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तीसरी बार बांग्लादेश की प्रधानमंत्री बनीं शेख हसीना

बांग्लादेश में हिंसक झड़पों, कम मतदान और विपक्षी दलों के बहिष्कार के बीच हुए विवादास्पद चुनाव के बाद प्रधानमंत्री शेख हसीना ने लगातार दूसरी बार प्रधानमंत्री पद की शपथ ली. उनके साथ 48 सदस्यीय नए मंत्रिमंडल ने भी शपथ ग्रहण किया.

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शेख हसीना
शेख हसीना

बांग्लादेश में हिंसक झड़पों, कम मतदान और विपक्षी दलों के बहिष्कार के बीच हुए विवादास्पद चुनाव के बाद प्रधानमंत्री शेख हसीना ने लगातार दूसरी बार प्रधानमंत्री पद की शपथ ली. उनके साथ 48 सदस्यीय नए मंत्रिमंडल ने भी शपथ ग्रहण किया.

राष्ट्रपति अब्दुल हामिद ने राष्ट्रपति भवन ‘बंगभबन’ में पहले शेख हसीना को पद की शपथ दिलाई. समारोह में सरकार और सेना के शीर्ष अधिकारी, नेता और सिविल सोसायटी के सदस्यों के अलावा विदेशी हस्तियों में भारतीय उच्चायुक्त पंकज सरण, अमेरिकी राजदूत डैन मोजेना और ब्रिटिश राजनयिक रॉबर्ट गिब्सन शामिल हुए.

शेख हसीना के मंत्रिमंडल में 29 कैबिनेट मंत्री, 17 राज्य मंत्री और दो उपमंत्री शामिल हैं. पिछली सरकार के जिन बड़े नामों को इस बार कैबिनेट में जगह नहीं मिली है, उनके नाम हैं- विदेश मंत्री दिपू मोनी, गृहमंत्री मोहिउद्दीन खान आलमगीर और बिना किसी मंत्रालय के मंत्री और अल्पसंख्यक नेता सुरंजीत सेन गुप्ता.

लोगों से खचाखच भरे बंगभबन के दरबार हॉल में 66 वर्षीय हसीना आत्मविश्वास से भरी नजर आईं. उन्होंने देश के संविधान और राज्य की सम्प्रभुता को संरक्षित, सुरक्षित रखने और रक्षा करने की शपथ ली.

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दर्शकों की तालियों के बीच हसीना ने कहा, ‘मैं शेख हसीना, शपथ लेती हूं कि...सरकार की प्रधानमंत्री होने के नाते कानून के दायरे में रहते हुए मैं अपने कर्तव्यों का निर्वाह करूंगी.’

उन्होंने कहा, ‘आप अच्छी तरह जानते हैं कि शेख हसीना किसी भी दबाव के आगे नहीं झुकती है, चाहे वह राष्ट्रीय हो या अंतरराष्ट्रीय.’ देश के मुख्य विपक्षी दल बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) ने शपथ ग्रहण समारोह में हिस्सा नहीं लिया.

बांग्लादेश में सैन्य शासन के बाद दोबारा शुरू हुए लोकतांत्रिक शासन के दो दशकों में हसीना तीसरी बाद प्रधानमंत्री बनी हैं. इससे पहले वे 1996 से 2001 तक प्रधानमंत्री रही थीं. हसीना ने लगातार दूसरी बार प्रधानमंत्री पद का कार्यभार संभाला है. गत नौ जनवरी को हसीना को सर्वसम्मति से अवामी लीग के संसदीय दल का नेता चुना गया था.

देश में हुए चुनाव के दौरान चुनाव संबंधी हिंसा में कम से कम 21 लोग मारे गए थे. 300 सीटों में से 147 सीटों के लिए हुए चुनाव में अधिकतर मतदाताओं ने घर से बाहर नहीं निकलने का फैसला किया था.

हालांकि जातीय पार्टी के प्रमुख एचएम इरशाद की पत्नी रौशन को संसद में विपक्ष का नेता बनाया गया है, लेकिन पार्टी के तीन नेताओं को हसीना के मंत्रिमंडल में शपथ दिलाई गई.

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जानकारों का कहना है कि आम चुनाव में 32 सीटें जीतने वाली पार्टी के बीच आंतरिक मतभेद है. हालांकि एक सीनियर मंत्री का दावा है कि जातीय पार्टी के नेताओं को इसलिए शामिल किया गया है, क्योंकि अवामी लीग आतंकवाद जैसी चुनौतियों से निपटने के लिए बहुदलीय सरकार बनाना चाहती थी.

सूचना मंत्री एच. हक इनु ने कहा, ‘हसीना ने आतंकवाद और उग्रवाद की चुनौतियों के बीच इस बहुदलीय सरकार का गठन किया है. जातीय पार्टी संसद में विपक्ष का कर्तव्य निभाएगी और मंत्रिमंडल में अपना प्रतिनिधित्व भी करेगी.’

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