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अफगानिस्तान: बानू में टूटी तालिबान की कमर, जिला प्रमुख समेत 50 ढेर, 20 को बनाया बंदी

बानू जिले में अफगान फौज ने तालिबान की कमर तोड़ दी है. तालिबान के जिला प्रमुख समेत 50 तालिबानियों को ढेर कर दिया गया है. इसके साथ ही करीब 20 तालिबानी लड़ाकों को बंदी भी बना लिया गया.

तालिबानी लड़ाके तालिबानी लड़ाके
स्टोरी हाइलाइट्स
  • तालिबानी लड़ाकों का विरोधी फौजों से आमना-सामना
  • अफगान लड़ाकों ने जिला प्रमुख को किया ढेर
  • करीब 50 और तालिबानी भी मारे गए

अफगानिस्तान की राजधानी काबुल में कब्जा जमाने के बाद तालिबान नई सरकार बनाने की तैयारी कर रहा है, लेकिन अब भी कई जिलों में तालिबानी लड़ाकों और अफगानिस्तान की फौज के बीच आमने-सामने की स्थिति बनी हुई है. अफगानिस्तान के बगलान प्रांत के अंद्राब में तालिबान और विरोधी लड़ाकों के बीच जबरदस्त टक्कर चल रही है. बानू जिले में अफगान फौज ने तालिबान की कमर तोड़ दी है. तालिबान के जिला प्रमुख समेत 50 तालिबानियों को ढेर कर दिया गया है. इसके साथ ही करीब 20 तालिबानी लड़ाकों को बंदी भी बना लिया गया.

पंजशीर प्रोविनेंस ने ट्वीट कर बताया है कि तालिबान का बानू जिला प्रमुख मारा गया है. उसके तीन साथी भी ढेर कर दिए गए. अंद्राब के विभिन्न इलाकों में लगातार दोनों गुटों के बीच टकराव चल रहा है. फज्र इलाके में 50 तालिबानियों को मारा गया और 20 अन्य को बंदी बना लिया गया.

इससे पहले बगलान प्रांत में ही अफगान फोर्स ने 300 तालिबानी मार गिराए थे. बीबीसी की पत्रकार यालदा हकीम ने ट्वीट कर बताया था कि बगलान के अंद्राब में छिपकर तालिबानियों पर ये बड़ा हमला किया गया. हमले में तालिबानियों को बड़ा नुकसान पहुंचा था. तालिबान विरोधी लड़ाकों की तरफ से दावा किया गया था कि इस हमले में उन्होंने 300 तालिबानियों को मार गिराया है. 

अफगानिस्तान के कुल 34 प्रांतों में से 33 प्रांतों में तालिबान का कब्जा हो चुका है. 15 अगस्त को तालिबानी लड़ाकों ने राजधानी काबुल पर कब्जा किया था, जिसके बाद जल्द सरकार बनाने का दावा किया गया था. तालिबानी लड़ाकों के पास से सिर्फ पंजशीर ही दूर है. पंजशीर में हमला करने के लिए तालिबानी लड़ाके बीते दिन वहां पहुंच भी गए थे. कट्टर संगठन ने जानकारी दी थी कि उनके कई सौ लड़ाके पंजशीर पहुंच रहे हैं, जिसके कुछ देर बाद उन्होंने दस्तक भी दे दी थी. 

पंजशीर पर कब्जा जमाने की तैयारी कर रहे तालिबान को अमरुल्लाह सालेह और अहमद मसूद की ओर से कड़ी टक्कर मिल रही है. दोनों की फौजें पूरी तरह से तालिबान को वापस खदेड़ने के लिए रणनीति बना चुकी हैं. रविवार को एक इंटरव्यू में अहमद मसूद ने कहा था कि वह युद्ध नहीं करेंगे, लेकिन किसी भी तरह के आक्रमण का विरोध जरूर करेंगे. उन्होंने कहा कि यदि तालिबान के साथ बातचीत विफल रहती है तो फिर युद्ध को टाला नहीं जा सकता है.

 

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