रैपिडो चलाने वाली कंपनी रोप्पेन ट्रांसपोर्टेशन सर्विसेज पर केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण यानी CCPA ने 10 लाख रुपये का जुर्माना लगाया है. जांच में सामने आया कि रैपिडो ऐप पर ऐसे मैसेज और डिजाइन इस्तेमाल किए जा रहे थे, जो यात्रियों को बुकिंग कन्फर्म करने से पहले ज्यादा पैसे देने के लिए मजबूर करते थे. इसे CCPA ने डार्क पैटर्न और भ्रामक व्यापार तरीका बताया है.
CCPA की जांच के मुताबिक, रैपिडो ऐप पर पहले यात्री को एक किराया दिखाया जाता था, लेकिन बाद में बुकिंग के दौरान उसे और पैसे जोड़ने के लिए कहा जाता था. ऐप पर कई बार ऐसे मैसेज दिखते थे कि ज्यादा पैसे देने पर राइड मिलने के चांस बढ़ जाते हैं, या कैप्टन कम कीमत पर राइड नहीं ले रहे इसलिए 10, 20 या 30 रुपये और जोड़ें. इससे यात्री के मन में यह डर बैठता था कि पैसे नहीं बढ़ाए तो राइड नहीं मिलेगी. CCPA ने इस तरीके को "कन्फर्म शेमिंग" नाम दिया है.
इसके अलावा रैपिडो के "सेट योर प्राइस" फीचर की डिजाइन पर भी सवाल उठाए गए. कीमत बढ़ाने का ऑप्शन हरे रंग में दिखता था जबकि कीमत घटाने पर लाल या नारंगी रंग की चेतावनी आती थी. साथ ही कीमत बढ़ाने के लिए स्लाइडर में ज्यादा जगह दी गई थी. CCPA ने इसे "इंटरफेस इंटरफेरेंस" नाम की श्रेणी में रखा.
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CCPA ने यह भी कहा कि टिप हमेशा सेवा पूरी होने के बाद खुशी से दिया जाने वाला पैसा होता है, इसे राइड पाने की शर्त नहीं बनाया जा सकता. मोटर व्हीकल एग्रीगेटर गाइडलाइंस 2025 के मुताबिक भी टिप राइड खत्म होने के बाद ही मांगी जानी चाहिए.
रैपिडो ने अपनी सफाई में कहा कि टिप पूरी तरह मर्जी की बात है और उसका मैचिंग सिस्टम अतिरिक्त पैसे के बिना भी काम करता है. लेकिन CCPA ने इस दलील को नहीं माना और यह भी पाया कि ज्यादा पैसे देने से राइड मिलने की संभावना बढ़ने का कोई सबूत कंपनी नहीं दे सकी.
बता दें कि उबर, ओला और नम्मा यात्री जैसी कंपनियां भी फिलहाल CCPA की जांच के दायरे में हैं.
आशुतोष मिश्रा