थर्मल पॉवर के कारण होने वाले प्रदूषण और हाइड्रिल पॉवर के लिए बड़े बांधों के निर्माण के चलते पर्यावरण में पैदा हो रहे असंतुलन को देखते हुए पूरी दुनिया में नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों की तलाश तेजी से की जा रही है.
ऐसे में यह जानकर आश्चर्य होगा कि अब वेस्ट टॉयलेट पेपर के इस्तेमाल से बिजली पैदा की जा सकेगी. साइंटिस्ट्स का कहना है कि आवासीय इमारतों में लगाए जाने वाले सौर ऊर्जा पैनलों की कीमत के बराबर ही खर्च पर टू स्टेप प्रॉसेस के जरिए यह मुमकिन है.
अगर इस प्रक्रिया को अपनाया जाता है तो इससे नगर निगम के डंपिंग यार्ड के ओवरफ्लो हो जाने की समस्या और जीवाश्म ईंधनों पर निर्भरता की समस्या को सुलझाया जा सकता है.
वेस्ट टॉयलेट पेपर को अक्सर किसी काम का नहीं समझा जाता. हालांकि यह कार्बन का एक बेहतर स्रोत है और सूखा रहने पर इसमें 70 से 80 फीसदी सेलूलोस मौजूद होता है.
पश्चिमी यूरोप में हर साल औसतन 10 से 14 किलो टॉयलेट पेपर प्रति व्यक्ति की दर से कचरे के तौर पर निकालता है. नालों में जमा होने वाली इस रद्दी की मात्रा भले ही मामूली हो लेकिन यह नगर निगम के कचरे का महत्वपूर्ण हिस्सा होता है.
यूनिवर्सिटी ऑफ एम्सटर्डम के शोधकर्ताओं के मुताबिक बिजली पैदा करने के लिए यूज्ड टॉयलेट पेपर का इस्तेमाल वेस्ट की रिसाइकिल प्रॉसेस का सर्वश्रेष्ठ तरीका है.