अमेरिका-ईरान में युद्ध खत्म हो चुका है. US-Iran Peace Deal के बाद से ही अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें भी लगातार टूटती हुई नजर आई हैं. ताजा गिरावट के बाद अब Crude Oil Price बीते चार महीने में सबसे नीचे आ चुका है और युद्ध के दौरान 120 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंचकर दुनिया को डराने वाला ये तेल अब 77 डॉलर से भी नीचे आ चुका है.
तेल की कीमतों में उछाल के दौरान पाकिस्तान, बांग्लादेश से लेकर ब्रिटेन और भारत तक में तेल-गैस का भारी संकट देखने को मिला. भारत की बात करें, तो क्रूड महंगा होने के कारण करीब चार साल सरकारी तेल कंपनियों को पेट्रोल-डीजल की कीमतों में इजाफा करना पड़ा और ये एक-दो बार नहीं, बल्कि चार बार किया गया. अब जबकि क्रूड के दाम क्रैश हो गए हैं, तो Petrol-Diesel Price Cut की उम्मीद भी बढ़ रही है.
$120 से 77 के नीचे तेल का भाव
बीते 28 फरवरी का पहली बार अमेरिका और इजरायल ने ईरान पर स्ट्राइक की शुरुआत की थी और इसके बाद ईरान ने पलटवार किए, साथ ही दुनिया की तेल-गैस जरूरतों के 20 फीसदी की भरपाई करने वाले महत्वपूर्ण समुद्री रूट होर्मुज स्ट्रेट को बंद कर दिया. Hormuz Strait क्लोज होने के बाद अचानक अप्रैल महीने के दौरान कच्चा तेल 120 डॉलर के आसपास ट्रेड करने लगा.
इसका असर ये हुआ कि तमाम देशों में ईंधन-गैस की कीमतों में तगड़ा इजाफा किया गया, महंगाई की मार पड़ी और इससे खुद अमेरिका भी अछूता नहीं रहा. अब दोनों यूएस-ईरान के बीच शांति समझौते पर सहमति के बाद तेल की कीमतों में अचानक गिरावट शुरू हो गई और ये अब तक जारी है. खबर लिखे जाने तक ब्रेंट क्रूड की कीमत (Brent Crude Price) 76.47 डॉलर प्रति बैरल, WTI Crude Price 72.63 डॉलर प्रति बैरल, Murban Crude Price 69.63 डॉलर प्रति बैरल पर ट्रेड कर रहा था. ये कच्चे तेल की कीमतों का बीते चार महीने का सबसे निचला स्तर है.
क्या सस्ता होगा Petrol-Diesel?
अब सवाल ये कि जब कच्चे तेल की कीमतें आसमान पर पहुंच गई थीं और तेल कंपनियों को हो रहे घाटे के चलते उन्हें पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ाने पर मजबूर होना पड़ा था, तो क्या अब तेल सस्ता होने से ईंधन की कीमतों में भी कटौती की जाएगी.
इसे लेकर कोटक सिक्योरिटीज के कमोडिटी रिसर्च के एवीपी कायनात चैनवाला ने कहा कि US-Iran में समझौते से ग्लोबल टेंशन कम हुई है और अमेरिकी ट्रेजरी द्वारा 60 दिनों के लिए ईरानी तेल और पेट्रोलियम उत्पादों की बिक्री को अनुमति देने से ग्लोबल सप्लाई चेन में भी सुधार की उम्मीदें मजबूत हुई हैं. टैंकर ट्रैकिंग डेटा देखें, तो पिछले सप्ताह एशिया की ओर 30 मिलियन बैरल से अधिक कच्चा तेल भेजा गया था.
चैनवाला के मुताबिक, ईरान एशियाई खरीदारों को कच्चे तेल पर भारी छूट दे रहा है, तो वहीं खाड़ी प्रोड्यूशर्स ने प्रमुख प्लांटों में परिचालन फिर शुरू कर दिया है. अगर होर्मुज से आवाजाही सामान्य बनी रहती है, तो तेल जल्दी ही बाजारों में पहुंचेगा. हालांकि, जब तक डिमांड में सुधार नहीं होता, ईंधन की कीमतों में कुछ खास बदलाव की उम्मीद कम है.
अचानक नहीं घटेंगे पेट्रोल-डीजल के दाम
मोतीलाल ओसवाल वेल्थ मैनेजमेंट द्वारा किए गए शोध से पता चलता है सस्ता तेल देश के आयात बिल को कम करने में मदद करता है, रुपये को मजबूती देता है और महंगाई के दबाव को कम करता है. हालांकि, पेट्रोल और डीजल की कीमतों में तत्काल कटौती की उम्मीद कर रहे उपभोक्ताओं को शायद इंतजार करना पड़ेगा. इनमें तुरंत गिरावट आने की संभावना नहीं है.
इसकी वजह ये है कि भारत में ईंधन की कीमतें कच्चे तेल की कीमतों के अलावा भी कई कारकों पर निर्भर करती हैं, जिनमें टैक्स, रिफाइनिंग मार्जिन और मार्केटिंग कॉस्ट समेत अन्य शामिल होते हैं. हालांकि, कच्चे तेल में इस गिरावट से भारत के आयात बिल में कुछ राहत मिल सकती है.
आजतक बिजनेस डेस्क