E20 पेट्रोल को लेकर बहस नई नहीं है, लेकिन इस बार चर्चा की वजह एक ऐसा बयान बना, जिसने सोशल मीडिया पर हलचल मचा दी. दावा किया गया कि एथेनॉल से माइलेज 30% तक कम हो जाता है. इसके बाद सवाल उठने लगे कि क्या E20 पेट्रोल वाकई वाहन मालिकों की जेब पर एक्स्ट्रा बोझ डालने वाला है, या फिर एक तकनीकी बात को गलत तरीके से समझ लिया गया. अब BPCL खुद सामने आई है और कहा है कि कंपनी के अधिकारी के बयान का गलत मतलब निकाला गया.
दरअसल, भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (BPCL) ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म (X) पर एक यूजर के पोस्ट के जवाब में पूरे मामले पर सफाई दी है. BPCL का कहना है कि, उनके अधिकारी के बयान को गलत संदर्भ में पेश किया गया और इसका गलत मतलब निकाला गया है. ऐसे में जरूरी है कि शोर-शराबे से अलग हटकर पूरे मामले को तथ्यों के आधार पर समझा जाए. तो आइये जानें क्या है पूरा मामला-
हाल ही में एक न्यूज एजेंसी को दिए अपने एक इंटरव्यू में भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (BPCL) के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर (बायोफ्यूल्स) अनुराग सराओगी ने भारत के बायोफ्यूल प्रोग्राम और E20 पेट्रोल पर विस्तार से बात की. बातचीत के दौरान उनसे E20 पेट्रोल को लेकर लोगों की चिंताओं और अफवाहों पर सवाल पूछा गया. उन्होंने कहा कि बायोफ्यूल प्रोग्राम लंबे समय तक चलने वाला है और यह भारत के लिए काफी महत्वपूर्ण है.
इंटरव्यू के दौरान अनुराग सराओगी ने कहा कि, "इथेनॉल को लेकर लोगों की जो चिंता है, वास्तविक तौर पर केमिकल फॉर्म में इथेनॉल का माइलेज 30% कम होता है." हालांकि वह यहां शुद्ध एथेनॉल (Pure Ethanol) की बात कर रहे थे, न कि E20 पेट्रोल की. उन्होंने आगे कहा कि किसी भी वाहन का वास्तविक माइलेज केवल फ्यूल पर निर्भर नहीं करता. यह ड्राइविंग स्टाइल, रोड कंडिशन, ट्रैफिक और वाहन के मेंटनेंस जैसी कई बातों पर भी निर्भर करता है. उन्होंने यह भी कहा कि कंपनी द्वारा बताए गए माइलेज और रियल वर्ल्ड में मिलने वाले माइलेज में हमेशा अंतर होता है.
30 प्रतिशत माइलेज घटने की बात सामने आते ही अनुराग सराओगी का ये बयान सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया. जिसके बाद BPCL ने आधिकारिक बयान जारी कर पूरे मामले को स्पष्ट किया है. कंपनी ने कहा कि उनके अधिकारी के बयान को संदर्भ से हटाकर पेश किया गया है और इसका गलत अर्थ निकाला जा रहा है.
BPCL के अनुसार, "30% कम" का मतलब केवल इथेनॉल की कैलोरिफिक वैल्यू यानी ऊर्जा क्षमता से है. इथेनॉल की एनर्जी डेंसिटी सामान्य पेट्रोल की तुलना में लगभग 30% कम होती है. इसका यह मतलब बिल्कुल नहीं है कि E20 पेट्रोल इस्तेमाल करने पर गाड़ी का माइलेज या परफॉर्मेंस 30% तक घट जाएगा.
BPCL ने अपने बयान में कहा कि इथेनॉल ब्लेंडेड फ्यूल के कई बड़े फायदे हैं. इसमें ऑक्टेन रेटिंग बेहतर होती है, प्रदूषण कम होता है और भारत की आयातित कच्चे तेल पर निर्भरता भी घटती है. इससे देश की एनर्जी सेफ्टी मजबूत होती है और पर्यावरण को भी फायदा पहुंचता है. कंपनी का कहना है कि एथेनॉल ब्लेंडिंग एक सकारात्मक पहल है और यह भविष्य के लिए बेहतर और क्लीन फ्यूल व्यवस्था बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी.
बहरहाल, तेल कंपनियों का स्पष्टीकरण जो भी हो लेकिन जमीनी स्तर पर E20 पेट्रोल को लेकर काफी लोग शिकायत कर रहे हैं. E20 पेट्रोल को लेकर पहले से ही माइलेज, इंजन की परफॉर्मेंस और पुराने वाहनों के कंपोनेंट्स के डैमेज होने को लेकर चर्चा होती रही है. ऐसे में "30% कम" वाले बयान ने लोगों की चिंता और बढ़ा दी.
अश्विन सत्यदेव