चीन पर भारत की निर्भरता होगी खत्म, देसी कंपनी ने बनाया बिना मैग्नेट वाला मोटर

भारत में इलेक्ट्रिक वाहनों की स्वीकार्यता बढ़ रही है. लेकिन इसकी वजह से भारत की चीन पर निर्भरता भी बढ़ रही है. दरअसल, किसी भी इलेक्ट्रिक मोटर में लगने वाला मैग्नेट चीन से आता है. दुनिया में चीन ही ज्यादातर मैग्नेट प्रॉसेस और सप्लाई करता है. एक देसी कंपनी ने इसका हल खोज लिया है और ये हल बिना मैग्नेट वाला मोटर है.

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विमैग लैब्स ने अपना 5वां पेटेंट हासिल कर लिया है. (Photo: Vimag Labs) विमैग लैब्स ने अपना 5वां पेटेंट हासिल कर लिया है. (Photo: Vimag Labs)

आजतक ऑटोमोबाइल डेस्क

  • नई दिल्ली,
  • 17 जुलाई 2026,
  • अपडेटेड 8:32 AM IST

भारत में इलेक्ट्रिक व्हीकल्स को काफी बढ़ावा दिया जा रहा है. हर सेगमेंट में इलेक्ट्रिक गाड़ियों की एंट्री हो रही है और लोग बड़ी संख्या में ऐसी गाड़ियों को खरीद भी रहे हैं. हालांकि, इन व्हीकल्स के साथ एक बड़ी चुनौती रेयर अर्थ मैग्नेट पर निर्भरता है. इलेक्ट्रिक व्हीकल्स के मोटर में मैग्नेट का इस्तेमाल होता है. 

इन मैग्नेट के लिए कंपनियों की चीन पर निर्भरता है. लगभग सभी मैग्नेट को चीन में प्रॉसेस और फिर सप्लाई किया जाता है. ऐसे में चीन जब चाहे तब भारत में ईवी की रफ्तार को रोक सकता है. हालांकि, इसका सॉल्यूशन एक देसी कंपनी ने खोज निकाला है. 

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वर्चुअल मैग्नेट सिंक्रोनस मोटर बना लिया

विमैग लैब्स (Vimag Labs) ने दावा किया है कि उन्होंने एक ऐसी टेक्नोलॉजी खोज ली है, जो इस पूरी प्रक्रिया को बदल सकती है. कंपनी ने अपने वर्चुअल मैग्नेट सिंक्रोनस मोटर (VMSM) प्लेटफॉर्म का पांचवां पेटेंट सिक्योर कर लिया है. ये एक सॉफ्टवेयर बेस्ड इलेक्ट्रिक मोटर आर्किटेक्चर है, जो रेयर अर्थ परमानेंट मैग्नेट पर निर्भर नहीं करता है. 

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'अ रोबस्ट रोटेटिंग ट्रांसफॉर्मर एक्साइटेड सिंक्रोनस मोटर एंड इट्स कंट्रोल' टाइटल वाले इस पेटेंट में कंपनी के मैग्नेट फ्री मोटर टेक्नोलॉजी के कोर आर्किटेक्चर के बारे में जानकारी दी गई है. दूसरे मोटर्स से अलग वर्चुअल मैग्नेट सिंक्रोनस मोटर रियल टाइम में अपनी मैग्नेटिक फील्ड तैयार और कंट्रोल करता है. 

क्या है कंपनी की तैयारी?

इसके लिए ये मोटर बिजली की ताकत और प्रोप्राइटरी कंट्रोल एल्गोरिद्म का इस्तेमाल करता है. इसकी वजह से मोटर में परमानेंट मैग्नेट लगाने की जरूरत खत्म हो जाती है. विमैग लैब्स के सीईओ और को-फाउंडर मनीष सेठ का कहना है, 'इस पेटेंट को बनाने में 87,600 इंजीनियरिंग घंटों का वक्त लगा है.'

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उन्होंने बताया कि ये हमारे कमर्शियल रोडमैप के सभी डायमेंशन- ओईएम पार्टनरशिप, लाइसेंसिंग, मैन्युफैक्चरिंग स्केल-अप और फ्यूचर ग्रोथ को मजबूत बनाता है. लेटेस्ट पेटेंट के साथ विमैग लैब्स के पास कुल 5 पेटेंट्स हो गए हैं. इसके अलावा 10 अन्य पेटेंट और ट्रेडमार्क पाइपलाइन में हैं. 

ये पोर्टफोलियो मोटर आर्किटेक्चर, सॉफ्टवेयर कंट्रोल, पावर इलेक्ट्रॉनिक्स और ऐप्लिकेशन-स्पेसिफिक इम्पलेमेंटेशन को कवर करता है. बेंगलुरु बेस्ड कंपनी का कहना कि वे फिलहाल टू-व्हीलर और पैसेंजर व्हीकल मैन्युफैक्चर्र्स के साथ पायलट प्रोजेक्ट कर रहे हैं. उनका प्लान लाइट कमर्शियल, कमर्शियल व्हीकल और 200 kW-600kW के इंडस्ट्रियल सिस्टम रेंज में एक्सटेंशन का है.

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