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Farming Tips: मचान विधि से सब्जियों की खेती कर किसान कमाएं बंपर मुनाफा, ये है तरीका

मचान में लौकी, खीरा, करेला जैसी बेल वाली फसलों की खेती की जा सकती है. इसमें खेत में बांस या तार का जाल बनाकर सब्जियों की बेल को जमीन से ऊपर पहुंचाया जाता है. इस विधि का उपयोग करने से किसान अपनी फसल 90-95 प्रतिशत तक बचा सकते हैं. बारिश के मौसम में सब्जी की खेती करने वाले किसानों के लिए खेती की ये तकनीक वरदान साबित हो सकती है.

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(फोटो क्रेडिट- देहात) (फोटो क्रेडिट- देहात)
स्टोरी हाइलाइट्स
  • 90-95 फीसदी फसल बचा सकते हैं
  • उपज में भी होता है बढ़िया इजाफा

Vegetable Farming Tips: खेती-किसानी में नई-नई तकनीकें आने के बाद किसानों का मुनाफा पहले के मुकाबले बढ़ गया है. सब्जियों की खेती में भी इन तकनीकों का उपयोग किसानों के लिए काफी फायदेमंद साबित हो रहा है. हाल के कुछ वर्षों में देखा गया है कि किसान मचान विधि तकनीक से बेल किस्मों की सब्जियों की खेती कर बढ़िया मुनाफा कमा रहे हैं.

फसल खराब होने का खतरा कम

मचान में लौकी, खीरा, करेला जैसी बेल वाली फसलों की खेती की जा सकती है. इसमें खेत में बांस या तार का जाल बनाकर सब्जियों की बेल को जमीन से ऊपर पहुंचाया जाता है. इस विधि का उपयोग करने से किसान अपनी फसल 90-95 प्रतिशत तक बचा सकते हैं. बारिश के मौसम में सब्जी की खेती करने वाले किसानों के लिए खेती की ये तकनीक वरदान साबित हो सकती है. बता दें कि मचान पर पानी जमा नहीं होता है, जिसकी वजह से किसान की फसलों के सड़ने का खतरा कम हो जाता है. इसके अलावा फसल में यदि कोई रोग लगता है तो तो मचान के माध्यम से दवा छिड़कने में भी आसानी होती है.

ऐसे करें रोपाई

खेतों में रोपाई से पहले इसकी पौध तैयार की जाती है. एक बार पौध तैयार हो जाने के बाद इसकी रोपाई खेतों में कर दी जाती है. इसकी रोपाई के तुरंत बाद हल्की सिंचाई कर दें. समय-समय पर खेतों से खरपतवार साफ करते रहें. इसके अलावा किसान निड़ाई-गुड़ाई पर भी ध्यान देते रहे.

मचान बनाने की विधि इन सब्जियों में सहारा देना होता है. सहारा देने के लिए लोहे की एंगल या बांस के खम्भे से मचान बनाते है. खम्भों के ऊपरी सिरे पर तार बांध कर पौधों को मचान पर चढ़ाया जाता है.

कम वक्त में मिल जाता है बढ़िया मुनाफा 

ये सब्जियां एक से डेढ़ महीने में उपज देनी शुरू कर देती है. इस दौरान किसान सब्जियों की तुड़ाई कर लें. फिर इसे बाजार में बेचना शुरू कर दे. मचान विधि तकनीक का उपयोग करने से फसलें बर्बाद नहीं होती हैं. इसका फायदा किसानों को बढ़े हुए उपज में देखने को मिलता है. निश्चित ही उपज बढ़ने के साथ किसानों का मुनाफा भी बढ़ेगा.

 

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