फर्जीवाड़ा करके विदेश भेजे ₹3,675 करोड़, तीन CA पर FIR... 40 और रडार पर, फॉरेन रेमिटेंस केस में I-T का क्रैकडाउन

फर्जी तरीकों का इस्तेमाल करके भारत से हजारों करोड़ रुपये विदेश भेजने के मामलों में आयकर विभाग ने कार्रवाई तेज कर दी है. जयपुर, श्रीगंगानगर और हैदराबाद में चार्टर्ड अकाउंटेंट्स के खिलाफ एफआईआर दर्ज हुई है. आरोप है कि बिना जरूरी दस्तावेजों की जांच किए फॉर्म 15CB प्रमाणपत्र जारी किए गए, जिनके आधार पर बड़ी रकम विदेश भेजी गई.

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आयकर विभाग ने ₹3,675 करोड़ के विदेशी रेमिटेंस की जांच के सिलसिले में 3 चार्टर्ड अकाउंटेंट्स के खिलाफ एफआईआर दर्ज की. (सांकेतिक तस्वीर) आयकर विभाग ने ₹3,675 करोड़ के विदेशी रेमिटेंस की जांच के सिलसिले में 3 चार्टर्ड अकाउंटेंट्स के खिलाफ एफआईआर दर्ज की. (सांकेतिक तस्वीर)

शरत कुमार

  • जयपुर/नई दिल्ली,
  • 25 अगस्त 2026,
  • अपडेटेड 10:07 AM IST

आयकर विभाग ने फर्जी तरीकों का इस्तेमाल करके भारत से करीब ₹3,675 करोड़ रुपये विदेश भेजे जाने के मामले में कार्रवाई तेज कर दी है. यह मामला फॉरेन रेमिटेंस (Foreign Remittance) से जुड़ा है. इसका आसान मतलब है, किसी एक देश से दूसरे देश में पैसे भेजना. उदाहरण के लिए, अगर भारत में रहने वाला कोई व्यक्ति या कंपनी अमेरिका, UAE या किसी दूसरे देश में पैसे भेजती है, तो इसे फॉरेन रेमिटेंस कहा जाता है. भारतीय रिजर्व बैंक ने लिबरलाइज्ड रेमिटेंस स्कीम (LRS) के तहत विदेशों में पैसे भेजने के लिए कुछ नियम तय किए हैं. विदेश पैसा भेजने पर बैंकों द्वारा टीसीएस (Tax Collected at Source) काटा जाता है.

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भारत में इनकम टैक्स प्रोफेशनल्स का एक नेटवर्क द्वारा आरबीआई के नियमों का उल्लंघन करते हुए फर्जी तरीकों का इस्तेमाल करके भारत से पैसा विदेशों में भेजा जा रहा था. आयकर विभाग ने इसी तरह के संदिग्ध लेनदेन की जांच के लिए देशभर में वेरिफिकेशन अभियान शुरू किया है. आयकर विभाग को डेटा एनालिसिस और खुफिया जानकारी के आधार पर ऐसी कई संस्थाओं का पता चला है, जिन्होंने पिछले तीन सालों में बड़ी मात्रा में विदेशी मुद्रा देश के बाहर भेजी, लेकिन उनकी आय और कारोबार का रिकॉर्ड इन लेनदेन से मेल नहीं खाता.

राजस्थान के जयपुर और श्रीगंगानगर के साथ तेलंगाना के हैदराबाद में चार्टर्ड अकाउंटेंट्स (CA) और अन्य लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है. इन मामलों में आरोप है कि बिना जरूरी दस्तावेजों की पर्याप्त जांच-पड़ताल किए फॉर्म 15CB प्रमाणपत्र जारी किए गए और इनके आधार पर सैकड़ों करोड़ रुपये की रकम विदेश भेजी गई. आयकर विभाग ने संबंधित चार्टर्ड अकाउंटेंट्स के कार्यालयों और दस्तावेजों की जांच की और इसके बाद पुलिस में शिकायत दर्ज कराई. जांच में कथित तौर पर ऐसे लोगों और कंपनियों के नाम सामने आए हैं, जिनकी आय और कारोबार कम था या जिन्होंने इनकम टैक्स रिटर्न दाखिल नहीं किए थे, लेकिन उनके नाम से बड़ी रकम विदेश भेजी गई.

