सितंबर के महीने में अप्रैल जैसी धूप पड़ रही है. इसका असर धान की फसल पर भी नजर आ रहा है. मध्य प्रदेश के रायसेन में पिछले एक महीने से बारिश न होने के कारण सूख रही धान की फसल पर कई किसान ट्रैक्टर चलाने को मजबूर हो रहे हैं. बारिश और पानी के अभाव में किसान खुद अपने खेत मे खड़ी धान की फसल को नष्ट कर रहे हैं.
मध्य प्रदेश का सबसे बड़ा धान उत्पादक जिला है रायसेन
रायसेन मध्य प्रदेश का सबसे बड़ा धान उत्पादक जिला है. यहां इस साल करीब 2 लाख 85 हजार हेक्टेयर इलाके में धान की फसल लगाई गई है. मौसम के चलते इस साल धान के उत्पादन में गिरावट आ सकती है. इसका असर लोगों की जेबों पर पड़ सकता है. पैदावार कम होने से मंहगाई बढ़ेगी.
सूखे के चलते फसल हो रही खराब
रायसेन जिले के मोहनियाखेड़ी गांव के किसान अपने धान के खेतों में पड़ रही दरारों से चिंतित हैं. इस गांव के किसान चंद्रेश शर्मा ने अपने 25 एकड़ खेत में ₹7 लाख की लागत लगाकर धान की फसल लगाई थी. बीते एक महीने से बारिश नहीं होने के चलते खेतों में दरारें पड़ गई हैं. नीचे से फसल पीली पड़ने लगी है. किसानों को 10 घंटे बिजली देने का दावा करने वाली सरकार सिर्फ 4 से 6 घंटे बिजली दे पा रही है. इससे फसलों की सही से सिंचाई नहीं हो पा रही है. ऐसे में किसानों के सामने खड़ी फसल पर ट्रैक्टर चलाने के अलावा कोई दूसरा चारा नहीं बच रहा है.
मजबूरी में फसल पर ट्रैक्टर चला रहे हैं किसान
कर्ज लेकर लागत के बाद सीने पर पत्थर रखकर किसान धान की फसल पर खेतों में ट्रैक्टर चलवा रहे हैं. ऐसी स्थिति जिले के सांची और गैरतगंज, बेगमगंज तहसील के गांवों में ज्यादा देखने को मिल रही है. इन इलाकों में सिंचाई की कोई बड़ी परियोजना भी मौजूद नहीं है इससे किसानों को भारी नुकसान हो रहा है.