरा ने वापस ली रिवीजन बेल याचिका

कठुआ रेप-मर्डर केस में बुधवार को एक अहम मोड़ आया जब मुख्य आरोपी शुभम सांगरा ने पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट से अपनी रिवीजन बेल याचिका वापस ले ली. सुप्रीम कोर्ट पहले ही उसे नाबालिग नहीं मान चुका है और उसके खिलाफ एडल्ट की तरह ट्रायल चलने का रास्ता साफ कर चुका है.

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सुप्रीम कोर्ट पहले ही कर चुका था एडल्ट घोषित, कठुआ केस की कानूनी जंग तेज. (File Photo: ITG) सुप्रीम कोर्ट पहले ही कर चुका था एडल्ट घोषित, कठुआ केस की कानूनी जंग तेज. (File Photo: ITG)

aajtak.in

  • पठानकोट,
  • 26 नवंबर 2025,
  • अपडेटेड 11:44 PM IST

देशभर में आक्रोश भड़काने वाले साल 2018 के कठुआ रेप-मर्डर केस में बुधवार को मुख्य आरोपी शुभम सांगरा ने अपनी रिवीजन बेल याचिका वापस ले ली है. उसने पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट में अपनी याचिका दाखिल की थी. कोर्ट में सुनवाई शुरू होने से पहले ही उसके इस कदम ने पूरे केस को एक नए मोड़ पर ला खड़ा किया है.

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जम्मू-कश्मीर की तरफ से केस का प्रतिनिधित्व कर रहीं सीनियर एडिशनल एडवोकेट जनरल मोनिका कोहली ने बताया कि आरोपी ने हाई कोर्ट के उस पुराने आदेश को चुनौती देने वाली याचिका वापस ले ली है, जिसमें उसकी बेल अर्जी पहले ही खारिज कर दी गई थी. एडवोकेट कोहली को इस केस से जुड़े सभी कानूनी मामलों को संभालने के लिए नियुक्त किया गया है.

उनके साथ तीन अन्य वकील भी हैं. इस केस की जांच और ट्रायल का इतिहास भी कई मोड़ों से भरा रहा है. सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर रेप और मर्डर केस का ट्रायल कठुआ से पंजाब के पठानकोट शिफ्ट किया गया था. साल 2022 में सुप्रीम कोर्ट ने एक अलग आदेश में साफ कर दिया कि क्राइम के समय संगरा नाबालिग नहीं था. उस पर एडल्ट की तरह ट्रायल चलना चाहिए.

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कोर्ट ने जम्मू-कश्मीर हाई कोर्ट के 27 मार्च 2018 वाले उस विवादित आदेश को भी रद्द कर दिया, जिसमें संगरा को नाबालिग मानने की बात कही गई थी. इस समय सेशन कोर्ट चार्ज फ्रेम करने पर सुनवाई कर रहा है. शुभम संगरा के एडल्ट घोषित होने के बाद उसे कठुआ जेल से पठानकोट की सब-डिस्ट्रिक्ट जेल में ट्रांसफर कर दिया गया था.

जम्मू-कश्मीर पुलिस की क्राइम ब्रांच की चार्जशीट में शुभम संगरा की भूमिका का विस्तार से उल्लेख है. चार्जशीट के अनुसार उसने आठ साल की बच्ची को जबरदस्ती 0.5 mg की क्लोनाजेपम की पांच गोलियां दी थीं, जो सेफ़ थेराप्यूटिक डोज़ से कई गुना अधिक है. मेडिकल एक्सपर्ट ने बताया गया कि इतनी ओवरडोज़ से बच्ची बेहोशी, कन्फ्यूज़न और मौत तक पहुंच सकती थी.

चार्जशीट के मुताबिक, यह ओवरडोज़ रेप और हत्या का विरोध करने की बच्ची की क्षमता को खत्म करने के लिए दिया गया था. मुख्य आरोपी को नाबालिग साबित करने की साजिश का खुलासा भी इसी केस की एक अहम कड़ी है. उसके पिता द्वारा दायर जन्म-तिथि प्रमाणपत्र के दस्तावेजो में तारीखों का अंतर और झूठी जानकारी ही ने उनके झूठ का पर्दाफाश कर दिया.

इस केस में कुल आठ आरोपी थे. इनमें से तीन आरोपियों सांजी राम, एसपीओ दीपक खजूरिया और सिविलियन परवेश कुमार को स्पेशल कोर्ट ने 10 जून 2019 को आखिरी सांस तक उम्रकैद की सजा सुनाई थी. तीन अन्य सब-इंस्पेक्टर आनंद दत्ता, हेड कांस्टेबल तिलक राज और एसपीओ सुरेंद्र वर्मा को सबूत मिटाने का दोषी पाए जाने पर पांच साल कैद और 50 हजार जुर्माने की सजा हुई थी.

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ये तीनों फिलहाल पैरोल पर हैं. सातवें आरोपी विशाल जंगोत्रा को बरी कर दिया गया था. जम्मू और कश्मीर प्रशासन शुभम संगरा की बेल याचिका वापस लेने के बाद इस केस में अपनी कानूनी रणनीति और मजबूत कर दी है. मोनिका कोहली के साथ एडिशनल एडवोकेट जनरल राहुल देव सिंह, रमन शर्मा और स्पेशल लॉयर अर्काज कुमार को भी केस के लिए नियुक्त किया गया है.

मोनिका कोहली का ट्रैक रिकॉर्ड भी बेहद सशक्त रहा है. वो साल 1999 से हाई कोर्ट में प्रैक्टिस कर रही हैं और CBI की स्टैंडिंग काउंसिल भी रह चुकी हैं. उन्होंने JKLF चीफ यासीन मलिक से जुड़े दो हाई-प्रोफाइल मामलों साल 1989 में रुबैया सईद किडनैपिंग और साल 1990 में IAF के चार जवानों की हत्या में बतौर चीफ़ प्रॉसिक्यूटर महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है.

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