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Pran Vayu Devta Scheme: पेड़ों को भी मिलेगी पेंशन, पर्यावरण बचाने के लिए इस राज्य की अनोखी पहल

Haryana Pran Vayu Devta Pension Scheme: हरियाणा सरकार ने प्राण वायु देवता नाम से एक अनोखे स्कीम की शुरुआत की है. इसके तहत खट्टर सरकार ने 75 साल से ऊपर की उम्र वाले पेड़ों को पेंशन देने की योजना बनाई है.

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स्टोरी हाइलाइट्स
  • पेड़ों की देखभाल करने वालों को सालाना 2500 रुपये पेंशन
  • पेड़ों की कटाई को रोकने के लक्ष्य से हरियाणा सरकार का फैसला

Haryana Government Pran Vayu Devta Pension Scheme 2021: भारत सरकार की तरफ से लगातार छोटे किसानों और भूमिहीन मजदूरों की आमदनी बढ़ाने के लिए विभिन्न योजनाओं पर काम किया जा रहा है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी अपने कई भाषणों में इन योजनाओं का जिक्र कर चुके हैं. अब ऐसी ही एक योजना हरियाणा सरकार (Haryana Govt) भी लेकर आई है, जो भूमिहीन किसानों के लिए आने वाले समय में उपयोगी साबित हो सकती है.

पेड़ों की देखभाल के लिए मिलेगी पेंशन

हरियाणा सरकार ने प्राण वायु देवता (Pran Vayu Devta) नाम से एक अनोखी पेंशन स्कीम (Pension Scheme) की शुरुआत की है. इसके तहत खट्टर सरकार ने 75 साल से ऊपर की उम्र वाले पेड़ों को पेंशन देने की योजना बनाई है. इन पेड़ों की देखभाल करने वालों को सालाना 2500 रुपये पेंशन देने का फैसला किया गया है. 

क्या है प्राण वायु देवता स्कीम का उद्देश्य?

इस स्कीम से पुराने किसानों और भूमिहीन मजदूरों को लाभ तो होगा ही, साथ ही पेड़ों की कटाई पर रोक लगेगी. इसके अलावा पर्यावरण भी सुरक्षित रहेगा और हवा की गुणवत्ता में भी सुधार होगा. पेड़ों की पेंशन के लिए अंबाला वन संरक्षण विभाग के पास अभी तक 55 पेड़ों की लिस्ट आ चुकी है.

कैसे करें अप्लाई?

अंबाला जिला वन संरक्षण अधिकारी हैरतजीत कौर बताते हैं कि अगर किसी भी व्यक्ति के घर में 75 साल या उससे ऊपर की उम्र का पेड़ है और वे इसपर पेंशन लेने के इच्छुक हैं तो वे अपने जिले के वन विभाग के कार्यालय में जाकर आवेदन कर सकते हैं.

सरकार पौधारोपण पर भी दे रही है जोर

सरकार पर्यावरण में सुधार करने के लिए पौधारोपण के कार्यक्रमों पर भी जोर दे रही है. जल शक्ति अभियान के तहत प्रत्येक ग्राम पंचायतों को एक हजार पौधे भी निशुल्क दिए जा रहे हैं. लेकिन हर साल जो पौधे लगाए जाते हैं उन्हें विकसित होने में काफी समय लग जाता है. पुराने पेड़ों के स्वस्थ तनों पर अच्छे दाम मिलते हैं, अक्सर किसान कुछ पैसों के लिए उन्हें काटकर बेच देते हैं. ऐसे में इस तरह के पेड़ों की कटाई को रोकने के लिए और किसानों को प्रोत्साहित करने के लिए इस योजना की शुरुआत की गई है.


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