बिहार में राहुल के 'प्लान परिवर्तन' में रोड़ा कौन? कांग्रेस में पैसे से पोस्ट पाने के आरोप

बिहार में कांग्रेस करीब साढ़े तीन दशक से सत्ता से बाहर है और अब अपनी सियासी जमीन को दोबारा से पाने की एक्सरसाइज शुरू की है. सूबे में अपने सियासी आधार को मजबूत करने के साथ-साथ संगठन को धार देने के लिए 'संगठन सृजन अभियान' शुरू किया है, जिसका पायलट प्रोजेक्ट बिहार बना है, लेकिन अब उस पर विवाद गहरा गया है.

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बिहार मं राहुल गांधी के प्लान पर क्यों उठ रहे सवाल (PhotoITG) बिहार मं राहुल गांधी के प्लान पर क्यों उठ रहे सवाल (PhotoITG)

मौसमी सिंह

  • नई दिल्ली,
  • 15 जुलाई 2026,
  • अपडेटेड 8:23 AM IST

कांग्रेस अपनी सियासी जमीन को दोबारा से पाने के जतन में जुटी है. इसी कड़ी में कांग्रेस 'संगठन सृजन अभियान' के तहत देश भर में संगठन में बड़े बदलाव करके खुद को फिर से मजबूत करने की उम्मीद कर रही है. इसका मकसद पार्टी के बड़े संगठनात्मक बदलाव के हिस्से के तौर पर देश भर के सदस्यों और पदाधिकारियों का एक सेंट्रलाइज़्ड डिजिटल डेटाबेस बनाना है. 

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हालांकि, कांग्रेस के इस कवायद के तहत सबसे ज़्यादा चर्चा में रहने वाला और कथित तौर पर विवादित प्रयोग बिहार में हो रहा है, जहां कांग्रेस एक ऐसे मॉडल को आज़मा रही है जो आगे चलकर पूरे देश के लिए एक टेम्पलेट बन सकता है. 

बिहार में कांग्रेस के संगठनात्मक ढांचे को मजबूत करने के मकसद से 11 अप्रैल को 'सृजन साथी जनसंपर्क कार्यक्रम' शुरू किया गया है, जिसे लेकर पार्टी के वरिष्ठ नेता ही खुलकर विरोध में उतर आए हैं. कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष राजेश राम ने इसे संगठन में पारदर्शिता लाने और जमीनी स्तर कार्यकर्ताओं को आगे बढ़ाने की पहल बताया. लेकिन विवाद इसकी शर्तों को लेकर शुरू हुआ और पैसे लेकर पोस्ट बेचने के आरोप लग रहे हैं? 

राहुल के पायलट प्रोजेक्ट का बिहार में प्रयोग

कांग्रेस ने 'संगठन सृजन साथी' के बैनर तले तीन महीने पहले बिहार कांग्रेस कमेटी ने डिजिटल सदस्यता अभियान शुरू किया है, जिसे 'सृजन साथी जनसंपर्क कार्यक्रम' का नाम दिया गया है. योजना के तहत कांग्रेस संगठन में पद पाने वाले इच्छुक नेताओं को पहले अपने समर्थकों को 'सृजन साथी' बनाना होगा, जिसके लिए हर सदस्यता की कीमत 50 रुपये रखी गई है.

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कांग्रेस के 'सृजन साथी जनसंपर्क कार्यक्रम' के तहत 50 रुपये जमा कर डिजिटल पंजीकरण कराया जा रहा. अप्रैल में शुरू हुआ यह प्रोग्राम लगभग 70 प्रतिशत पूरा हो चुका है. पार्टी के अनुसार तीन लाख से ज़्यादा सदस्य पहले ही जुड़ चुके हैं और जुलाई के आखिर तक इस कवायद के पूरा होने की उम्मीद है.