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जयपुर के CA अभिषेक जैन पर एफआईआर

जयपुर में आयकर विभाग की फॉरेन असेट इंवेस्टिगेशन यूनिट की शिकायत पर चार्टर्ड अकाउंटेंट अभिषेक जैन के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है. आयकर विभाग की जयपुर यूनिट के डिप्टी डायरेक्टर (इंवेस्टिगेशन) मिंटूलाल मीणा की ओर से दी गई शिकायत के मुताबिक, वित्तीय वर्ष 2021-22 से 2023-24 के बीच कथित तौर पर शेल कंपनियों के जरिए भारत से करीब ₹23 अरब 95 करोड़ 63 लाख 97 हजार 271 रुपये (₹2,395 करोड़ ) विदेश भेजे गए. आयकर विभाग ने 18 अगस्त को मानसरोवर स्थित अभिषेक जैन के कार्यालय में जांच की थी. आयकर विभाग के मुताबिक, वित्त वर्ष 2021-22 से 2023-24 के बीच फॉरेन रेमिटेंस से जुड़े 3,168 फॉर्म 15CB प्रमाणपत्र जारी किए जाने की जानकारी सामने आई.

आरोप है कि इन प्रमाणपत्रों को जारी करने से पहले जरूरी बैंक खातों, समझौतों और दूसरे सहायक दस्तावेजों की पर्याप्त जांच नहीं की गई. इस मामले में करीब 40 संस्थाओं और प्रोफेशनल्स की भूमिका जांच के दायरे में बताई जा रही है. विभाग के मुताबिक, इनमें कई ऐसे लोग और संस्थाएं शामिल हैं, जिन्होंने आयकर रिटर्न दाखिल नहीं किए थे या जिनका घोषित कारोबार और आय काफी कम थी. इसके बावजूद इनके नाम से बड़ी रकम विदेश भेजे जाने का आरोप है. आयकर विभाग को आशंका है कि फर्जी प्रमाणपत्रों के जरिए विदेशी मुद्रा का बड़ा हस्तांतरण किया गया. इस मामले में विभाग ने पुलिस से चार्टर्ड अकाउंटेंट्स के अलावा कथित बिचौलियों और नेटवर्क से जुड़े दूसरे लोगों की भूमिका की भी जांच करने को कहा है.

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श्रीगंगानगर के CA शेरिल गुप्ता पर एफआईआर

राजस्थान के श्रीगंगानगर जिले के रायसिंहनगर में भी आयकर विभाग की शिकायत पर CA शेरिल गुप्ता के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है. आरोप है कि उन्होंने जरूरी दस्तावेजों की पर्याप्त जांच किए बिना 1,674 फॉर्म 15CB प्रमाणपत्र जारी किए. इन प्रमाणपत्रों के जरिए करीब ₹815.52 करोड़ की रकम विदेश भेजे जाने का आरोप है. आयकर विभाग के डिप्टी डायरेक्टर ऑफ इंवेस्टिगेशन कन्हैयालाल मीणा की शिकायत पर रायसिंहनगर थाने में केस दर्ज किया गया है. विभाग के मुताबिक, 18 अगस्त को CA के कार्यालय में हुई कार्रवाई के दौरान 1,674 में से 1,405 प्रमाणपत्रों की जांच की गई. ये प्रमाणपत्र 56 रेमिटर्स से जुड़े थे और इनके जरिए ₹815 करोड़ 52 लाख 13 हजार 553 रुपये विदेश भेजे जाने की बात सामने आई. तकनीकी कारणों से बाकी प्रमाणपत्र डाउनलोड नहीं किए जा सके.

विभाग के मुताबिक, सभी 1,674 प्रमाणपत्र 66 लोगों से जुड़े थे. इनमें अजमेर, जयपुर और भीलवाड़ा के कारोबारी शामिल थे, जबकि कुछ लोग केरल, महाराष्ट्र, कर्नाटक, पश्चिम बंगाल और अन्य राज्यों से बताए गए हैं. जांच में अरशद खान से जुड़े 990 लेनदेन के जरिए कथित तौर पर ₹610.55 करोड़ से ज्यादा विदेश भेजे जाने की बात सामने आई. गणेश सखाराम जाधव से जुड़े 71 लेनदेन में करीब ₹44.63 करोड़, एल कोमेटिडो मरीन शिपिंग कंपनी के 55 लेनदेन में करीब ₹39.96 करोड़ और बुलफ्रॉग लॉजिस्टिक्स से जुड़े 35 लेनदेन में करीब ₹28.17 करोड़ की रेमिटेंस का जिक्र किया गया है.

