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बुढ़ापे का असर कम करता है ये विदेशी फल, एक बार की लागत में किसान पा रहे लाखों का मुनाफा

Dragon Fruit cultivation: ये फल स्वाद में मीठा और ताजगी भरा होता है. आम तौर पर ये फल वियतनाम, श्रीलंका, चीन में बेहद लोकप्रिय है. भारतीय बाजारों में इसकी कीमत 300-400 रुपये प्रति किलो होने से भारत में इसका प्रचलन बढ़ रहा है.

Dragon Fruit Cultivation Benifits: ड्रैगन फ्रूट की खेती Dragon Fruit Cultivation Benifits: ड्रैगन फ्रूट की खेती
स्टोरी हाइलाइट्स
  • बाराबंकी की धरती किसानों के लिए लाभदायक बनी
  • अब विदेशी फल ड्रैगन फ्रूट की हो रही है खेती

Dragon Fruit Cultivation Benefits: यूपी के बाराबंकी में ड्रैगन फ्रूट की खेती बड़े पैमाने पर हो रही है. इस फल की खेती करने वाले किसान गया प्रसाद मौर्य और उनके भाई लाखों रुपये एक सीजन में कमा लेते हैं. यही नहीं ये फ्रूट स्वास्थ्य के नजरिये से बहुत लाभकारी है. इसे पोषण का पावर हाउस भी कहा जाता है. इसके बहुत फायदे हैं. इसका सेवन करने से बुढ़ापा का असर कम होता है. क्योंकि ये डाइबिटीज, कोलेस्ट्रॉल, ह्रदय के रोगियों के लिए रामबाण दवा है.

ये फल स्वाद में मीठा और ताजगी भरा होता है. आम तौर पर ये फल वियतनाम, श्रीलंका, चीन में बेहद लोकप्रिय है. भारतीय बाजारों में इसकी कीमत 300-400 रुपये प्रति किलो होने से भारत में इसका प्रचलन बढ़ रहा है. उत्तर प्रदेश के बाराबंकी में ड्रैगन फ्रूट की खेती करने वाले गया प्रसाद पहले किसान हैं. लेकिन इनकी खेती देखकर आज कई और किसान भी ड्रैगन फ्रूट की खेती करने लगे हैं और लाखों रुपये लाभ कमा रहे हैं.

यूपी की राजधानी लखनऊ से नजदीक बाराबंकी से 18 किलोमीटर दूर देवा शरीफ के पास एक बिशुनपुर गांव है. यहां के प्रगतिशील किसान गया प्रसाद मौर्य ने एक एकड़ खेत में ड्रैगन फ्रूट (Dragon Fruit) की खेती की शुरुआत की थी. ये विदेशी फल है. बाराबंकी में इसकी खेती मुश्किल थी. लेकिन गया प्रसाद के हौसले के आगे मेहनत रंग लाई और आज ड्रैगन फ्रूट की खेती आसानी से हो रही है.

एक बार की लागत में 25 साल तक मिल सकता है लाखों का मुनाफा

ड्रैगन फ्रूट के पौधे जमीन में सीमेंट के खम्बों के सहारे खेत में लगाए जाते हैं. इस पौधे को सिंचाई की भी ज्यादा आवश्यकता नहीं पड़ती है. ड्रीप के जरिये इसकी सिंचाई होती है. ऐसे में इसकी खेतीर किसी भी मौसम में नुकसानदायक नहीं है.  सिर्फ जाड़े में फंगस लगने का डर रहता है. वह भी जैविक खाद के छिड़काव के बाद फंगस खत्म हो जाते हैं.

गया प्रसाद ने बताया कि शुरुआत में एक एकड़ खेत में इसके पौधे लगाने में 4 से 5 लाख रुपये खर्च आता है. एक बार कड़ी मेहनत के बाद जब इसका पौधा तैयार हो जाता है. तो इसमें अगले साल से ही फल आने लगते हैं. इसके पौधे जून से लेकर दिसंबर तक फल देते हैं. बारिश के सीजन में फल ज्यादा आते हैं. किसान गया प्रसाद ने बताया कि एक एकड़ में एक हजार पौधे गुजरात से मंगवाकर लगवाया है.

ड्रैगन फ्रूट के एक पौधे से 8 से 10 फल प्राप्त होते हैं. 200 से 500 ग्राम वजनी इन फलों की सीजन में 300 से 400 रुपये प्रति किलो की कीमत मिल जाती है. ये आसानी से खेत से ही बिक जाता है. इसको आगे व्यापारी 100 रुपये का एक बेचते हैं. पहले साल लागत लगी बाकी सालों में देखरेख का खर्च आया है, बाकी मुनाफा ही मुनाफा है. ये फल स्वास्थ्य के लिए बहुत लाभदायक है. शुगर, ह्रदयरोग, कोलोस्ट्रोल के लिए बहुत फायदेमंद है और इसका सेवन करने से प्लेटलेट्स भी बढ़ता है.
 

ड्रैगन फ्रूट की खेती करने वाले किसान गया प्रसाद मौर्य

ड्रैगन फ्रूट फल के साथ दवा भी है. एंटीऑक्सीडेंट, बसा रहित, फाइबर से भरपूर ड्रैगन फ्रूट में कैल्शियम, मैग्नेशियम और आयरन के अलावा प्रचुर मात्रा में विटामिन सी एवं ए भी पाया जाता है. अपनी इन्ही खूबियों के कारण इसे सुपर फ्रूट भी कहा जाता है. मर्जी आपकी आप इसे सीधा खाइए या सलाद, जैम, जेली या जूस के रूप में. हर रूप में ये आपकी सेहत को सलामत रखेगा. इसमें मौजूद एंटीऑक्सीडेंट और विटामिन सी आपकी रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाएगा. शुगर के नियंत्रण और रोकथाम में भी इसे प्रभावी पाया गया है. बाकी विटामिन्स और खनिजों के भी अपने लाभ हैं.

बाराबंकी में इसकी खेती से मालामाल हो रहे किसान

बाराबंकी उद्यान विभाग के अधिकारी गणेश मिश्रा ने बताया कि ड्रैगन फ्रूट को भारत सरकार ने कमलम फ्रूट नाम दिया है. इसकी जिले में खेती की शुरुआत हाल के दिनों में ही हुई है. इस उन्नत खेती को किसान गया प्रसाद के द्वारा किया जाता है. इनकी खेती को देखकर जिले के कई किसान ड्रैगन फ्रूट खेती अब करने लगे हैं. गया प्रसाद और इनके तीनों भाइयों ने ड्रैगन फ्रूट की खेती कर किसानों को नई राह दिखाई है.

 

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