ईरान के चाबहार पोर्ट के लिए भारत दे चुका है 400 करोड़ रुपये, अब झटके में US ने टावर उड़ाया, कितना बड़ा है नुकसान?

Maritime Control Tower Collapse: भारत और ईरान के बीच का कारोबार पिछले कुछ वर्षों में भू-राजनीतिक बदलावों और अमेरिकी प्रतिबंधों के कारण काफी सिमट गया है. मौजूदा समय में भारत और ईरान के बीच द्विपक्षीय व्यापार लगभग $1.6 बिलियन से $1.7 बिलियन का है.

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भारत का चाबहार पोर्ट में बड़ा निवेश (Photo: ITG) भारत का चाबहार पोर्ट में बड़ा निवेश (Photo: ITG)

आजतक बिजनेस डेस्क

  • नई दिल्ली,
  • 17 जुलाई 2026,
  • अपडेटेड 8:38 PM IST

अमेरिका और ईरान के बीच हमले तेज हो गए हैं. पिछले करीब 6 दिनों से दोनों देश एक-दूसरे के ठिकानों पर हमले कर रहे हैं. अमेरिका अब ईरान को आर्थिक तौर बिल्कुल कमजोर बना देने की रणनीति पर काम कर रहा है. इसलिए हमले उन जगहों पर किए जा रहे हैं, जो ईरान के लिए आर्थिक तौर अहम हैं. 

इस बीच गुरुवार की रात अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि ईरान बातचीत करना चाह रहा है, क्योंकि अब उसपर हमले तेज हो गए हैं, हालांकि उन्होंने कहा कि जब ईरान अमेरिकी शर्तों को मान लेगा, तभी हमले रुकेंगे. 

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इस बीच अमेरिका अब ईरान के चाबहार पोर्ट के इलाकों को निशाना बना रहा है. अमेरिका हमले से चाबहार पोर्ट के आइकॉनिक मैरीटाइम ट्रैफिक कंट्रोल टावर मलबे में तब्दील हो गया है. ईरान की फार्स न्यूज एजेंसी के मुताबिक चाबहार से गुजरने वाले जहाजों पर नजर रखने वाला टावर अमेरिकी हमले में ध्वस्त हो गया है. 

भारत की मदद से बन रहा है पोर्ट

अमेरिका कई दिनों से इस टावर को निशाना बना रहा था. तीसरे दौर के हमले में चाबहार बंदरगाह का मैरीटाइम कंट्रोल टावर भर-भराकर गिर गया. चाबहार तेहरान का मुख्य समुद्री गेटवे है, जो होर्मुज से होकर नहीं गुजरता है, इसके ट्रैफिक कंट्रोल पर बार-बार होने वाले हमलों से शिपिंग में रुकावट आ सकती है. 

दरअसल, अमेरिकी हमले की आर्थिक चोट भारत तक पहुंचने वाली है. क्योंकि भारत को ईरान पर अच्छा-खासा निवेश है. खासकर चाबहार इलाके में भारत का मोटा निवेश है. ईरान में भारत का निवेश मुख्य रूप से रणनीतिक कनेक्टिविटी और इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़ा है. भारत के लिए ईरान का महत्व सीधे तौर पर पाकिस्तान को बायपास करके अफगानिस्तान और मध्य एशिया तक पहुंचने के रास्ते से है. 

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बता दें, चाबहार पोर्ट के रूप में जो निवेश है, वह भू-राजनीतिक नजरिए से भारत के लिए बेहद अहम है, क्योंकि यह भारत को मध्य एशिया और रूस तक व्यापार करने के लिए 'इंटरनेशनल नॉर्थ-साउथ ट्रांसपोर्ट कॉरिडोर' (INSTC) का सीधा रास्ता देता है.

अगर बड़े निवेश की बात करें, तो इसे दो मुख्य हिस्सों में देखा जा सकता है.
1. चाबहार बंदरगाह (Chabahar Port): सबसे बड़ा और रणनीतिक निवेश चाबहार पोर्ट का विकास भारत का ईरान में सबसे महत्वपूर्ण और चर्चित प्रोजेक्ट है. भारत ने चाबहार पोर्ट के 'शाहिद बेहिश्ती टर्मिनल' के विकास के लिए 120 मिलियन डॉलर (लगभग 1,000 करोड़ रुपये) का निवेश करने की प्रतिबद्धता जताई थी. हाल ही में भारत सरकार ने आधिकारिक तौर पर संसद में पुष्टि की है कि वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान इस 400 करोड़ के निवेश को पूरी तरह से फाइनल कर दिया गया है. 

