MP को 'मिल्क कैपिटल' बनाने की तैयारी... 8.73 लाख से बढ़कर 12 लाख किग्रा प्रतिदिन पहुंचा आंकड़ा; जानें नई योजनाएं

MP सरकार ने अगले पांच वर्षों में प्रदेश को 'मिल्क कैपिटल' बनाने का लक्ष्य तय किया है. इसके साथ ही दुग्ध संकलन, पशुओं की उन्नत नस्ल, प्रति पशु दूध उत्पादन और कृत्रिम गर्भाधान के क्षेत्र में भी तेजी से काम किया जा रहा है. जुलाई 2026 में प्रदेश का दैनिक दुग्ध संकलन बढ़कर करीब 12 लाख किलो हो गया है.

Advertisement
18 लाख परिवारों तक पहुंचा दुग्ध समृद्धि संपर्क अभियान.(Photo:AI Generated) 18 लाख परिवारों तक पहुंचा दुग्ध समृद्धि संपर्क अभियान.(Photo:AI Generated)

aajtak.in

  • इंदौर,
  • 13 सितंबर 2026,
  • अपडेटेड 11:24 PM IST

मध्यप्रदेश में पशुपालन और दुग्ध उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए सरकार ने अगले पांच साल का बड़ा लक्ष्य तय किया है. सरकार का उद्देश्य प्रदेश को 'मिल्क कैपिटल' के रूप में विकसित करना है. इसके लिए दुग्ध सहकारी समितियों का विस्तार, नस्ल सुधार, बेहतर पोषण और वैज्ञानिक पशुपालन पर फोकस किया जा रहा है.

प्रदेश में दुग्ध संकलन में उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की गई है. करीब डेढ़ वर्ष पहले जहां प्रतिदिन 8.73 लाख किलो दूध का संकलन हो रहा था, वहीं जुलाई 2026 में यह बढ़कर करीब 12 लाख किलो प्रतिदिन पहुंच गया.

Advertisement

सरकार ने आने वाले वर्षों में प्रदेश में 26 हजार दुग्ध सहकारी समितियां गठित करने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य भी निर्धारित किया है. इससे दुग्ध उत्पादकों को संगठित बाजार और बेहतर सुविधाओं से जोड़ने में मदद मिलने की उम्मीद है.

उन्नत नस्ल के पशुओं की संख्या लगभग दोगुनी

21वीं पशु संगणना के आंकड़ों में प्रदेश के पशुपालन क्षेत्र में हो रहे बदलाव की तस्वीर सामने आई है. इसके अनुसार 20वीं पशु संगणना की तुलना में उन्नत नस्ल के पशुओं की संख्या करीब दोगुनी हुई है.

नस्ल सुधार के साथ प्रति पशु उत्पादकता बढ़ाने पर भी जोर दिया जा रहा है. देश में देशी और गैर-प्रमाणित मवेशियों की उत्पादकता 2014-15 में 927 किलो प्रति पशु प्रतिवर्ष से बढ़कर 2024-25 में 1,343.2 किलो  हो गई.

इसी अवधि में भैंसों की उत्पादकता 1,880 से बढ़कर 2,365.2 किलो और गाय के दूध की औसत उत्पादकता 1,648 से बढ़कर 2,251 किलो  प्रति पशु प्रतिवर्ष हुई है.

Advertisement

MP में राष्ट्रीय औसत से ज्यादा दूध उपलब्धता

मध्यप्रदेश में प्रति व्यक्ति दूध की उपलब्धता भी बढ़ी है. प्रदेश में यह आंकड़ा 550 ग्राम प्रतिदिन से बढ़कर 707 ग्राम प्रतिदिन हो गया है. वहीं राष्ट्रीय औसत 485 ग्राम प्रतिदिन बताया गया है.

बेहतर नस्ल, पोषण, रोग नियंत्रण और वैज्ञानिक पशुपालन को इस वृद्धि का प्रमुख आधार माना जा रहा है.

इन योजनाओं से बढ़ाया जा रहा नस्ल सुधार

प्रदेश में उन्नत नस्ल के पशुओं के प्रसार के लिए कई योजनाएं संचालित की जा रही हैं. इनमें मुख्यमंत्री डेयरी प्लस योजना, आचार्य विद्यासागर गौ संवर्धन योजना, मुख्यमंत्री दुधारू पशु प्रदाय योजना और डॉ. भीमराव अंबेडकर कामधेनु योजना शामिल हैं.

इन योजनाओं के जरिए पशुपालकों को उन्नत नस्ल के पशु उपलब्ध कराने और दूसरे राज्यों से बेहतर नस्ल के पशु प्रदेश में लाने को प्रोत्साहित किया जा रहा है.

18 लाख परिवारों तक पहुंचा दुग्ध समृद्धि संपर्क अभियान

पशुओं की उत्पादकता बढ़ाने के लिए दुग्ध समृद्धि संपर्क अभियान के तहत करीब 18 लाख परिवारों से संपर्क किया गया है. पशुपालकों को संतुलित आहार और बेहतर पोषण की जानकारी देने के लिए ‘गोरस ऐप’ का इस्तेमाल किया जा रहा है.

इसके अलावा पशुओं के लिए साइलेज के उत्पादन और उपयोग को भी बढ़ावा दिया जा रहा है. राष्ट्रीय पशुधन मिशन के तहत साइलेज उत्पादन से जुड़े नए प्रोजेक्ट स्थापित किए जा रहे हैं.

Advertisement

सेक्स सॉर्टेड सीमेन से नस्ल सुधार पर फोकस

पशुओं की नस्ल सुधारने के लिए सेक्स सॉर्टेड सीमेन तकनीक का इस्तेमाल भी बढ़ाया जा रहा है. इससे करीब 90 प्रतिशत बछिया पैदा होने की संभावना बताई गई है.

वर्तमान में प्रदेश में किए जा रहे कुल कृत्रिम गर्भाधान में करीब 20 प्रतिशत सेक्स सॉर्टेड सीमेन का इस्तेमाल हो रहा है. भोपाल स्थित केंद्रीय वीर्य केंद्र में गिर, साहिवाल, थारपारकर और मुर्रा जैसी उन्नत नस्लों के वीर्य का उत्पादन किया जा रहा है.

फिलहाल यहां करीब 5 लाख डोज प्रतिवर्ष उत्पादन हो रहा है और आने वाले वर्षों में इसकी क्षमता बढ़ाने का लक्ष्य रखा गया है.

50 प्रतिशत कृत्रिम गर्भाधान कवरेज का लक्ष्य

हिरण्यगर्भा अभियान के तहत मौजूदा वित्त वर्ष में 47.50 लाख कृत्रिम गर्भाधान का लक्ष्य तय किया गया है. पिछले वर्ष करीब 28 लाख कृत्रिम गर्भाधान हुए थे.

अप्रैल से अगस्त 2026 के बीच ही 10.5 लाख से ज्यादा कृत्रिम गर्भाधान किए जा चुके हैं. अगले पांच वर्षों में कृत्रिम गर्भाधान की कवरेज को 50 प्रतिशत तक पहुंचाने का लक्ष्य है.

कुल मिलाकर सरकार का फोकस केवल दूध उत्पादन बढ़ाने तक सीमित नहीं है, बल्कि उन्नत नस्ल, बेहतर पशु पोषण, वैज्ञानिक पशुपालन, सहकारी समितियों के विस्तार और आधुनिक प्रजनन तकनीक के जरिए पूरे डेयरी सेक्टर को मजबूत करने पर है.

---- समाप्त ----

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement
Latest News in Hindi »