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आयकर विभाग के मुताबिक, इन लेनदेन से जुड़े दस्तावेजों में लॉजिस्टिक्स, सॉफ्टवेयर, शिपिंग और इमिग्रेशन कारोबार से जुड़ी कई कंपनियों के नाम सामने आए हैं. विभाग का आरोप है कि जांच के दौरान दर्ज बयान में CA शेरिल गुप्ता ने स्वीकार किया कि प्रमाणपत्र जारी करने से पहले उन्होंने संबंधित बैंक खातों, समझौतों और दूसरे दस्तावेजों की व्यक्तिगत रूप से जांच या पुष्टि नहीं की थी.

हैदराबाद के CA हरि शंकर पर भी एफआईआर

तेलंगाना के हैदराबाद में भी चार्टर्ड अकाउंटेंट हरि शंकर रेड्डी रेनाटी और अन्य लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया गया है. हैदराबाद सेंट्रल क्राइम स्टेशन (CCS) ने 22 अगस्त को आयकर विभाग की शिकायत के आधार पर मामला दर्ज किया. यह शिकायत आयकर विभाग के डिप्टी डायरेक्टर ऑफ इनकम टैक्स (इंवेस्टिगेशन) जी कृष्ण राव ने की थी. आरोप है कि दो कथित शेल कंपनियों के जरिए वित्तीय वर्ष 2021-22 और 2022-23 के दौरान ₹464.8 करोड़ से ज्यादा की अनधिकृत विदेशी रेमिटेंस कराई गई. मामला पुणे में रजिस्टर्ड क्लिकविन टेक्नो सॉल्यूशंस एलएलपी और विशाखापत्तनम में रजिस्टर्ड स्टॉकपाइल सॉफ्टेक सॉल्यूशंस प्राइवेट लिमिटेड से जुड़े फॉर्म 15CB प्रमाणपत्रों का है.

आयकर विभाग के मुताबिक, इन कंपनियों के लिए जारी किए गए प्रमाणपत्रों में उनके अकाउंट बुक्स, समझौतों और सहायक दस्तावेजों की पर्याप्त जांच नहीं की गई. जांच के दौरान स्टॉकपाइल सॉफ्टेक सॉल्यूशंस प्राइवेट लिमिटेड के रजिस्टर्ड ऑफिस का फिजिकल वेरिफिकेशन भी किया गया. आयकर विभाग के मुताबिक, वहां पिछले करीब पांच साल से दूसरी कंपनी ईप्रोसॉफ्ट इंडिया प्राइवेट लिमिटेड का कब्जा था. विभाग ने दोनों कंपनियों को फर्जी या शेल इकाइयां बताया है. आरोप है कि CA हरि शंकर रेड्डी रेनाटी के प्रमाणपत्रों के आधार पर बैंकों ने विदेशी लेनदेन को प्रोसेस किया और दोनों कंपनियों ने कुल ₹464.8 करोड़ से ज्यादा की रकम विदेश भेजी. आयकर विभाग की जांच में दर्ज बयान के मुताबिक, CA ने कथित तौर पर कहा कि प्रमाणपत्र जारी करने से पहले उन्होंने संबंधित कंपनियों की अकाउंट बुक्स की जांच या पुष्टि नहीं की थी.

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क्या है फॉर्म 15CB?

फॉर्म 15CB विदेश भेजी जाने वाली कुछ रकम पर चार्टर्ड अकाउंटेंट की ओर से जारी किया जाने वाला टैक्स निर्धारण प्रमाणपत्र है. लागू मामलों में इसके जरिए लेनदेन और उससे जुड़े दस्तावेजों की जांच, टैक्स देनदारी का निर्धारण और विदेशी रेमिटेंस से जुड़ी जानकारी प्रमाणित की जाती है. इन तीनों मामलों में आयकर विभाग का आरोप है कि जरूरी जांच के बिना ऐसे प्रमाणपत्र जारी किए गए, जिनका इस्तेमाल विदेश में रकम भेजने के लिए किया गया.

अब जांच का फोकस क्या?

तीनों मामलों में पुलिस और आयकर विभाग अब विदेशी रेमिटेंस की पूरी वित्तीय कड़ी की जांच कर रहे हैं. जांच में CA के अलावा कथित बिचौलियों, कंपनियों, रेमिटर्स और अन्य लोगों की भूमिका भी देखी जा रही है. एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि क्या इन मामलों के पीछे अलग-अलग नेटवर्क थे या इनके बीच कोई बड़ा संगठित सिंडिकेट जुड़ा हुआ था.

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