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आयुर्वेदिक, होमियोपैथिक दवाओं के खिलाफ अमेरिका में अभियान

अमेरिका के खाद्य एवं औषधि प्रशासन ने शुगर के इलाज का दावा करने वाले आयुर्वेदिक एवं होमियोपैथिक दवाओं तथा खाद्य उत्पादों की बिक्री के खिलाफ अभियान चला रखा है.

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अमेरिका के खाद्य एवं औषधि प्रशासन ने शुगर के इलाज का दावा करने वाले आयुर्वेदिक एवं होमियोपैथिक दवाओं तथा खाद्य उत्पादों की बिक्री के खिलाफ अभियान चला रखा है. प्रशासन ने 15 कंपनियों को इस संबंध में चेतावनी जारी करके कहा है कि शुगर के इलाज के नाम पर उनके द्वारा अवैध ढंग से बाजार में लाए गए उत्पादों से देश के कानून का उल्लंघन हुआ है. इनमें से कुछ कंपनियां ऐसी हैं, जो शुगर के इलाज से संबंधित उत्पाद भारत से खरीदती हैं.

शुगर एवं इससे संबंधित जटिलताओं की गंभीरता को कम करने, इसके इलाज, इसे ठीक करने या इसके रोकथाम का दावा करने वाली विदेशी एवं घरेलू कंपनियां ऑनलाइन या खुदरा दुकानों के माध्यम से अपने उत्पादों की बिक्री करती हैं. इनसे कहा गया है कि वे 15 दिनों के भीतर खाद्य एवं औषधि प्रशासन को बताएं कि वे किस प्रकार इन उल्लंघनों को दुरुस्त करेंगी.

खाद्य एवं औषधि प्रशासन ने उपभोक्ताओं को भी सलाह दी है कि वे इस तरह के उत्पादों को न खरीदें, क्योंकि इसमें नुकसानदेह या असुरक्षित सामग्री हो सकती है. ये उत्पाद वैधानिक रूप से शुगर के इलाज के लिए मौजूद दवाओं का भी स्थान ले सकते हैं.

खाद्य एवं औषधि प्रशासन ने जिन दवाओं पर प्रतिबंध लगाए हैं, उनमें मेटफॉरमिन तथा जनुविया जैसी अमान्य दवाएं भी हैं, जिन्हें भारत से खरीदा जाता है और अमेरिका में जिनकी बिक्री ऑनलाइन की जाती है. प्रतिबंधित दवाओं में डिक्सी भी शामिल है, जिसका निर्माण सूरत की अमार्तम लाइफकेयर कंपनी करती है.

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खाद्य एवं औषधि प्रशासन ने कहा है कि हालांकि उसे फिलहाल इन दवाओं से किसी प्रकार की बीमारी या नुकसान के बारे में सूचना नहीं मिली है, लेकिन उसने प्रतिबंध का कदम सार्वजनिक स्वास्थ्य को होने वाले किसी भी नुकसान से बचाने के लिए उठाया है.

दुनियाभर में शुगर के 30 करोड़ मरीज हैं, जिनमें से करीब 2.6 करोड़ अमेरिकी और छह करोड़ भारतीय हैं. पिछले चार वर्षों में शुगर के इलाज से संबंधित दवाओं की बिक्री में 60 प्रतिशत की वृद्धि हुई है.

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