भारत के नए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बारे में पाकिस्तान की जनता के विचारों में बदलाव आने लगा है. नवाज शरीफ को शपथ ग्रहण में न्यौता देने और उनसे गर्मजोशी से मिलने के बाद वहां की जनता अब उनके प्रति उतनी कठोर नहीं दिख रही है. पाकिस्तान के अखबार डेली टाइम्स ने यह जानकारी दी है.
अखबार के मुताबिक पाकिस्तानी प्रधानमंत्री नवाज शरीफ की भारत यात्रा और उनके दौरे के लगातार टीवी पर कवरेज से लोगों के सोचने के तरीके में बदलाव आया है. उसने लिखा है कि पाकिस्तान के टीवी चैनलों ने इस दौरे की लगातार लाइव रिपोर्टिंग करके एक तरह के मीडिया हाइप क्रिएट किया. मंगलवार को पाकिस्तानी पीएम और भारतीय पीएम की मुलाकात पर नेशनल असेंबली में विपक्ष के नेता और पीपीपी के सैयद खुर्शीद शाह ने कहा कि पाकिस्तान के लोग इस मुलाकात के बारे में नकारात्मक बातें न कहें तो अच्छा है.
उन्होंने कहा कि हमें बड़े हित में परिपक्वता से सोचना चाहिए. यह एक बढ़िया अवसर था कि दोनों देशों के नेताओं ने अपने विचार व्यक्त किए. हमें प्रधान मंत्री के दौरे पर सियासत नहीं करनी चाहिए. अखबार ने लिखा है कि कुछ पर्यवेक्षकों और रक्षा विशेषज्ञों ने नवाज शरीफ के दौरे पर मिली जुली प्रतिक्रिया दी है. लेकिन दो दिनों के लाइव कवरेज के कारण आम पाकिस्तानी के मन से मोदी के बारे में कट्टर छवि धुंधली हो गई है.
आम पाकिस्तानी गुजरात 2002 के दंगों के लिए मोदी को जिम्मेदार मानता है और इसलिए जब नवाज शरीफ को मोदी का निमंत्रण मिला तो जनता उनके वहां जाने के खिलाफ थी. लेकिन शरीफ का दिल्ली में जिस तरह से स्वागत हुआ और उन्हें जैसी कवरेज मिली, उससे आम पाकिस्तानी के ख्यालों में बदलाव आय़ा है.
अखबार को इस्लामाबाद में टैक्सी चलाने वाले एक ग्रेजुएट युवक जाहिद अली ने बताया कि मैं हमेशा से मोदी को मुसलमानों का दुश्मन मानता हूं लेकिन जिस तरह के वह कपड़े पहनते हैं और जिस तरह से वह अपने मेहमानों से मिले, उससे मेरा उनके बारे में ख्याल बदल गया है. इस्लामाबाद में बेकरी चलाने वाले मेराज हुसैन ने कहा कि मैं अपने दादा जी से बॉम्बे की कहानियां सुनता हुआ बड़ा हुआ. वे बंटवारे के पहले सरकारी मुलाजिम थे. मुझे मोदी जी से उम्मीद बंधी है कि वह समय आएगा जब दोनों ही देशों के लोग आसानी से सीमा के पार जा सकेंगे.
कई विश्लेषकों का मानना है कि पिछली सरकारों के विपरीत बीजेपी और पीएमएल-एन अपनी-अपनी संसदों में बहुमत रखते हैं, वे इस दिशा में काफी कुछ कर सकते हैं. विश्लेषक कामरान शफी ने कहा कि भारत और पाकिस्तान के बीच सबसे खराब संबंध कांग्रेस पार्टी के कार्यकाल में रहे और जब भी गैर कांग्रेसी सरकार सत्ता में आए तो संबंध सुधरे हैं. उन्होंने कहा कि अब दोनों देशों के बीच संबंधों को सुधरने से कोई नहीं रोक सकता है.
हालांकि ऐसा नहीं है कि सभी विशेषज्ञ ऐसा ही मान रहे हैं, कुछ बहुत आशान्वित नहीं हैं लेकिन माहौल में बदलाव साफ देखा जा सकता है