अमेरिकी प्रतिबंधों के बीच ईरान लंबे समय से अलग-थलग पड़ा हुआ है. अब जब इस्लामिक देश में बड़े पैमाने पर विरोध-प्रदर्शन हो रहे हैं, वो और अधिक अकेला हो गया है जहां कोई भी मुस्लिम देश उसके पक्ष में खुलकर बोलने से बच रहा है. ट्रंप लगातार ईरान में सैन्य कार्रवाई की धमकी दे रहे हैं जिससे ईरान पर स्टैंड लेने के लिए कोई मुस्लिम देश खुलकर सामने नहीं आ रहा. लेकिन एक देश है जो ईरान के साथ खड़ा दिख रहा है- तुर्की. तुर्की ने ईरान में विदेशी हस्तक्षेप के खिलाफ वॉर्निंग दी है.
तुर्की ने वॉर्निंग दी है कि पड़ोसी ईरान में किसी भी तरह का विदेशी हस्तक्षेप न सिर्फ उस देश में, बल्कि पूरे क्षेत्र में संकट को बढ़ा देगा. तुर्की ने कहा कि ईरान के घरेलू मसलों का समाधान बातचीत के जरिए होना चाहिए और यह समाधान देश के अंदर, उसके लोगों की तरफ से होना चाहिए.
राष्ट्रपति रेचेप तैय्यप एर्दोगन की सत्तारूढ़ एके पार्टी के उपाध्यक्ष और प्रवक्ता ओमर चेलिक ने यह वॉर्निंग दी है. सोमवार को उन्होंने कहा कि 'तुर्की ईरान में किसी तरह की अराजकता नहीं देखना चाहता, भले ही ईरानी समाज और सरकारी संस्थानों में समस्याएं मौजूद हों.'
अंकारा में पार्टी हेडक्वार्टर में तुर्की के राष्ट्रपति रेचप तैय्यप एर्दोगन की अध्यक्षता में हुई बैठक के बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस में चेलिक ने कहा, 'हम अपने पड़ोसी ईरान में किसी भी तरह की अराजकता नहीं चाहते.'
उन्होंने कहा कि जैसा कि ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान ने भी कहा है, ईरान की समस्याओं का समाधान ईरानी समाज की ताकत और देश की राष्ट्रीय इच्छा के जरिए ही होना चाहिए.
चेलिक ने कहा कि विदेशी हस्तक्षेप से हालात और ज्यादा खराब होंगे. उन्होंने अमेरिका के साथ-साथ इजरायल को भी वॉर्निंग दी और कहा कि इजरायल की तरफ से उकसावे की कोई भी कार्रवाई क्षेत्र में गंभीर संकट पैदा कर देगी.
उन्होंने जोर दिया कि इस मुद्दे से निपटने का रास्ता बातचीत और आपसी संपर्क बढ़ाने से निकलेगा. चेलिक ने कहा कि ईरान को लेकर इजरायली अधिकारियों के हालिया बयान पूरे क्षेत्र में तनाव को और भड़का सकते हैं.
उन्होंने कहा, 'इस तरह का आक्रामक रुख पूरे क्षेत्र में और ज्यादा उथल-पुथल पैदा करेगा और इसे सिरे से खारिज किया जाना चाहिए.'
ईरान इस समय 2022 के बाद से सबसे बड़े विरोध-प्रदर्शन का सामना कर रहा है. प्रदर्शन राजधानी तेहरान में व्यापारियों के छोटे से विरोध से शुरू हुआ था जो अब खामेनेई शासन के खिलाफ क्रांति बन गया है. ईरान के विरोध-प्रदर्शनों में अब तक 648 लोगों की जान गई है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप बार-बार कह रहे हैं कि अगर ईरानी शासन ने सख्ती बढ़ाई तो वो सैन्य हस्तक्षेप कर सकते हैं.