US-Iran War Impact India: मिडिल ईस्ट में सीजफायर खत्म... जंग शुरू, 5 प्वाइंट में जानें भारत को कहां क्या नुकसान

US-Iran War Impact India: मिडिल ईस्ट में जंग भारत के लिए कई मायनों में परेशानी का सबब बन सकती है और इसका असर अमेरिका-ईरान में फरवरी के आखिर से जून की शुरुआत तक चले युद्ध के दौरान देखने को मिल चुका है.

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मिडिल ईस्ट युद्ध से भारत के लिए कई परेशानियां. (Photo: ITG/AI Generated) मिडिल ईस्ट युद्ध से भारत के लिए कई परेशानियां. (Photo: ITG/AI Generated)

दीपक चतुर्वेदी

  • नई दिल्ली,
  • 09 जुलाई 2026,
  • अपडेटेड 1:37 PM IST

डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) के एक ऐलान के बाद एक बार फिर से मिडिल ईस्ट को लेकर ग्लोबल टेंशन चरम पर पहुंच गई है. अमेरिका-ईरान के बीच जंग फिर शुरू होने से दुनिया की तेल जरूरतों के 20 फीसदी हिस्से की आपूर्ति के लिए जरूरी होर्मुज स्ट्रेट में रुकावट का खतरा भी बढ़ गया है. इन सबके बीच कच्चा तेल फिर से दुनिया को डराता हुआ नजर आ रहा है. अमेरिका ने बुधवार को ईरान के 90 ठिकानों को निशाना बनाया. आइए 5 प्वाइंट में जानते हैं नए सिरे से शुरू हुई ये जंग कैसे भारत के लिए टेंशन बन सकती है? 

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पहली टेंशन: तेल-गैस की सप्लाई 
बीते कुछ समय में अमेरिका-ईरान संघर्ष के चलते होर्मुज स्ट्रेट में आई रुकावट के चलते भारत में तेल-गैस का संकट देखने को मिला. भले ही भारत ने अपने आयात में विविधता लाकर इसे कम किया है, लेकिन इसके बावजूद Hormuz Strait देश की तेल-गैस सप्लाई के लिए अहम है. युद्ध से पहले इस समुद्री रास्ते से भारत के कुल कच्चे तेल आयात का करीब 40% और LNG का करीब 60% आता था. इसके बंद होने से सप्लाई पर असर पड़ा तो देश में करीब 4 साल बाद अचानक पेट्रोल-डीजल महंगा हो गया और एलपीजी के दाम भी बढ़े. ऐसे में अगर फिर से US-Iran War के चलते होर्मुज में रुकावट आती है, तो परेशानी देखने को मिल सकती है. 

दूसरी टेंशन: आयात बिल बढ़ने का खतरा
मिडिल ईस्ट में तनाव बढ़ने से भारत के लिए एक और बड़ी परेशानी ये खड़ी हो सकती है कि देश का आयात बिल बढ़ सकता है. दरअसल, भारत अपनी कुल जरूरत का करीब 85 फीसदी कच्चा तेल आयात करता है. Oil Import पर निर्भरता क्रूड की अंतरराष्ट्रीय कीमतों उतार-चढ़ाव की सीधा असर देश पर डालती है. अगर होर्मुज बंद होता है या इसमें रुकावट आती है, तो फिर Crude Oil Price में तेज उछाल आएगा, जो फिलहाल दिख भी रहा है. तेल महंगा होने से India's Import Bill बढ़ेगा और चालू घाटा बढ़ने से रुपया पर दबाव दिख सकता है, जो इकोनॉमी के लिए ठीक नहीं. 

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तीसरी टेंशन: Petrol-Diesel सस्ता होने की उम्मीद कम
US-Iran War के दौरान बीते कुछ समय में देश में जो तेल-गैस का संकट गहराया था, उसके चलते चार साल से स्थिर पेट्रोल-डीजल की कीमतों में भी इजाफा (Petrol-Diesel Price Hike) किया गया था. एक के बाद एक चार बार में फ्यूल प्राइस में करीब 7 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी की गई थी और इसके पीछे मिडिल ईस्ट टेंशन और सप्लाई में रुकावट के चलते सरकारी तेल कंपनियों को होने वाले भारी नुकसान का हवाला दिया गया था. LPG Price Hike का झटका भी लगा था. इसके बाद US-Iran सीजफायर और क्रूड सस्ता होने से उम्मीद बढ़ी थी कि आने वाले दिनों ईंधन सस्ता हो सकता है, लेकिन अब Crude Oil Price Rise और होर्मुज टेंशन के चलते ये उम्मीद कम हो गई है. 

चौथी टेंशन: महंगाई बढ़ने का खतरा
अमेरिका-ईरान युद्ध का अगला साइड इफेक्ट भारत में महंगाई के जोखिम के रूप में सामने खड़ा है और ये भी सीधे कच्चे तेल से जुड़ा हुआ है. दरअसल, भारत तेल के सबसे बड़ा आयातकों में शामिल है और इसका बड़ा हिस्सा होर्मुज से होकर आता है. अगर ये बंद होता है और तेल की कीमतों में ज्यादा उछाल आता है, तो फिर भारत को Oil Import के लिए ज्यादा डॉलर खर्च करने होंगे और आयात बिल बढ़ने का दबाव रुपये पर दिखेगा, जो आयातित सामानों को महंगा करेगा, जिससे महंगाई की मार बढ़ने का खतरा ज्यादा हो जाएगा.

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पांचवीं टेंशन: शेयर बाजार से FPI तक पर असर
किसी भी आपदा, युद्ध या अन्य ग्लोबल टेंशन की स्थिति में निवेशक अक्सर सुरक्षित निवेश की ओर रुख करते हैं और शेयर बाजार में बिकवाली का सिलसिला शुरू हो जाता है. इसका बड़ा उदाहरण बुधवार को कारोबार के दौरान देखने को मिला, जब Donald Trump ने ईरान को लेकर बड़ा बयान देते हुए शांति वार्ता को समय की बर्बादी बताया और ईरान को नई धमकियां देनी शुरू कर दीं. इधर उन्होंने ऐलान किया, तो उधर भारतीय शेयर बाजार में भूचाल आ गया और देखते ही देखते ये क्रैश हो गया था. यानी अमेरिका-ईरान युद्ध शेयर बाजार निवेशकों के लिए परेशानी का सबब बन सकता है. 

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