पीएफ-पेंशन पैसा IL&FS में फंसा, 2000 कंपनियों को होगा 9000 करोड़ का नुकसान

करीब 2000 कंपनियों के निजी पीएफ और पेंशन का पैसा IL&FS के नॉन-कन्वेर्टिबल डिबेंचर में लगा हुआ है और इस निवेश से करीब 9,000 करोड़ रुपये का नुकसान होने की आशंका है.

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 IL&FS में पेंशन और पीएफ का पैसा फंसने से कंपनियों को नुकसान IL&FS में पेंशन और पीएफ का पैसा फंसने से कंपनियों को नुकसान

दिनेश अग्रहरि

  • नई दिल्ली,
  • 13 मई 2019,
  • अपडेटेड 4:15 PM IST

इन्फ्रास्ट्रक्चर लीजिंग ऐंड फाइनेंशियल सर्विसेज (IL&FS) के डिफाल्ट संकट की आंच अब तमाम सरकारी-गैर सरकारी कंपनियों से जुड़े हजारों कर्मचारियों तक पहुंच गई है. करीब 2000 कंपनियों के निजी पीएफ और पेंशन का पैसा IL&FS के नॉन-कन्वेर्टिबल डिबेंचर में लगा हुआ है और इस निवेश से करीब 9,000 करोड़ रुपये का नुकसान होने की आशंका है.

इसके पहले कई म्यूचुअल फंडों और बीमा कंपनियों को IL&FS के डिफाल्ट से नुकसान होने की आशंका सामने आई थी. दूसरी तरफ, केंद्र सरकार के एक वरिष्ठ अधिकारी ने यह भी स्वीकार किया है कि देश का समूचा गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनी क्षेत्र संकट के मुहाने पर खड़ा है.

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नुकसान कंपनियों को ही वहन करना होगा

बिजनेस स्टैंडर्ड के अनुसार, कर्मचारी भविष्य निधि योजना के गाइडलाइन के मुताबिक इस निवेश से होने वाला नुकसान कंपनियों को खुद ही वहन करना होगा. असल में निजी पीएफ और पेंशन फंडों के लिए कुछ अलग नियम होते हैं. इन कंपनियों में इंफोसिस, टाटा पावर और ल्यूपिन जैसे दिग्गज भी शामिल हैं. इनमें फूड कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया, भारतीय स्टेट बैंक, भारत पेट्रोलियम कॉरपोरेशन, इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन जैसी सरकारी कंपनियां भी हैं. कई खबरों के अनुसार हाल में वित्त मंत्रालय ने ईपीएफओ से यह जानकारी मांगी है कि उसका IL&FS और इस तरह की कंपनियों में कितना निवेश है.

अब समूचे एनबीएफसी क्षेत्र में आने वाला है संकट

देश का गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनी क्षेत्र आसन्न संकट के मुहाने पर खड़ा है. कुछ बड़ी कंपनियों द्वारा की गई गडबड़ियों और कर्ज की तंगी से इस क्षेत्र के ध्वस्त होने का फार्मूला तैयार हो चुका है. सरकार के एक वरिष्ठ अधिकारी ने यह बात कही. हाल के महीनों में विभिन्न कारोबार से जुड़े आईएलएंडएफएस समूह में संकट के साथ-साथ कुछ अन्य बड़ी कंपनियों द्वारा कर्ज लौटाने में असफल रहने से देश की वित्तीय प्रणाली विभिन्न समस्याओं से गुजर रही है. 

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कॉरपोरेट मामलों के सचिव इंजेती श्रीनिवास ने पीटीआई से बातचीत में कहा कि गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनी क्षेत्र कर्ज की कमी, अधिक उधारी तथा कुछ बड़ी कंपनियों की गलतियों का खामियाजा भुगत रहा है. उन्होंने कहा, ‘एनबीएफसी क्षेत्र के समक्ष आसन्न संकट है. कर्ज की तंगी, क्षमता का अधिक फायदा उठाना, किसी एक चीज पर ज्यादा केंद्रित होना, संपत्ति तथा देनदारी के बीच अंतर बढ़ना तथा कुछ बड़ी इकाइयों की गड़बड़ियों से क्षेत्र में बिगाड़ का उपयुक्त फार्मूला बन चुका है.'

उन्होंने कहा कि जो जिम्मेदार कंपनियां हैं वह बेहतर तरीके से जोखिम प्रबंधन कर रही हैं और खतरनाक स्थिति में नहीं हैं. श्रीनिवास ने यह भी कहा कि मौजूदा स्थिति कंपनी संचालन के तौर तरीकों का परीक्षण भी है.

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