सफेद मूली का स्वाद को आपने चखा ही होगा, लेकिन कम ही लोगों ने लाल मूली खाई होगी. सामान्य मूली के मुकाबले इस मूली में एंटीऑक्सीडेंट्स ज्यादा पाए जाते हैं. इसकी खेती पूरे भारत में कहीं भी की जा सकती है. हालांकि, सफेद मूली के मुकाबले इसकी कीमत कई गुना ज्यादा होती है. आइए जानते हैं कैसी होती है लाल मूली की खेती.
ठंड का महीना खेती के लिए उपयुक्त
किसान इसकी बुवाई ठंड के महीने में कर सकते हैं. दिसंबर से लेकर फरवरी तक का महीना इसकी खेती के लिए काफी उपयुक्त माना जाता है. इसके लिए उचित जल निकासी वाली दोमट मिट्टी सर्वोत्तम मानी जाती है. इसके अलावा इसकी खेती बलुई मिट्टी में भी की जा सकती है. इसके लिए भूमि का पीएच मान 5 से 7.5 के बीच होना चाहिए. इसकी जड़ें (कंद) गहरे लाल रंग की होती हैं. इसके पत्ते गहरे हरे रंग के होते हैं.
ऐसे करें लाल मूली की खेती
किसान इसकी सीधी बिजाई या नर्सरी तैयार करके भी खेती करते हैं. इसकी व्यवसायिक खेती के लिए नर्सरी में उन्नत किस्म के बीजों से पौधे तैयार किये जाते हैं. इसके पौधों की रोपाई के लिये कतार विधि का इस्तेमाल किया जाता है. बुवाई के बाद तकरीबन 20 से 40 दिनों का समय लगता है. इसकी खेती से प्रति एकड़ 54 क्विंटल प्रति एकड़ तक की उपज हासिल कर सकते हैं.
कम लागत में ज्यादा मुनाफा
किसान सही तरीके से इसकी फसल लगाएं तो कम वक्त में ही भारी मुनाफा हासिल किया जा सकता है. कम किसानों द्वारा इसकी खेती किए जाने से लाल मूली अभी भी बाजार में कम ही मिलती है. अगर किसान इसकी खेती करते हैं तो उन्हें सामान्य मूली की तुलना में ज्यादा प्रॉफिट मिल सकता है.
सामान्य तौर पर सफेद मूली बाजार में अधिकतम 50 रुपये किलो तक मिलती है. वहीं, लाल मूली के एक किलो की कीमत 500 से 800 रुपये किलो पहुंचती है. ऐसे में किसान कम लागत लगाकर इस फसल से ज्यादा मुनाफा हासिल कर सकते हैं.