केंद्रीय कैबिनेट ने गुरुवार को ₹23,731 करोड़ की गोबरधन स्कीम (GOBARdhan Scheme) को मंजूरी दे दी, जिसका पूरा नाम 'गैल्वनाइजिंग ऑर्गेनिक बायो-एग्रो रिसोर्सेज धन' है. इस योजना का मकसद देश में कम्प्रेस्ड बायोगैस (CBG) का उत्पादन बढ़ाना और आयातित फॉसिल फ्यूल पर निर्भरता कम करना है. सरकार इसे स्वच्छ ऊर्जा की दिशा में एक अहम कदम मान रही है.
यह स्कीम वित्त वर्ष 2027 से 2036 तक लागू की जाएगी. इसके तहत घरेलू कम्प्रेस्ड बायोगैस उत्पादन को मौजूदा स्तर से करीब 10 गुना बढ़ाने का लक्ष्य रखा गया है. भारत में नेचुरल गैस की खपत लगातार बढ़ रही है और सरकार आयातित लिक्विफाइड नेचुरल गैस (LNG) पर निर्भरता कम करने की दिशा में काम कर रही है.
कृषि अवशेष, कचरे और गोबर से बनेगी गैस
गोबरधन स्कीम के तहत कृषि अवशेष, पशुओं का गोबर, प्रेस मड, नगर निकायों से निकलने वाला ऑर्गेनिक कचरा और अन्य बायोमास का इस्तेमाल कम्प्रेस्ड बायोगैस बनाने में किया जाएगा. इस कम्प्रेस्ड बायोगैस को वाहनों में इस्तेमाल होने वाली CNG के साथ ब्लेंड किया जा सकता है. सरकार के मुताबिक, सस्टेनेबल अल्टरनेटिव टूवर्ड्स अर्फोडेबल ट्रांसपोर्टेशन (SATAT) इनिशिएटिव के तहत देश में 200 से ज्यादा कम्प्रेस्ड बायोगैस प्लांट पहले ही चालू हो चुके हैं.
CNG और पाइप्ड गैस में होगी इसकी ब्लेंडिंग
नई व्यवस्था के तहत सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन कंपनियों के लिए कम्प्रेस्ड बायोगैस की अनिवार्य ब्लेंडिंग लागू की जाएगी. इसके तहत वित्त वर्ष 2027 में 3 फीसदी, 2028 में 4 फीसदी और 2029 से 5 फीसदी ब्लेंडिंग का लक्ष्य रखा गया है. यह व्यवस्था ट्रांसपोर्ट सेक्टर में इस्तेमाल होने वाली CNG के साथ-साथ घरों तक पाइप के जरिए पहुंचने वाली पाइप्ड नेचुरल गैस (PNG) पर भी लागू होगी.
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₹2,110 प्रति MMBTU तय कीमत
सरकार ने कम्प्रेस्ड बायोगैस के लिए ₹2,110 प्रति MMBTU (गर्मी और ऊर्जा की मात्रा मापने की एक मानक इकाई) की कीमत तय की है. इसका उद्देश्य कम्प्रेस्ड बायोगैस उत्पादकों को लंबे समय की आय का भरोसा देना और बाजार में निवेश को बढ़ावा देना है. सरकार के मुताबिक, इससे उपभोक्ताओं के लिए भी कीमतें किफायती बनाए रखने में मदद मिलेगी.
योजना के तहत योग्य ग्रीनफील्ड प्रोजेक्ट्स को स्थापित क्षमता के प्रति टन प्रतिदिन के लिए ₹2 करोड़ तक की पूंजी सहायता दी जाएगी. ब्राउनफील्ड प्रोजेक्ट्स के विस्तार, पाइपलाइन कनेक्टिविटी और ट्रंक पाइपलाइन से कनेक्शन के लिए भी सहायता का प्रावधान है. इसके अलावा, योग्य MSME को क्रेडिट गारंटी उपलब्ध कराई जाएगी. फीडस्टॉक एग्रीगेशन, नई तकनीक अपनाने और जिला स्तर की परियोजनाओं के लिए चैलेंज फंड भी बनाया जाएगा.
किसानों और ग्रामीणों के लिए अवसर
सरकार का मानना है कि गोबरधन स्कीम से किसानों, ग्रामीण उद्यमियों और इस क्षेत्र में निवेश करने वाली कंपनियों के लिए नए अवसर पैदा होंगे. कृषि और नगर निकायों से निकलने वाले कचरे का बेहतर इस्तेमाल होने से अतिरिक्त आमदनी के रास्ते खुल सकते हैं. सरकार के मुताबिक, योजना से निजी निवेश को बढ़ावा मिलेगा और ऑर्गेनिक खाद का उत्पादन भी बढ़ सकता है. इसके साथ ही कृषि और नगर कचरे के बेहतर प्रबंधन, जीवाश्म ईंधन के आयात में कमी और ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन घटाने में मदद मिलने की उम्मीद है.
आजतक बिजनेस डेस्क