फर्जी ट्रेडिंग ऐप, कंबोडिया कनेक्शन, 300 करोड़ की ठगी... दिल्ली में इंटरनेशनल साइबर सिंडिकेट का भंडाफोड़

ऑनलाइन ट्रेडिंग के नाम पर देशभर के निवेशकों को करोड़ों का चूना लगाने वाले फर्जी सिंडिकेट का दिल्ली पुलिस ने भंडाफोड़ किया है. कंबोडिया से ऑपरेट हो रहे इस रैकेट के तार कोलकाता और लखनऊ तक जुड़े मिले हैं. पुलिस ने चार आरोपियों को गिरफ्तार कर 300 करोड़ से ज्यादा की ठगी का खुलासा किया है.

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नामी ब्रोकरेज बनकर निवेशकों को लूटा, दिल्ली पुलिस की बड़ी कार्रवाई, चार आरोपी गिरफ्तार. (Photo: X/@CrimeBranchDP) नामी ब्रोकरेज बनकर निवेशकों को लूटा, दिल्ली पुलिस की बड़ी कार्रवाई, चार आरोपी गिरफ्तार. (Photo: X/@CrimeBranchDP)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 24 जनवरी 2026,
  • अपडेटेड 10:43 PM IST

दिल्ली पुलिस ने ऑनलाइन ट्रेडिंग में मोटे मुनाफे का लालच देकर 300 करोड़ रुपS से ज्यादा की ठगी करने वाले बड़े साइबर सिंडिकेट का पर्दाफाश किया है. इस मामले में पुलिस ने कोलकाता और लखनऊ से चार मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार किया है. जांच में सामने आया है कि इस रैकेट का संचालन कंबोडिया में बैठे ऑपरेटर्स कर रहे थे.

दिल्ली पुलिस के मुताबिक, आरोपी फर्जी ट्रेडिंग एप्लिकेशन और ऑनलाइन मैसेजिंग ग्रुप के जरिए लोगों को अपने जाल में फंसाते थे. सोशल मीडिया पर विज्ञापन और मैसेज भेजकर संभावित निवेशकों से संपर्क किया जाता था. उन्हें गारंटीड रिटर्न का झांसा दिया जाता था. इसके बाद पीड़ितों को व्हाट्सऐप ग्रुप्स में जोड़ा जाता था.

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पुलिस उपायुक्त (अपराध) आदित्य गौतम ने बताया कि इन व्हाट्सऐप ग्रुप के नाम नामी ब्रोकरेज कंपनियों जैसे रखे गए थे. वेंचुरा सिक्योरिटीज, गो मार्केट ग्लोबल और IPO स्टॉक ट्रेडिंग जैसे नामों वाले ग्रुप बनाकर खुद को अधिकृत ब्रोकर बताया जाता था. पीड़ितों को फर्जी मोबाइल एप डाउनलोड करवाए जाते थे, जिनमें मुनाफा दिखाने वाले ट्रेडिंग डैशबोर्ड होते थे.

भरोसा जीतने के लिए शुरुआत में पीड़ितों के खातों में थोड़ी रकम रिटर्न के तौर पर डाली जाती थी. इससे उत्साहित होकर लोग बड़ी रकम निवेश कर देते थे. इसके बाद टैक्स, फीस और विड्रॉल एक्टिवेशन चार्ज के नाम पर और पैसे मांगे जाते थे. अंत में पीड़ितों का पूरा निवेश डूब जाता था. जांच में सामने आया है कि यह पूरा नेटवर्क फर्जी बैंक खातों के जरिए काम कर रहा था. 

इन बैंक खातों की पूरी जानकारी, जैसे अकाउंट नंबर, IFSC कोड और रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर, साइबर ठगों को दी जाती थी. बैंक खातों से जुड़े सिम कार्ड में ऐसे ऐप इंस्टॉल थे जो OTP को ऑटो-शेयर कर देते थे, जिससे रकम आसानी से ट्रांसफर की जा सके. पुलिस ने I4C प्लेटफॉर्म से मिले डेटा और 200 से ज्यादा बैंक शाखाओं के रिकॉर्ड खंगालकर मनी ट्रेल का पता लगाया. 

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पुलिस की जांच में कोलकाता आधारित एक सिंडिकेट सामने आया, जो फर्जी कंपनियां बनाकर बैंक खाते उपलब्ध कराता था. इसी कड़ी में 29 दिसंबर 2025 को बिस्वजीत मंडल को कोलकाता से गिरफ्तार किया गया. उससे पूछताछ के बाद 1 जनवरी को आशीष अग्रवाल को पकड़ा गया. 6 जनवरी को लखनऊ से राजीव शाह और कोलकाता से शुभम शर्मा को गिरफ्तार किया गया. 

इनके पास से मोबाइल फोन, लैपटॉप, चेकबुक, एटीएम कार्ड और सिम कार्ड बरामद किए गए. पूछताछ में सामने आया कि कंबोडिया में बैठे ऑपरेटर्स क्रिप्टोकरेंसी के जरिए ट्रांजैक्शन संभालते थे, जबकि भारत में बैठे आरोपी फर्जी कंपनियां, बैंक अकाउंट और लॉजिस्टिक सपोर्ट मुहैया कराते थे. अब तक 39 मोबाइल फोन, 258 सिम कार्ड, चार लैपटॉप जब्त किए जा चुके हैं.

इस मामले में 19 लाख रुपए फ्रीज किए गए हैं. पुलिस ने 105 फर्जी कंपनियों से जुड़े 260 से ज्यादा बैंक अकाउंट की पहचान की है. इस नेटवर्क को नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल पर दर्ज 2,567 शिकायतों से जोड़ा गया है. पुलिस का कहना है कि रैकेट के बाकी सदस्यों और इंटरनेशनल लिंक की तलाश जारी है. इस सिंडिकेट का खुलासा पुलिस के लिए बड़ी सफलता है.

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