यही वजह है कि हालिया केंद्रीय बजट (2026-27) में इसके लिए अलग से कोई नया फंड आवंटित नहीं किया गया है, क्योंकि भारत अपना तय वित्तीय वादा पूरा कर चुका है. इसके अलावा भारत ने पहले भी चाबहार के विकास, क्रेन और कार्गो हैंडलिंग जैसी भारी मशीनों को खरीदने के लिए करीब 85 मिलियन डॉलर का अलग से निवेश किया हुआ है.  

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2. चाबहार-जाहिदान रेलवे लाइन 
पोर्ट को आगे अफगानिस्तान सीमा तक जोड़ने के लिए भारत ने चाबहार-जाहिदान रेलवे लाइन परियोजना में भी सेवाएं और वित्तीय सहायता देने का वादा किया था, जो करीब 1.6 बिलियन डॉलर (लगभग 13,000 करोड़ रुपये) का प्रोजेक्ट आंका गया था. हालांकि, अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों के चलते इस प्रोजेक्ट की गति काफी धीमी रही है. 

भले ही भारत ने ईरान में रणनीतिक निवेश किया है. लेकिन पिछले कुछ वर्षों में अमेरिकी प्रतिबंधों और हालिया पश्चिम एशिया के तनाव के कारण भारत का वहां पर बड़ा व्यावसायिक निवेश सीमित रहा है. कभी ईरान भारत को तेल देने वाला तीसरा सबसे बड़ा देश था. लेकिन 2019 के बाद अमेरिकी प्रतिबंधों के दबाव में भारत ने वहां से तेल खरीदना लगभग बंद कर दिया था. 

भारत और ईरान के बीच का कारोबार पिछले कुछ वर्षों में भू-राजनीतिक बदलावों और अमेरिकी प्रतिबंधों के कारण काफी सिमट गया है. मौजूदा समय में भारत और ईरान के बीच द्विपक्षीय व्यापार लगभग $1.6 बिलियन से $1.7 बिलियन (करीब 13,000 से 14,000 करोड़ रुपये) के बीच सिमट गया है. साल 2019-20 से पहले जब भारत, ईरान से भारी मात्रा में कच्चा तेल खरीदता था, तब यह व्यापार $15 बिलियन (यानी 1.25 लाख करोड़ रुपये) से भी ज्यादा का हुआ करता था. अमेरिकी प्रतिबंधों के दबाव में भारत द्वारा तेल आयात लगभग बंद करने के बाद इसमें 90% की गिरावट आई है. 

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भारत ईरान को ज्यादा एक्सपोर्ट करता है, भारत से सालाना लगभग $1.24 बिलियन का सामान ईरान भेजा जाता है, जिसमें मुख्य रूप से बासमती और गैर-बासमती चावल का निर्यात करीब $700 मिलियन का है. इसके अलावा चाय, कॉफी, चीनी, मसाले, मेडिसीन, आर्गेनिक केमिकल और हल्के इंजीनियरिंग सामान हैं.

भारत क्या आयात करता है?
भारत द्वारा ईरान से आयात काफी कम हो गया है और यह सालाना लगभग $0.44 बिलियन के आसपास है. जिसमें  सूखे मेवे, खजूर, बादाम और ताजे फल हैं, इसके अलावा जैविक और अकार्बनिक रसायन, कांच का सामान और कुछ मात्रा में बिटुमिनस खनिज मंगाता है. 

ईरान के व्यापार में कटौती के कारण
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ईरान के साथ व्यापार करने वाले देशों पर 25% अतिरिक्त टैरिफ लगाने की घोषणा के बाद भारतीय निर्यातकों के लिए चुनौतियां बढ़ गई हैं. हालांकि भारत के लिए रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण चाबहार बंदरगाह प्रोजेक्ट को प्रतिबंधों से छूट मिली हुई है, जिससे मध्य एशिया तक भारत का रूट सुरक्षित है. अब जब अमेरिका चाबहार बंदरगाह प्रोजेक्ट को निशाना बना रहा है तो इससे भारत को आर्थिक नुकसान पहुंच सकता है. 

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