कृषि के क्षेत्र में नए-नए इनोवेशन हो रहे हैं. इसी कड़ी में खेती-किसानी से कृषि यंत्रों को भी जोड़ा गया. इससे बुवाई से लेकर कटाई तक किसानों का काम काफी हद तक आसान हो गया है. वहीं, लागत में काफी कमी आई है. बताते दें कि गेहूं की कटाई की शुरुआत हो गई है. ऐसे में खेती की मशीनों पर इस सीजन में बेहद काम आने वाली है. हम आपको उन मशीनों के बारे में बताने जा रहे हैं, जिनका उपयोग गेहूं की कटाई में किया जाता है.
रीपर बाइंडर मशीन
इस मशीन द्वारा ना सिर्फ गेहूं कटाई का काम किया जाता है, बल्कि उसके बंडल भी तैयार किए जाते हैं. मशीन से प्रति घंटा 0.40 हेक्टेयर में गेहूं की कटाई की जा सकती है.
वर्टिकल कन्वेयर रीपर मशीन
गेहूं की कटाई के लिए वर्टिकल कन्वेयर रीपर मशीन का भी उपयोग किया जाता है. वर्टिकल कन्वेयर रीपर मशीन एक घंटे में 0.21 एकड़ फसल कटाई की क्षमता रखती है.
ट्रैक्टर से चलने वाली रीपर मशीन
ट्रैक्टर चलित रीपर मशीन गेहूं की कटाई के बाद उसे एक कतार में बिछा देती है. इस मशीन की कटाई क्षमता 0.40 एकड़ प्रति घंटा है. ट्रैक्टर के द्वारा संचालित होने से काम करना आसान हो जाता है.
स्वचालित रीपर बाइंडर मशीन
यह मशीन ऑटोमेटिक संचालित होती है. स्वचालित रीपर बाइंडर मशीन के द्वारा गेहूं की कटाई के साथ उनके बंठलों को बांधने का काम किया जाता है. इस मशीन की फसल कटाई क्षमता 0.35 एकड़ प्रति घंटा है.
कंबाइन हार्वेस्टर मशीन
हार्वेस्टर पर लगे कटर फसल को बारिकी से काटते हैं, जिससे फसल कटाई के दौरान बर्बादी कम होती है. इसके साथ ही इस मशीन में लगे छलनी द्वारा अनाज को साफ करने का काम किया जाता है, जिससे अनाज से कंकड़ को अलग किया जाता है.
यहां से किराये पर लें खेती की मशीनें
केंद्र सरकार 'फार्म मशीनरी ऐप' के जरिए भी कृषि यंत्रों पर 50 फीसदी तक की सब्सिडी मुहैया करवाती है. इसके अलावा आप इन मशीनों को इस ऐप के माध्यम से किराए पर भी घर ला सकते हैं. वहीं, कस्टम हायरिंग सेंटर पर विजिट कर किसान किराये पर खेती की मशीनें घर ला सकते हैं. इसके अलावा राज्य सरकारें भी किराये और सब्सिडी पर किसानों को कृषि यंत्र मुहैया कराती है.