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Strawberry Farming: स्ट्रॉबेरी की खेती कर कमा रहीं लाखों रुपये, ग्रामीण महिलाओं के लिए बनीं प्रेरणा स्त्रोत

Strawberry Farming Profit: खाद-पानी का ध्यान रखते हुए स्ट्रॉबेरी का उत्पादन हुआ. लगातार इस उत्पादन की बिक्री 800 रुपए प्रति किलो स्ट्रॉबेरी की बिक्री हुई. इस तरह से मंत्रवती ने स्ट्रॉबेरी की खेती से क्षेत्र में नाम कमाया और महिलाएं अब मंत्रवती से प्रेरणा ले रही हैं.

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Strawberry Farming Strawberry Farming
स्टोरी हाइलाइट्स
  • नगला भिखन गांव में कर रही हैं खेती
  • परिवार का हो रहा है जीवन यापन

Strawberry Cultivation: यूपी के इटावा जनपद के जसवंतनगर तहसील के पास नगला भिखन गांव की रहने वाली मंत्रवती (उम्र 42 साल) ने मात्र आठवीं तक की पढ़ाई कर रखी है, लेकिन मन में जज्बा और कुछ कर गुजरने की तमन्ना ने घर के काम से बाहर निकल कर कुछ बड़ा करने की ठानी तो स्वयं सहायता समूह से जुड़ गईं. पति और बच्चों का सहयोग मिला तो स्वयं सहायता समूह का ग्राम संगठन बनाया उसकी अध्यक्ष हो गईं और महिलाओं को चक्की मसाला घरेलू कुटीर उद्योग से संबंधित ट्रेनिंग देने लगीं, लेकिन कृषि में भी रुचि होने के कारण वह किसानों की मीटिंग में भी हिस्सा लेती रहीं. 

मंत्रवती को स्ट्रॉबेरी खेती की जानकारी मिली कृषि विभाग की ओर से. साथ ही उन्हें 480 पौधे भी मिल गए. उन्होंने अक्टूबर के महीने में अपने आधा बीघा खेत में क्यारी बनाकर 480 पौधे की रोपाई कर दी. इन पौधों को नियम के अनुसार तैयार किया गया. पौधों के साइडों में पॉलिथीन लगाई गई और स्ट्रॉबेरी पैदा होने लगी. 

खाद-पानी का ध्यान रखते हुए स्ट्रॉबेरी का उत्पादन हुआ. लगातार इस उत्पादन की बिक्री 800 रुपए प्रति किलो स्ट्रॉबेरी की बिक्री हुई. इस तरह से मंत्रवती ने स्ट्रॉबेरी की खेती से क्षेत्र में नाम कमाया और महिलाएं अब मंत्रवती से प्रेरणा ले रही हैं.

मंत्रवती का कहना है कि उनके पति कायम सिंह किसान हैं. पति और बच्चों का पूरा सहयोग मिलता है, जिस कारण से हम यह सब कर पाए हैं स्ट्रॉबेरी के लिए वातावरण अनुकूल नहीं है, लेकिन कृषि पद्धति को ध्यान में रखते हुए पानी और खाद को समय पर डालते रहे और सुरक्षा भी करते रहे. 

स्ट्रॉबेरी की खेती कर कमा रहीं लाखों रुपये
स्ट्रॉबेरी की खेती कर कमा रहीं लाखों रुपये

तापमान सही रखने के लिए पौधों को ढका भी और उसके बाद 6 महीने तक लगातार अब भी स्ट्रॉबेरी की पैदावार हो रही है. जो महिलाएं घर में घर का कार्य करती हैं. घर के बाहर नहीं निकलती हैं तो उनको समूह से जोड़कर मसाला बनाना चक्की चलाना स्वरोजगार के लिए प्रेरणा देती है और कृषि में भी अब छोटी जगह पर उत्पादन करके अपना आत्म सम्मान बढ़ा सकती हैं.

डिस्ट्रिक रिसोर्स पर्सन के पद पर कार्य कर रही निहारिका शुक्ला जो कि स्वयं सहायता समूह की महिलाओं को समय-समय पर छोटे-छोटे कार्य करने की प्रेरणा देना और लोगों को जोड़ने के लिए मंत्रवती को प्रेरित किया था. आज मंत्रबती अपने पैरों पर खड़ी होकर अपना सम्मान बढ़ा रही हैं और महिलाओं को भी प्रेरित कर रही हैं. 

(रिपोर्ट- अमित तिवारी, इटावा)

 

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