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पांचवीं बार नेपाल के प्रधानमंत्री बने शेर बहादुर देउबा, ओली ने दिया इस्तीफा

इससे पहले नेपाल की सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया था कि अगले 28 घंटे में शेर बहादुर देउबा (Sher Bahadur Deuba) को अगला प्रधानमंत्री (Prime Minister) नियुक्त कर दिया जाए. ये आदेश तब आया है जब नेपाल में पिछले लंबे वक्त से राजनीतिक नेतृत्व का संकट था.

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स्टोरी हाइलाइट्स
  • नेपाली कांग्रेस अध्यक्ष शेर बहादुर देउबा होंगे पीएम
  • सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद बने पीएम
  • राजनीतिक संकट के बीच केपी ओली का इस्तीफा

नेपाली कांग्रेस के अध्यक्ष शेर बहादुर देउबा (Sher Bahadur Deuba) मंगलवार को पांचवीं बार देश के प्रधानमंत्री (Prime Minister) बने. राष्ट्रपति विद्या देवी भंडारी ने संविधान के अनुच्छेद 76(5) के तहत उन्हें प्रधानमंत्री नियुक्त किया. यह पांचवीं बार है जब देउबा (74) ने नेपाल के प्रधानमंत्री के तौर पर सत्ता में वापसी की है. इससे पहले नेपाल के कार्यवाहक प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली (KP Sharma Oli) ने प्रधानमंत्री पद से इस्तीफा दिया. यह इस्तीफा नेपाल सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद दिया गया है. इस्तीफे के बाद केपी ओली ने कहा कि हमारी पार्टी सुप्रीम कोर्ट के फैसले का सम्मान करती है. इसलिए मैंने पीएम पद से इस्तीफा दे दिया है. 

इससे पहले नेपाल की सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया था कि अगले 28 घंटे में शेर बहादुर देउबा (Sher Bahadur Deuba) को अगला प्रधानमंत्री (Prime Minister) नियुक्त कर दिया जाए. ये आदेश तब आया है जब नेपाल में पिछले लंबे वक्त से राजनीतिक नेतृत्व का संकट था. केपी शर्मा ओली (KP Sharma Oli) की अगुवाई वाली मौजूदा सरकार ने पिछले पांच महीने में दूसरी बार सदन में बहुमत खोया. ऐसे में सोमवार को सुप्रीम कोर्ट ने तुरंत नई सरकार बनाने के लिए कहा था. 

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खबर में कहा गया कि राष्ट्रपति कार्यालय ने देउबा को उनकी नियुक्ति के बारे में सूचित किया. फिलहाल यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि शपथ ग्रहण कब होगा? क्योंकि इसके लिये तैयारियां चल रही हैं. इससे पूर्व देउबा चार बार प्रधानमंत्री रह चुके हैं. पहली बार सितंबर 1995- मार्च 1997, दूसरी बार जुलाई 2001- अक्टूबर 2002, तीसरी बार जून 2004- फरवरी 2005 और चौथी बार जून 2017- फरवरी 2018 तक.

संवैधानिक प्रावधान के तहत प्रधानमंत्री के तौर पर नियुक्ति के बाद देउबा को 30 दिनों के अंदर सदन में विश्वास मत हासिल करना होगा. सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को प्रधानमंत्री ओली के 21 मई के संसद की प्रतिनिधि सभा को भंग करने के फैसले को रद्द कर दिया था और देउबा को प्रधानमंत्री नियुक्त करने का आदेश दिया था. प्रधान न्यायाधीश चोलेंद्र शमशेर राणा के नेतृत्व वाली पांच सदस्यीय संविधान पीठ ने कहा था कि प्रधानमंत्री के पद पर ओली का दावा असंवैधानिक है.
 

 

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