पार्टी का सदस्यता अभियान पूरी तरह से बिहार यूनिट के लिए बनाए गए मोबाइल ऐप के जरिए चलाया जा रहा है. एक रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर से चार सदस्यों तक को जोड़ा जा सकता है. हर सदस्य को वोटर आईडी कार्ड व सेल्फी का इस्तेमाल करके रजिस्टर करना होता है. कांग्रेस नेताओं का कहना है कि इस प्रोजेक्ट पर बारीकी से नज़र रखी जा रही है, क्योंकि अगर यह सफल रहा, तो राहुल गांधी के संगठनात्मक सुधारों के हिस्से के तौर पर इसे पूरे देश में लागू किया जा सकता है,

कांग्रेस में सदस्यता से नेतृत्व देने का प्लान

कांग्रेस का डिजिटल अभियान बिहार कांग्रेस में पदाधिकारी बनने के लिए एक नया रोडमैप भी तय करेगा. योग्यता के मानदंड सीधे तौर पर जोड़े गए सदस्यों की संख्या से जुड़े हैं.  संगठन सृजन कार्यक्रम के तहत 50 रुपये जमा कर डिजिटल पंजीकरण होने के बाद समर्थकों की संख्या के आधार पर पद के लिए सिफारिश होगी. इसमें 3,000 सृजन साथी जोड़ने पर प्रदेश उपाध्यक्ष, 2000 पर महासचिव, 1000 पर सचिव और 200 सदस्यों पर जिला स्तरीय पद मिलेगा.

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कांग्रेस नेताओं का अब तर्क है कि इस कवायद का मकसद संगठनात्मक पदों को लॉबिंग पर निर्भर होने के बजाय परफॉर्मेंस-बेस्ड (काम के आधार पर) बनाना है. इसी को लेकर विवाद खड़ा हो गया है. पार्टी के कई वरिष्ठ नेताओं का आरोप है कि यह व्यवस्था संगठन में मेहनत और वैचारिक प्रतिबद्धता की जगह आर्थिक क्षमता को महत्व देती है. 

कांग्रेस में पद के बदले पैसा?

सदस्यता के आधार पर पद मिलने वाले मानदंड ने पार्टी के भीतर सबसे बड़ा विवाद खड़ा कर दिया है. कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेताओं ने खुले तौर पर इस अभियान का विरोध किया है. खबर है कि कई निर्वाचन क्षेत्रों में पार्टी कार्यकर्ताओं से इसमें शामिल न होने के लिए कहा है. इस मॉडल का विरोध करते हुए कहा गया है कि यह पार्टी की परंपरा और संविधान के खिलाफ है.

बिहार कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं ने नाम न बताने की शर्त पर आजतक को बताया कि  दिल्ली में पार्टी आलाकमान से राज्य नेतृत्व के खिलाफ शिकायत भी की है, जिसमें आरोप लगाया गया है कि संगठनात्मक पद पाने के लिए कार्यकर्ताओं को असल में पैसे खर्च करने के लिए मजबूर किया जा रहा है. अगर कोई व्यक्ति करीब 1.5 लाख रुपये खर्च कर 3,000 लोगों का पंजीकरण करा देता है, तो वह व्यक्ति प्रदेश उपाध्यक्ष बनने की सिफारिश का पात्र बन जाएगा. 

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वह बताते हैं कि पैसे खर्च कर कोई भी ज़िला अध्यक्ष बन सकता है. यही हो रहा है. गांधी जी की पार्टी में पद बिकते हुए दिख रहे हैं. आप मेंबरशिप खरीदकर नेता बन सकते हैं. ऐसे में वर्षों से पार्टी के लिए काम कर रहे नेताओं का क्या होगा?

कांग्रेस के सदस्यता प्लान पर उठते सवाल 

कांग्रेस के सदस्यता अभियान का विरोध अब खुलकर हो रहा है. कई नेताओं ने सोशल मीडिया पर इस प्रक्रिया की आलोचना की है और आरोप लगाया है कि संगठनात्मक सुधार के नाम पर पैसे इकट्ठा किए जा रहे हैं. बिहार कांग्रेस प्रभारी कृष्णा अल्लावरु और प्रदेश अध्यक्ष राजेश राम को निशाना बनाने वाले पोस्टर और व्हाट्सएप मैसेज भी घूम रहे हैं.

कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता ने कहा कि सिर्फ कार्यकर्ता ही नहीं बल्कि पार्टी के कई सीनियर नेता भी इस मुहिम के खिलाफ हैं. वो कहते हैं कि यह सब एक दिखावा है. आप फोन करके पता कर सकते हैं कि पद पाने के लिए फर्जी सदस्य बनाए जा रहे हैं. जो लोग कभी कांग्रेस की विचारधारा से नहीं जुड़े, वो भी सदस्य बना दिए गए हैं.यहां तक की बीजेपी समर्थकों को सदस्य बनाया जा रहा है, वे बस मेंबरशिप खरीदकर संगठन में शामिल होना चाहते हैं.

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बिहार में 2025 का विधानसभा चुनाव लड़ चुके कांग्रेस के एक नेता ने बताया कि अगर किसी को चुनाव लड़ना है तो उसे अपनी टीम की ज़रूरत होती है. मुझे अपने जिले में प्रखंड स्तर से लेकर सचिव और यहां तक ​​कि उपाध्यक्ष स्तर तक बनाए गए सदस्यों के लिए पैसे देने पड़े हैं. अगर मैं ऐसा नहीं करता, तो कोई और जिला अध्यक्ष बन जाता और फिर मैं ऐसे व्यक्ति के साथ कैसे काम करता, जिसके साथ मैं सहज नहीं होता या जो मेरी टीम का हिस्सा नहीं होता.

कांग्रेस के बागी नेताओं में से एक आनंद माधव ने फेसबुक पर एक कार्टून पोस्ट किया, जिसमें कृष्णा अल्लावरु और राजेश राम को पैसे के बदले पार्टी के पद बेचते हुए दिखाया गया है. उन्होंने कहा कि मैं अभी भी AICC का सदस्य हूं. यह गांधी और नेहरू की पार्टी है, और आप गरीबों से पैसे कमाने की कोशिश कर रहे हैं. अगर आप अभी सदाकत आश्रम जाएं तो आप किसी को पहचान नहीं पाएंगे. उन लोगों का क्या जो दशकों से कांग्रेस की विचारधारा के साथ जुड़े हैं, लेकिन पद खरीदने की हैसियत नहीं रखते? अब टॉप लीडरशिप में सिर्फ वही लोग रह जाएंगे, जिनके पास पैसे की ताकत है. 

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कांग्रेस अभियान के बचाओ में उतरे राजेश राम

वहीं, आलोचना को खारिज करते हुए बिहार कांग्रेस अध्यक्ष राजेश राम ने इस अभियान का बचाव किया. उन्होंने कहा कि लंबे समय बाद पूरे बिहार में बदलाव किया जा रहा है. नई ऊर्जा लाई जा रही है और नए चेहरे देखने को मिल रहे हैं. अगर मैं काम न करूं, तो सब कुछ वैसा ही चलता रहेगा और हर कोई खुश रहेगा, लेकिन अगर आप काम करते हैं, तो कई लोगों का नाराज़ होना तय है.

राजेश राम ने दावा किया कि लोगों का रिस्पॉन्स उत्साहजनक रहा है. इस मुहिम में अभी तक लगभग 36 प्रतिशत OBC, 17 प्रतिशत EBC और 3 प्रतिशत आदिवासी शामिल हुए हैं. राहुल गांधी के समर्थन के बिना हम कुछ नहीं कर सकते. यह एक पायलट प्रोजेक्ट है. अगर यह बिहार में सफल होता है, तो इसे पूरे देश में लागू किया जा सकता है.उन्होंने आगे कहा कि नई व्यवस्था से आम कार्यकर्ताओं को आगे बढ़ने का मौका मिलता है.

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