ट्रेन अपनी रफ्तार से गुजर रही थी. लेकिन लोको पायलट की पैनी नजर पटरियों पर थी. दरअसल जंगल का यह इलाका लोको पायलटों के लिए हमेशा से एक संवेदनशील जोन रहा है, यहां पल झपकते बड़ा हादसा हो सकता है.
दरअसल पश्चिम रेलवे के भावनगर मंडल के तहत आने वाले अमरेली जिले के धारी में रेलवे कर्मचारियों की सूझबूझ से एक बड़ा हादसा टल गया. अचानक रेल पटरियों पर आए 10 एशियाई शेरों के झुंड को लोको पायलट ने इमरजेंसी ब्रेक लगाकर सुरक्षित बचा लिया है. अब लोको पायलट और सहायक लोको पायल की खूब सराहना हो रही है. रेलवे का कहना है कि ऐसे कर्मचारियों पर विभाग को गर्व है.
अचानक पटरी पर शेयर और फिर...
लोको पायलट अनीश एस. और सहायक लोको पायलट वीरेंद्रसिंह परमार हमेशा की तरह पूरी सतर्कता के साथ अपनी ड्यूटी पर तैनात थे. इंजन के केबिन से सामने फैली रेल की पटरियां दिखाई दे रही थीं, और ट्रेन तेजी से आगे बढ़ रही थी. तभी लोको पायलट को ट्रैक पर कुछ दूर में शेरों का झुंड दिखाई दिया. इस झुंड में छोटे शावक भी शामिल थे, जो पटरियों के आसपास घूम रहे थे.
फैसला फटाफट लेना था, और फिर बिना देरी किए लोको पायलट ने ट्रेन रोकने का फैसला कर लिया, और तुरंत इमरजेंसी ब्रेक लगा दिया. रफ्तार में दौड़ती ट्रेन अचानक रुक गई, और सामने ही कुछ दूर में शेरों का झुंड दिख रहा है. एक-एक पल कैमरे में कैद हो रहा था. शेरों का झुंड बेफिक्र होकर पटरी के आसपास घूम रहा है.
जंगल में सुरक्षित लौटे शेर
ट्रेन रुकने के बाद दोनों पायलटों ने शेरों के पटरियों से दूर जाने का इंतजार किया. जब सभी 10 शेर सुरक्षित रूप से जंगल के भीतर चले गए, तब जाकर ट्रेन को रवाना किया गया. जिससे बड़ा हादसा टल गया.
रेलवे प्रशासन ने जताई प्रतिबद्धता
भावनगर मंडल ने इस घटना के बाद दोनों लोको पायलटों की खूब सराहना हो रही है, पश्चिम रेलवे के अधिकारियों के अनुसार, गिर और आसपास के क्षेत्रों से गुजरने वाले रेल मार्गों पर लोको पायलटों को विशेष रूप से सतर्क रहने के निर्देश दिए जाते हैं. इन दोनों लोको पायलटों ने यह साबित किया है कि भारतीय रेलवे सुरक्षित रेल परिचालन के साथ-साथ वन्यजीव संरक्षण के प्रति भी पूरी तरह से प्रतिबद्ध है.
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