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दिवालिया होने की कगार पर खड़े श्रीलंका को भारत ने बचाया, हो रही तारीफ

भारत ने दिवालिया होने के कगार पर पहुंचे श्रीलंका को करोड़ो के आर्थिक पैकेज की घोषणा की है. श्रीलंका के प्रमुख अर्थशास्त्री ने इसकी सराहना करते हुए कहा है कि भारत की मदद से श्रीलंका को कुछ समय के लिए राहत की सांस मिली है. उन्होंने IMF से मदद की भी बात कही है.

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भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और श्रीलंका के राष्ट्रपति गोटाबाया राजपक्षे (Photo- Reuters) भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और श्रीलंका के राष्ट्रपति गोटाबाया राजपक्षे (Photo- Reuters)
स्टोरी हाइलाइट्स
  • श्रीलंका दिवालिया होने के कगार पर
  • भारत ने की आर्थिक मदद
  • श्रीलंका के अर्थशास्त्री ने की सराहना

भारत का पड़ोसी देश श्रीलंका गंभीर आर्थिक संकट से जूझ रहा है. इसी बीच भारत ने उसे मदद के रूप में 90 करोड़ डॉलर का कर्ज देने का ऐलान किया है. श्रीलंका के प्रमुख अर्थशास्त्री और श्रीलंकाई सेंट्रल बैंक के पूर्व डिप्टी गवर्नर डब्ल्यूए विजेवर्धने ने भारत की इस मदद की तारीफ की है और कहा है कि भारत की तरफ से इस आर्थिक मदद ने अभी के लिए श्रीलंका की डूबती नैया को बचा लिया है. साथ ही उन्होंने श्रीलंका की आर्थिक स्थिति को लेकर राष्ट्रपति गोटाबाया राजपक्षे को भी चेतावनी दी.

श्रीलंका का विदेशी मुद्रा भंडार लगभग खाली हो चुका है, ऐसे में उसके दिवालिया होने की नौबत आ गई है. 

शनिवार को अर्थशास्त्री विजेवर्धने ने राष्ट्रपति को चेतावनी देते हुए कहा कि विदेशी मुद्रा की कमी से जूझ रहे श्रीलंका को तत्काल अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष से कर्ज लेने की आवश्यकता होगी. श्रीलंका का विदेशी मुद्रा भंडार लगभग समाप्त हो चुका है और सभी जरूरी वस्तुओं की कमी हो रही है. देश में महंगाई अपने चरम पर है. इसी स्थिति से निपटने के लिए भारत ने गुरुवार को 90 करोड़ डॉलर का ऋण श्रीलंका को देने की घोषणा की है. 

श्रीलंका में भारतीय उच्चायुक्त गोपाल बागले ने सेंट्रल बैंक के गवर्नर अजीत निवार्ड काबराल से मुलाकात की और उन्हें आर्थिक रूप से समर्थन देने की बात की. भारतीय उच्चायोग की तरफ से एक ट्वीट भी किया गया जिसमें कहा गया, 'इस आर्थिक मदद में 50.9 करोड़ डॉलर से अधिक की राशि एशियन क्लियरिंग यूनियन समझौते को स्थगित करने और 40 करोड़ डॉलर की करेंसी अदला-बदली शामिल है.'

विजेवर्धने ने कहा, 'भारत के आर्थिक पैकेज ने 18 जनवरी को अंतरराष्ट्रीय सॉवरेन बांड के निपटान के बाद आनेवाले एक तत्काल आर्थिक संकट को टाल दिया है. 40 करोड़ डॉलर की अदला-बदली ने एक हद तक सकल भंडार में सुधार करने में मदद की है. 150 करोड़ डॉलर की भारतीय क्रेडिट लाइन की मदद से श्रीलंका उन वस्तुओं को भारत से आयात करेगा जिनकी देश में कमी है.'

विजेवर्धने ने कहा कि भारत की समय पर सहायता ने श्रीलंकाई सरकार को दो महीने की राहत दी है. उन्होंने कहा कि ये एक ऐसा समय है जिसमें कठिन आर्थिक सुधारों को लागू करने की आवश्यकता है और स्थायी समाधान के लिए IMF से कर्ज लेने की आवश्यकता है.

उन्होंने कहा, 'भारत के हस्तक्षेप से श्रीलंका को मदद मिली है, लेकिन वे हमें स्थायी राहत नहीं दे सकते. हमें इस मदद के लिए भारत से किए गए वादों का सम्मान करने की आवश्यकता है. इस बीच, हमें आईएमएफ से मदद लेने की जरूरत है.'

विजेवर्धने की टिप्पणी भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर और श्रीलंका के वित्त मंत्री बासिल राजपक्षे द्वारा शनिवार को श्रीलंका को भारतीय आर्थिक सहायता पर एक लंबी वर्चुअल बैठक के बाद आई है. बैठक के दौरान, जयशंकर ने कहा कि भारत हमेशा श्रीलंका के साथ खड़ा रहा है.

भारतीय विदेश मंत्रालय की तरफ से जारी एक बयान में कहा गया, 'कोविड-19 महामारी से उत्पन्न आर्थिक और अन्य चुनौतियों पर काबू पाने के लिए हर संभव तरीके से भारत श्रीलंका का समर्थन करना जारी रखेगा.'

जयशंकर ने श्रीलंका के वित्त मंत्री से बातचीत के दौरान कहा, 'करीबी दोस्त और समुद्री पड़ोसियों के रूप में, भारत और श्रीलंका दोनों घनिष्ठ आर्थिक संबंधों से लाभ उठाने के लिए तैयार हैं.'

भारत की आर्थिक मदद की सराहना श्रीलंका के लोग भी कर रहे हैं. ट्विटर पर थिनुस्का सोयसा नाम की एक यूजर ने लिखा, '2022 की प्रेरणादायी शुरुआत.' चरिथ नाम के एक यूजर ने लिखा, 'चीन ने कहा कि वो कर्ज से निपटने में हमारी मदद का इरादा रखता है, लेकिन मदद को सामने आया भारत.'

IMF से कर्ज लेने का मुद्दा श्रीलंका में विवादास्पद रहा है. इस मुद्दे पर श्रीलंका के मंत्रियों की राय गंभीर रूप से बंटी हुई है.

श्रीलंका के सकल घरेलू उत्पाद में 2020 में रिकॉर्ड 3.6 प्रतिशत की गिरावट आई थी और जुलाई के दौरान एक साल में इसका विदेशी मुद्रा भंडार आधे से अधिक गिरकर केवल 280 करोड़ डॉलर हो गया था. पिछले 12 महीनों में अमेरिकी डॉलर के मुकाबले श्रीलंकाई रुपये में 9 प्रतिशत से अधिक का मूल्यह्रास हुआ है. इस कारण आयात अधिक महंगा हो गया है.

महामारी के कारण पर्यटन से देश की कमाई प्रभावित होने के बाद श्रीलंका एक गंभीर विदेशी मुद्रा संकट का सामना कर रहा है. 

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