₹50,000 से ज्यादा दे रहे हैं किराया, तो जान लें 2% TDS का यह जरूरी नियम

अगर आपका मासिक किराया ₹50,000 से अधिक है, तो केवल समय पर मकान मालिक को भुगतान कर देना ही काफी नहीं है. आयकर का एक महत्वपूर्ण TDS नियम आप पर लागू होता है, और इसे नजरअंदाज करने पर आपको अतिरिक्त जुर्माना या भारी खर्च उठाना पड़ सकता है.

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aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 01 अप्रैल 2026,
  • अपडेटेड 5:13 PM IST

कल्पना कीजिए आप पूरे साल हर महीने ₹60,000 किराया समय पर चुकाते रहे हैं और सब कुछ बहुत आसान लग रहा है. लेकिन जैसे ही वित्तीय वर्ष (Financial Year) खत्म होने वाला होता है, एक छोटी सी बारीकी ऐसी है जिसे अक्सर किरायेदार नजरअंदाज कर देते हैं, और यही चूक बाद में इनकम टैक्स का अनपेक्षित नोटिस ला सकती है.

आयकर नियमों के अनुसार, अगर आपका किराया ₹50,000 प्रति माह से अधिक है, तो वित्तीय वर्ष के अंतिम भुगतान से पहले आपको TDS (Tax Deducted at Source) काटना अनिवार्य है. इस कदम को चूकने का मतलब है जुर्माना, ब्याज और टैक्स विभाग की अवांछित जांच का सामना करना. 

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मौजूदा आयकर प्रावधानों के अनुसार, ऐसे व्यक्ति और हिंदू अविभाजित परिवार जो टैक्स ऑडिट के दायरे में नहीं आते, उन्हें किराए पर 2% TDS काटना अनिवार्य है, अगर किराया ₹50,000 प्रति माह से अधिक है. इस नियम का उद्देश्य बड़े किराये के लेन-देन पर नज़र रखना और यह सुनिश्चित करना है कि मकान मालिक अपनी टैक्स फाइलिंग में इस आय की सही जानकारी दें.

'मखीजानी गेरा एंड एसोसिएट्स' के टैक्स हेड, गौरव मखीजानी बताते हैं, “टैक्स ऑडिट के दायरे में न आने वाले व्यक्तियों और हिंदू अविभाजित परिवारों को किराये के भुगतान पर अपनी TDS देनदारियों के प्रति सतर्क रहना चाहिए. जहां मासिक किराया ₹50,000 से अधिक है, वहां स्रोत पर 2% टैक्स (TDS) काटना आवश्यक है.' 

TDS की कटौती कब की जानी चाहिए?

कटौती का समय ही वह बिंदु है जहां अक्सर कई किरायेदार भ्रमित हो जाते हैं. नियमित TDS कटौतियों के विपरीत, यह प्रक्रिया आमतौर पर साल में केवल एक बार, यानी वित्तीय वर्ष के अंत में की जाती है.

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मखीजानी कहते हैं, "सामान्यतः यह कटौती वित्तीय वर्ष के अंतिम महीने के भुगतान या क्रेडिट के समय की जाती है." हालांकि, इसमें एक अपवाद भी है. वे आगे बताते हैं, "अगर किरायेदार साल के बीच में ही घर खाली कर देता है, तो ऐसी स्थिति में किरायेदारी के अंतिम महीने के भुगतान के समय ही TDS काटा जाना अनिवार्य है."

प्रक्रिया को कैसे पूरा करें

भले ही यह नियम सुनने में तकनीकी लगे, लेकिन इसकी प्रक्रिया काफी सरल और ऑनलाइन है. यह भुगतान इनकम टैक्स ई-फाइलिंग पोर्टल पर फॉर्म 26QC के माध्यम से किया जाता है, और किरायेदारों को TAN प्राप्त करने की आवश्यकता नहीं होती है. यह सिस्टम पूरी तरह PAN आधारित है और इसे e-Pay Tax सुविधा के जरिए पूरा किया जा सकता है.

मखीजानी कहते हैं, "काटे गए टैक्स को 30 दिनों के भीतर जमा करना आवश्यक है. इसके अतिरिक्त, किरायेदार को मकान मालिक को फॉर्म 16C में एक TDS प्रमाणपत्र जारी करना चाहिए, ताकि टैक्स कटौती के प्रावधानों का उचित अनुपालन सुनिश्चित हो सके."

भुगतान पूरा करने के लिए, किरायेदारों को इनकम टैक्स ई-फाइलिंग पोर्टल पर लॉग इन करना होगा, 'e-Pay Tax' सेक्शन में जाना होगा, और 'New Payment' के बाद "26QC – TDS on Rent of Property" का चयन करना होगा. इसके बाद उन्हें किरायेदार और मकान मालिक दोनों का विवरण भरना होगा, जिसमें पैन (PAN) और पता शामिल है. साथ ही किराये की जानकारी जैसे कि राशि, अवधि और संपत्ति का विवरण देना होगा.

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2% की दर से TDS की गणना करने के बाद, नेट बैंकिंग, डेबिट कार्ड या अन्य उपलब्ध माध्यमों से भुगतान करने से पहले विवरणों की समीक्षा की जा सकती है. एक बार भुगतान पूरा हो जाने के बाद, रिकॉर्ड के लिए चालान या रसीद डाउनलोड कर लेनी चाहिए.

कई किरायेदारों के लिए, यह नियम अक्सर ध्यान से उतर जाता है क्योंकि यह साल में केवल एक बार लागू होता है, लेकिन इसे नज़रअंदाज़ करना भारी पड़ सकता है. आयकर विभाग भारी-भरकम किराये के भुगतान पर पैनी नज़र रखता है, और नियमों का पालन न करने पर नोटिस या जुर्माना लगाया जा सकता है.

जैसे-जैसे वित्तीय वर्ष समाप्त हो रहा है, यह दोबारा जांचना ज़रूरी है कि क्या आपका किराया ₹50,000 की सीमा को पार करता है. यदि ऐसा है, तो यह सुनिश्चित करें कि टीडीएस (TDS) की औपचारिकता को सही ढंग से पूरा कर लिया गया है.

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