scorecardresearch
 

Sunita Williams return to earth: 'मैं वो एस्ट्रोनॉट हूं जो अंतरिक्ष में जाऊंगी', जब भतीजे के स्कूल पहुंची थीं सुनीता विलियम्स, भाभी फाल्गुनी ने बताया रोचक किस्सा

भारतीय मूल की सुनीता विलियम्स की रिश्तेदार फाल्गुनी पंड्या आज भारत आएंगी. फाल्गुनी पांड्या सुनीता विलियम्स की चचेरी भाभी हैं. इसी बीच उन्होंने सुनीता विलियम्स को लेकर एक रोचक कहानी शेयर की हैं.

Advertisement
X
जब भतीजे के स्कूल पहुंची थी सुनीता विलियम्स
जब भतीजे के स्कूल पहुंची थी सुनीता विलियम्स

सुनीता विलियम्स की पृथ्वी पर सफल लैंडिंग हो गई है. सुनीता विलियम्स और बुच विलमोर 5 जून 2024 को अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (आईएसएस) पर पहुंचे थे. उनकी यात्रा केवल 8 दिनों की थी, लेकिन तकनीकी समस्याओं के कारण वे फंस गए और 9 महीने वहीं गुजारना पड़ा. इसी बीच भारतीय मूल की सुनीता विलियम्स की रिश्तेदार फाल्गुनी पंड्या ने आज तक से एक रोचक किस्सा साझा की हैं. फाल्गुनी सुनीता विलियम्स की चचेरी भाभी हैं. 

दरअसल, ये किस्सा तब का है जब सुनीता विलियम्स अंतरिक्ष जाने वालीं थीं. फाल्गुनी पांड्या ने बताया कि सुनीता जब अंतरिक्ष में जाने वाली थीं तब मेरा बेटा काफी  उत्साहित था. इसको लेकर वो अपने स्कूल में दोस्तों को बताता था कि आंटी सुनीता एस्ट्रोनॉट हैं और वो अंतरिक्ष जाने वाली हैं. तब वो किंडर गार्डन में था.

यह भी पढ़ें: Sunita Williams: 9 महीने बाद पृथ्वी पर लौटीं सुनीता विलियम्स, देखें पहला रिएक्शन

हालांकि, जब वह ये बात करता था तो उसके दोस्त मजाक उड़ाते थे. इस बात को मेरे बेटे ने सुनीता को बताया. जिसके बाद वो खुद ख़ास न्यू जर्सी आईं और मेरे बेटे के स्कूल गईं और बच्चों को बताया कि मैं एस्ट्रोनॉट हूं. स्पेस में जाऊंगी. सुनीता बच्चों को लेकर काफी पैशनेट हैं.  वो हमेशा उन्हें मोटिवेट करती हैं.

Advertisement

5 जून 2024 को रवाना हुईं थीं अंतरिक्ष

5 जून 2024 को सुनीता विलियम्स और बैरी बुच विलमोर बोईंग स्टारलाइनर स्पेसक्राफ्ट को लेकर अंतरिक्ष के लिए रवाना हुए थे. 8 दिन बाद 13 जून को इन्हें वापस आना था लेकिन इस यान ने उन्हें 9 महीने स्पेस स्टेशन पर फंसा दिया. 

NASA ने अक्तूबर 2011 में बोईंग को स्पेसक्राफ्ट बनाने के लिए हरी झंडी दी थी. स्टारलाइनर बनते-बनते 6 साल लग गए. 2017 में यह यान बना. 2019 तक उसके परीक्षण होते रहे. लेकिन इन उड़ानों में कोई इंसान शामिल नहीं था. ये मानवरहित उड़ानें थीं. 

स्टारलाइनर की पूरी कहानी  

पहली मानवरहित ऑर्बिटल फ्लाइट टेस्ट 20 दिसंबर 2019 को हुई. लेकिन दो सॉफ्टवेयर की गड़बड़ी से यह दूसरे ऑर्बिट में पहुंच गया. स्पेस स्टेशन से डॉकिंग हो नहीं पाई. दो दिन बाद न्यू मेक्सिको के व्हाइट सैंड्स मिसाइल रेंज में वापस लैंड हुआ. 

हर उड़ान में दिक्कत रही

दूसरी मानवरहित उड़ान 6 अप्रैल 2020 को हुई. स्पेस स्टेशन तक जाना था. डॉकिंग करनी थी. इसके बाद वापस आना था. लेकिन लॉन्चिंग थोड़ी टालनी पड़ी. अगस्त 2021 में लॉन्चिंग करने की तैयारी हुई. लेकिन फिर स्पेसक्राफ्ट के 13 प्रोप्लशन वॉल्व में कुछ कमियां पाई गईं. इसके बाद बोईंग ने पूरे स्पेसक्राफ्ट को फिर से बनाया. 

