खेती-किसानी में नई-नई तकनीकों के माध्यम से सब्जियों की खेती कर किसान बढ़िया मुनाफा कमाने लगे हैं. भीलवाड़ा के रहने वाले किसान रामेश्वर सुथार इसके ताजा उदाहरण हैं. किसान रामेश्वर ने हायर सेकेंडरी परीक्षा पास करने के बाद पढ़ाई छोड़ दी. कई साल तक इलेक्ट्रिक मोटर रीवाइडिंग का काम किया. इस दौरान वह एक प्रगतिशील किसान के संपर्क में आएं. आज वह सब्जियों की खेती से सालाना 10 से 12 लाख रुपये का मुनाफा कमा रहे हैं.
कैसे आया खेती-किसानी का विचार
किसान रामेश्वर बताते हैं कि मोटर रिवाइंडिंग करते-करते उनका संपर्क महाराष्ट्र राज्य के सतारा जिले के प्रोग्रेसिव फार्मर उमेश गाडे से हुआ. उमेश गाडे को उन्होंने 5 साल के लिए अपने गांव के पास 65 बीघा जमीन लीज पर दिलवाई. इस जमीन पर उमेश ने स्ट्रॉबेरी की फसल लगातक 2 साल में लाखों का मुनाफा हासिल किया. यहीं से रामेश्वर के दिमाग में खुद खेती-किसानी करने का विचार आया.
6 बीघे में करते सब्जियों की खेती
प्रगतिशील किसान रामेश्वर सुथार के मुताबिक 10-12 बीघा जमीन में से कुल 6 बीघा जमीन पर सब्जियों की तीन फसलों की खेती शुरू की. इस दौरान उनके खेतों में शिमला मिर्च, टमाटर ,पीले रंग की मिर्च और पिकाडोर मिर्च की फसल लगी हुई है. इससे रोजाना उन्हें अच्छा मुनाफा हो रहा है. वह साल में तीन फसलों की बुवाई करते हैं. गोभी की फसल लगाते हैं, यह तकरीबन 90 दिनों में तैयार हो जाती है. वहीं, टमाटर की फसल 7 महीने तक अच्छा मुनाफा देती है. इसके अलावा शिमला मिर्च और पीली मिर्च से भी बढ़िया मुनाफा कमा लेते हैं.
खुद बनाई टमाटर ग्रेडिंग की मशीन
किसान रामेश्वर सुथार ने खुद एक टमाटर ग्रेडिंग मशीन भी तैयार की है. यह मशीन टमाटर के साइज के अनुसार अलग-अलग होकर ऑटोमेटिक कैरेट में पेक हो जाते हैं. इस पैक टमाटर को वह अन्य जगहों और मंडियों में निर्यात करते हैं. इस मशीन को वह मध्य प्रदेश और पुणे में भी बेच चुके हैं. फिलहाल वह स्प्रे मशीन बनाने में लगे हुए हैं.
कम समय में अधिक पैदावार वाली सब्जियों पर फोकस
किसान रामेश्वर सुथार कहते हैं खेती में यदि कुदरत साथ दें मौसम की प्रतिकूल मार ना हो और जानकारी पूरी हो तो नौकरी से डबल कमाई खेती में हो जाएगी. वह ड्रिप इरिगेशन तकनीक से फसलों की सिंचाई करते हैं. सब्जियों की खेती के साथ-साथ गेहूं, सोयाबीन और जौ का भी उत्पादन कर रहे हैं. उनका फोकस कम समय में अधिक पैदावार देने वाली सब्जियों पर है. नींबू के पेड़ लगाकर उससे भी बढ़िया कमाई कर रहे हैं. इसके अलावा पशुपालन में भी हाथ आजमा रहे हैं.
(भीलवाड़ा से प्रमोद तिवारी की रिपोर्ट)