New Labour Code Details: हफ्ते में 48 घंटे काम, PF, सैलरी, ग्रेच्‍युटी... नए लेबर कोड से जुड़े आ गए सभी नियम

New Labour Code Full Details: नए लेबर कोड के सभी नियम जारी हो चुके हैं. नए लेबर कोड के तहत 48 घंटे वर्क वीक को नोटिफाई किया गया है. साथ ही सैलरी और ग्रेच्‍युटी नियम के बारे में भी बताया गया है.

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नए लेबर कोड्स के सभी नियम जारी. (Photo: PIB) नए लेबर कोड्स के सभी नियम जारी. (Photo: PIB)

आजतक बिजनेस डेस्क

  • नई दिल्‍ली,
  • 13 मई 2026,
  • अपडेटेड 12:51 PM IST

नए लेबर कोड से जुड़े सभी नियमों को नोटिफाई कर दिया गया है. इन नियमों से सैलरी स्‍ट्रक्‍चर, वर्कप्‍लेस प्रॉसेस और कंप्‍लॉयंस सिस्‍टम में बदलाव आ सकता है. राज्‍य भी इन नियमों को लागू कर सकते हैं. 

केंद्र सरकार ने हाल ही में 29 लेबर कानूनों की जगह चार नए कानूनों को लागू किया है. 4 लेबर कोड्स में सैलरी, इंडस्‍ट्रियल रिलेशन, सोशल सिक्योरिटी और काम से जुड़ी सिक्‍योरिटी और वर्किंग कल्‍चर को कवर किया गया है. आइए जानते हैं इसमें से कुछ खास नियमों के बारे में... 

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1. हफ्ते में 48 घंटे काम 
जिन कर्मचारियों को रोजाना के हिसाब से पैसे नहीं मिलते हैं, उनके लिए एक खास नियम में बदलाव हुआ है. उन्‍हें अब एक दिन में अधिकतम 12 घंटे और हफ्ते में 48 घंटे ही काम करना होगा. यानी कि सप्‍ताह में सिर्फ 4 दिन काम करना है. बाकी 3 दिनों की छुट्टी रहने वाली है. 

2. बेसिक सैलरी का नियम
बेसिक सैलरी और कुल CTC का कम से कम 50% होगा. इससे  PF और ग्रेच्युटी बढ़ जाएगा. इस बदलाव से कई कर्मचारियों की इन-हैंड सैलरी घट सकती है. 

3. PF में बदलाव

  • PF की गणना अब ज्यादा बेसिक वेतन पर होगी. 
  • कर्मचारी और कंपनी दोनों का PF योगदान बढ़ सकता है. 
  • रिटायरमेंट सेविंग ज्यादा बनेगी. 

4. ग्रेच्युटी का नया नियम
फिक्स्ड टर्म कर्मचारियों को भी ग्रेच्युटी मिलेगी. हालांकि, इन्‍हें अब एक साल की नौकरी करने के बाद ही ग्रेच्‍युटी दी जाएगी. रेगुलर कर्मचारियों को 5 साल पर ही ग्रेच्‍युटी मिलेगी. 

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5. सैलरी का नियम 

  • सभी कर्मचारियों को न्यूनतम वेतन देना अनिवार्य होगा. 
  • समान काम पर पुरुष और महिला को समान वेतन. 
  • डेली वेजेज में उसी दिन भुगतान, वीकली वेजेज में लास्ट वर्किंग डे और अगले महीने की 7 तारीख तक भुगतान करना होगा. 
  • इस्तीफा, टर्मिनेशन के बाद 2 वर्किंग डे में पूरा भुगतान करना होगा. 
  • ओवरटाइम वर्क पर दोगुना वेतन देना होगा. 

6. सैलरी की सभी जानकारी 
कंपनी को मिनिमम वेजेज, वर्किंग घंटे, वेजेज पीरियड, सैलरी पेमेंट डेट और अन्‍य सभी जानकारी देनी जरूरी होगी. 

7. बोनस नियम
कमाई सीमा के भीतर आने वाले कर्मचारियों को बोनस देना होगा. बोनस कम से कम 8.33% और अधिकतम 20% होना चाहिए. 

 

 

8. वर्क कमिटी 
अगर किसी कंपनी में 100 या उससे ज्‍यादा कर्मचारी काम करते हैं तो वर्क कमेटी बन सकती है. 20 या अधिक workers पर GRC (Grievance Redressal Committee) बनाना जरूरी होगा, जिसमें महिलाएं भी शामिल रहेंगी. शिकायत का निपटारा 30 दिन के अंदर करना होगा. 51% सपोर्ट वाली यूनियन नेगोशिएशन यूनियन मानी जाएगी. नहीं होने पर Negotiating Council बनेगी. 

9. छंटनी पर क्‍या होगा नियम? 
सेवा शर्तों में बदलाव से 21 दिन पहले नोटिस देना जरूरी होगा. 50-299 वर्कर की छंटनी करने पर सरकार को जानकारी देनी होगी. छंटनी करने की स्थिति में 50% मजदूरी और महंगाई भत्ता और एक महीने पहले नोटिस देना होगा. 15 दिन की एवरेज पेय के साथ मुआवजा देना होगा. 

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अगर 300 से ज्‍यादा कर्मचारियों की छंटनी की जाती है तो सरकार की अनुमति अनिवार्य होगी. 3 महीने का नोटिस देना होगा. कंपनी बंद करने की स्थिति में 90 दिन पहले आवेदन करना होगा. 15 दिन का वेतन भी देना होगा. 

10. कंपनी रजिस्‍ट्रेशन का नियम 
10 या उससे ज्‍यादा कर्मचारी वाले स्‍थापित को 60 दिन में रजिस्‍ट्रेशन कराना होगा. ऑनलाइन रजिस्‍ट्रेशन की सुविधा होगी. ऑपरेशन बंद और शुरू करने की सूचना देनी होगी. सभी कर्मचारियों को अपॉइंटमेंट लेटर देना होगा. 

11. कर्मचारियों का फ्री हेल्‍थ चेकअप. 

12. सुरक्षित वर्कप्‍लेस बनाना कंपनी की जिम्‍मेदारी होगी. 

13. सरकार के आदेश अनुसार Safety Committee बनानी होगी. 

14. कंस्‍ट्रक्शन सेक्‍टर में 250 से ज्‍यादा कर्मचारी और माइंस में 100 से ज्‍यादा वर्कर्स पर सेफ्टी ऑफिसर जरूरी है. 

15. हेल्‍थ और वेलफेयर फैसिलिटी जरूरी. 

16. 100 या अधिक वर्कर पर कैंटीन जरूरी. 

17. Mines और 500+ workers वाले construction sites पर ambulance room जरूरी. 

18. महिलाएं सभी सेक्‍टर में काम कर सकती हैं. सुबह 6 बजे से पहले या शाम 7 बजे के बाद काम पर सेफ्टी जरूरी. नाइट शिफ्ट में भी महिलाओं को काम करने की छूट. 

19. मौत, गंभीर चोट होने पर अथोरिटी को सूचना देना जरूरी.

20. खतरनाक कामों में pregnant women के employment पर restriction लग सकता है.

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21. Factory, contract labour और bidi-cigar work के लिए common licence की सुविधा. 

22. 10 से ज्‍यादा माइग्रेंट वर्कर पर खास नियम लागू होगा और एक साल में जर्नी अलाउंस भी देना होगा.  

23. कॉन्‍ट्रैक्‍टर सैलरी नहीं देता है तो कंपनी जिम्मेदार होगी. 

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