Advertisement

मई 2022 में ट्रायल उड़ान की तैयारी की गई. 19 मई 2022 को स्टारलाइनर ने फिर उड़ान भरी. इस बार उसमें दो डमी एस्ट्रोनॉट्स बिठाए गए. लेकिन ऑर्बिटल मैन्यूवरिंग और एटीट्यूड कंट्रोल सिस्टम थ्रस्टर्स फेल हो गए. किसी तरह 22 मई 2022 को स्टारलाइनर को स्पेस स्टेशन से जोड़ा गया. 

यह भी पढ़ें: स्टेशन की मरम्मत, 900 घंटे रिसर्च और 150 से ज्यादा प्रयोग... सुनीता विलियम्स ने 9 महीने स्पेस में क्या किया?

सुनीता विलियम्स को हो सकती हैं ये हेल्थ प्रॉब्लम

अंतरिक्ष में इतना लंबा वक्त गुजारने के बाद सुनीता विलियम्स के स्वास्थ्य पर गहरा प्रभाव पड़ सकता है. सबसे बड़ी चिंता की बात हड्डियों और मांसपेशियों का कमजोर होना है. ऐसे इसलिए क्योंकि ISS में अंतरिक्ष यात्री माइक्रोग्रैविटी में तैरते हैं, जो उनके शरीर पर असर डालता है. पृथ्वी पर हमारे शरीर को हमेशा गुरुत्वाकर्षण के खिलाफ काम करना पड़ता है, जिससे हमारी मांसपेशियों और हड्डियों को लगातार व्यायाम मिलता है. लेकिन अंतरिक्ष में इस प्रतिरोध के बिना, मांसपेशियों की ताकत और हड्डियों का घनत्व घटने लगता है, क्योंकि शरीर को अपना वजन सहने की आवश्यकता नहीं होती. 

अंतरिक्ष यात्री हर महीने अपनी हड्डियों का 1% हिस्सा खो सकते हैं. विशेष रूप से कमर, कूल्हे और जांघ की हड्डियों में. इससे पृथ्वी पर लौटने के बाद हड्डी टूटने का खतरा बढ़ जाता है. इसे कम करने के लिए अंतरिक्ष यात्री ISS में कड़ी कसरत करते हैं. 

Advertisement

वहीं, अंतरिक्ष में यात्री 1-2 इंच लंबे हो सकते हैं क्योंकि उनकी रीढ़ की हड्डी लंबी हो जाती है. हालांकि, यह ऊंचाई पृथ्वी पर लौटने के बाद समाप्त हो जाती है.

अंतरिक्ष में तैरते हुए, यात्रियों के पैरों पर ज्यादा दबाव नहीं पड़ता, जिससे उनके पैरों के संपर्क से उत्पन्न होने वाली कठोर परतें मुलायम हो जाती हैं. इसके कारण उनके पैरों की त्वचा संवेदनशील हो जाती है और छिलने लगती है, जैसे नवजात शिशु के पैरों की त्वचा. इस प्रक्रिया को ठीक करने के लिए अंतरिक्ष यात्री धीरे-धीरे अपनी मांसपेशियों और त्वचा को मजबूत करने के लिए पुनर्वास करते हैं.

यह भी पढ़ें: जमीन पर क्यों नहीं उतरेगा सुनीता विलियम्स को लेकर आ रहा कैप्सूल? यहां होगी लैंडिंग

लंबे समय तक आईएसएस में रहने से अंतरिक्ष यात्री के हार्ट पर भी असर पड़ता है. पृथ्वी पर गुरुत्वाकर्षण रक्त, पानी और लसिका द्रव को नीचे की ओर खींचता है, जिससे वे शरीर में समान रूप से वितरित होते हैं. लेकिन माइक्रोग्रैविटी में, गुरुत्वाकर्षण नहीं होता, जिससे द्रव ऊपरी हिस्से की ओर खिसक जाते हैं. इससे चेहरे की सूजन, नाक में जाम और सिर में दबाव बढ़ सकता है. साथ ही, निचला शरीर कमजोर और पतला दिखने लगता है. इसे "पफी-हेड बर्ड-लेग सिंड्रोम" कहा जाता है.

Advertisement

लंबे वक्त तक रहेगा असर

अंतरिक्ष में उच्च-ऊर्जा कॉस्मिक रेडिएशन से कोई सुरक्षा नहीं होती. अंतरिक्ष यात्री सूर्य से उच्च स्तर की रेडिएशन का सामना करते हैं, जो पृथ्वी पर हर दिन एक सीने का एक्स-रे लेने के बराबर होता है. 9 महीने में, सुनीता विलियम्स ने लगभग 270 एक्स-रे के बराबर रेडिएशन का सामना किया. लंबे समय तक इस रेडिएशन के संपर्क में आने से प्रतिरक्षा तंत्र कमजोर हो सकता है. कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है.

(इनपुट- आकाश राय)

---- समाप्त ----
Live TV

Advertisement
Advertisement