आंध्र प्रदेश में मिला कोरोना का नया AP Strain कितना खतरनाक है? एक्सपर्ट से समझें

आंध्र प्रदेश में कोरोना वायरस का एक नया स्ट्रेन मिला है, जो बाकी स्ट्रेन के मुकाबले ज्यादा संक्रामक बताया जा रहा है. क्योंकि ये स्ट्रेन आंध्र प्रदेश में मिला है, इसलिए इसे एपी स्ट्रेन (AP Strain) कहा जा रहा है.

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एपी स्ट्रेन को ज्यादा संक्रामक माना जा रहा था. (फाइल फोटो-PTI) एपी स्ट्रेन को ज्यादा संक्रामक माना जा रहा था. (फाइल फोटो-PTI)

स्नेहा

  • हैदराबाद,
  • 04 मई 2021,
  • अपडेटेड 11:24 PM IST
  • इसकी खोज हैदराबाद के CCMB ने की है
  • वैज्ञानिक भाषा में इसे N440K वैरिएंट बुलाया जा रहा है

देश में कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर के बीच एक और डराने वाली खबर सामने आई है. आंध्र प्रदेश में कोरोना वायरस का एक नया स्ट्रेन मिला है, जो बाकी स्ट्रेन के मुकाबले ज्यादा संक्रामक बताया जा रहा है. क्योंकि ये स्ट्रेन आंध्र प्रदेश में मिला है, इसलिए इसे एपी स्ट्रेन (AP Strain) कहा जा रहा है. हालांकि, वैज्ञानिक भाषा में इसे N440K वैरिएंट बुलाया जा रहा है. इस स्ट्रेन की खोज की है हैदराबाद स्थित सेंटर फॉर सेल्यूलर एंड मॉलिक्यूलर बायोलॉजी (CCMB) के वैज्ञानिकों ने. ऐसे में CCMB के डायरेक्टर डॉ. राकेश मिश्रा से 'इंडिया टुडे' ने बात की और इस नए स्ट्रेन के बारे में कुछ जरूरी बातें जानीं. 

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1. क्या N440K स्ट्रेन चिंता का नया कारण है?
डॉ. राकेश मिश्राः
हरगिज नहीं. N440K स्ट्रेन पहले से ही फैल रहा है और आंध्र प्रदेश में भी पिछले कई महीनों से इसका असर दिख रहा है. मैं यूके स्ट्रेन और डबल म्यूटेंट स्ट्रेन को लेकर ज्यादा चिंतित हूं, जो इस स्ट्रेन (N440K) को रिप्लेस कर रहे हैं. ये दो स्ट्रेन, खासतौर से यूके स्ट्रेन ज्यादा संक्रामक है. 

2. दक्षिण भारत में कौन सा स्ट्रेन चिंताजनक है?
डॉ. राकेश मिश्राः
यूके वैरिएंट और डबल म्यूटेंट वैरिएंट दोनों ही दक्षिण भारत में फैल रहे हैं. इनमें से यूके स्ट्रेन ज्यादा संक्रामक है. उत्तर भारत जैसे दिल्ली, पंजाब में यूके वैरिएंट फैल रहा है. वहीं, गुजरात, महाराष्ट्र में डबल म्यूटेंट ज्यादा फैल रहा है.

3. 8 शेर कोविड पॉजिटिव पाए गए हैं. ये कितनी चिंता बढ़ाता है?
डॉ. राकेश मिश्राः
शेरों में लक्षण दिखे थे. अब स्थिति काबू में है. हो सकता है कि संक्रमण चिड़ियाघर में आने वाले लोगों से या फिर कर्मचारियों से उनमें फैला हो.

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4. कोरोना का पीक आने की कब तक उम्मीद है?
डॉ. राकेश मिश्राः
लॉकडाउन लगाकर हम दूसरी लहर को अवॉयड कर सकते हैं और इससे हालात काबू में आ जाएंगे. लॉकडाउन की वजह से लोग घरों में ही रहेंगे, जिससे मामलों में कमी आ जाएगी.

5. क्या आप लॉकडाउन के समर्थन में हैं?
डॉ. राकेश मिश्राः
हां. अगर इसके अर्थशास्त्र पर ध्यान दिया जाए, तो लॉकडाउन होना चाहिए. लेकिन अगर लोग संक्रमण से ज्यादा भूख से मर रहे हैं, तो फिर इसका कोई मतलब नहीं है.

6. तीसरी लहर को लेकर क्या विचार है? क्या उसके आने का खतरा है?
डॉ. राकेश मिश्राः
हां. लेकिन ये उस पर भी निर्भर करती है कि हम वैक्सीनेशन कितना तेज करते हैं और हमारा बर्ताव कैसा रहता है. 
 
7. ब्राजील वैरिएंट (P1) क्या भारत में भी फैल रहा है?
डॉ. राकेश मिश्राः नहीं. भारत पर इसका असर नहीं है.

8. सैम्पलिंग कम क्यों हो रही है? क्या जीनोम सीक्वेंसिंग नहीं होनी चाहिए?
डॉ. राकेश मिश्राः अगर आपके सामने कोई बंदूक लेकर आपको मारने आ रहा है, तो आप उससे बंदूक के बारे में नहीं पूछेंगे. आप अपने को बचाएंगे. ठीक इसी तरह संक्रमण का कोई भी स्ट्रेन हो, हमें मास्क पहनना है और सारे कोविड प्रोटोकॉल फॉलो करना है. हम सब के लिए इसमें कोई बदलाव नहीं होना चाहिए.

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