देश में मॉनसून की शुरुआत के साथ किसानों के चेहरे पर खुशी आ जाती है लेकिन इस बार चिंता की लकीरें दिखाई दे रही हैं. कम बारिश के अनुमान के बीच मॉनसून की सुस्त ने किसानों की टेंशन बढ़ा दी है. बारिश में देरी की वजह से खरीफ सीजन की फसलों की बुवाई पर असर पड़ रहा है.
जून का आधा महीना बीत चुका है लेकिन आसमान से बादल नदारद हैं. मौसम की बेरुखी ने किसानों को मायूस कर दिया है. दरअसल, मौसम विभाग (IMD) ने इस साल औसत से कम बारिश का अनुमान जताया है, जिससे बुवाई के लिए तैयार किसानों के सामने दोहरी समस्या खड़ी हो गई है.
मॉनसून में देरी और कम बारिश को देखते हुए महाराष्ट्र के ठाणे जिला प्रशासन ने किसानों को खरीफ फसलों की बुवाई फिलहाल टालने की सलाह दी है. कृषि विभाग ने कहा है कि कम से कम 100 मिमी बारिश होने के बाद ही बुवाई की जाए ताकि पौधों की बेहतर वृद्धि हो सके. प्रशासन ने सूखे की स्थिति से निपटने के लिए आकस्मिक फसल योजना भी तैयार की है.
क्या करें किसान?
जिला प्रशासन ने पहले ही कई तकनीकी प्रशिक्षण कार्यक्रम और El Nino जागरूकता अभियान चलाए हैं. किसानों को सब्सिडी वाली अच्छी क्वालिटी के बीज भी उपलब्ध कराए गए हैं, ताकि खरीफ मौसम में उत्पादन पर कम असर पड़े.
महाराष्ट्र में हालत चिंताजनक
महाराष्ट्र में जून के पहले पखवाड़े में सिर्फ 26 प्रतिशत ही सामान्य बारिश हुई है. राज्य सरकार ने मंत्रिमंडल की बैठक में इस स्थिति की समीक्षा की. कैबिनेट ने चिंता जताते हुए कहा कि किसान फसल बुवाई में जल्दबाजी न करें. बैठक में जलाशयों में पानी का स्टॉक घटने और पानी का सावधानी से उपयोग करने की जरूरत पर भी जोर दिया गया.
कृषि विभाग के अधिकारी किसानों से अपील कर रहे हैं कि वे मौसम की खबरों पर नजर रखें और बिना पर्याप्त बारिश के बुवाई न करें. इससे फसल खराब होने का खतरा कम हो जाएगा और किसानों को नुकसान से बचाया जा सकेगा.
आजतक एग्रीकल्चर डेस्क