तेल निर्यातक देशों के संगठन ओपेक प्लस के तेल उत्पादन में कटौती के बाद से ही अमेरिका परेशान है. ओपेक प्लस संगठन में सऊदी अरब का दबदबा है लेकिन सऊदी ने अमेरिका की तेल उत्पादन बढ़ाने की मांग को पूरी तरह अनसुना कर दिया. सऊदी अरब से मिले झटके के बाद बुधवार को अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन ने यूएस स्ट्रैटेजिक रिजर्व से 15 मिलियन बैरल तेल निकालने का ऐलान कर दिया है. बाइडेन के इस फैसले के बाद यूएस स्ट्रैटेजिक रिजर्व साल 1984 के बाद पहली बार अपने सबसे निचले स्तर पर होगा.
अमेरिका में मिड टर्म चुनाव से पहले जो बाइडन का यह फैसला काफी अहम माना जा रहा है. ओपेक प्लस के फैसले के बाद से ही जो बाइडन को चिंता थी कि तेल की बढ़ती कीमतों का असर कहीं चुनाव पर न पड़ जाए.
अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन ने बुधवार को कहा कि 15 मिलियन बैरल तेल निकालने के बाद 180 मिलियन बैरल निकालने का वह लक्ष्य पूरा हो जाएगा, जिसको लेकर बाइडन प्रशासन ने मार्च में ऐलान किया था.
अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन ने कहा कि यह फैसला अमेरिका के बाजार में स्थिरता और तेल की कीमतों में गिरावट बनाए रखेगा, वो भी ऐसे समय में जब दूसरे देश इसके अस्थिरता के लिए कारण बन रहे हैं.
वहीं अमेरिकी ऊर्जा कंपनियों को संदेश देते हुए अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन ने कहा कि सभी कंपनियों को मुनाफे का इस्तेमाल ज्यादा स्टॉक जमा करने में नहीं करना चाहिए. अभी तो बिल्कुल नहीं, जब एक जंग छिड़ी हुई है. बाइडन ने कहा कि सभी कंपनियों को अपने लाभ का इस्तेमाल उत्पादन बढ़ाने और रिफाइनिंग के लिए करना चाहिए.
क्या होगा रिजर्व से 15 मिलियन तेल निकालने का असर
इसका असर यह होगा कि यूएस स्ट्रैटेजिक रिजर्व साल 1984 के बाद पहली बार अपने सबसे निचले स्तर पर होगा. अमेरिकी भंडार में सिर्फ 400 मिलियन बैरल तेल ही बचेगा, जो बाइडन प्रशासन के लिए चिंता की बात जरूर होगी.
चर्चा यह भी है कि सर्दियों के मौसम को देखते हुए अमेरिकी राष्ट्रपति इसके बाद भी यूएस रिजर्व से तेल निकालने का ऐलान कर सकते हैं. हालांकि, अभी तक यह नहीं पता चल पाया है कि बाइडन इस फैसले को कब लेंगे और रिजर्व से कितना तेल और निकालने का ऐलान करेंगे.
रूस-यूक्रेन युद्ध से तेल की कीमतों पर भारी असर
रूस और यूक्रेन युद्ध के बाद से ही रूस (तेल निर्यातक देश) पर कई तरह के आर्थिक प्रतिबंध लगाए गए हैं, जिस वजह से तेल की कीमतों पर असर देखने को मिला है. अब सऊदी अरब के दबदबे वाले ओपेक प्लस के तेल उत्पादन कटौती के फैसले ने और ज्यादा चिंताएं बढ़ा दी. ऐसे में जो बाइडन कच्चे तेल के अलावा और भी ऊर्जा के अन्य विकल्पों पर ध्यान दे रहे हैं, जिससे अमेरिका और वैश्विक सप्लाई की स्थिति ठीक रखी जा सके.
ओपेक प्लस के फैसले से भड़का हुआ है अमेरिका
हाल ही में जब ओपेक प्लस ने प्रतिदिन 2 मिलियन बैरल तेल उत्पादन में कटौती का फैसला किया था तो अमेरिका ने अपनी भरपूर नाराजगी जताई थी. अमेरिका ने संगठन के मुख्य देश सऊदी अरब पर तीखा हमला बोलते हुए कहा था कि इस फैसले के नतीजे भुगतने होंगे. साथ ही अमेरिका ने यह भी आरोप लगाया था कि सऊदी अरब ओपेक प्लस के इस फैसले के जरिए रूस की मदद कर रहा है.
अमेरिका में बढ़ते गैस (तेल) के दाम का बाइडन पर असर
अमेरिका में गैस के बढ़ते दाम जो बाइडन के लिए चिंता की बात है. इसका असर मिड टर्म इलेक्शन में देखने को मिल सकता है. अमेरिका में मौजूदा समय में गैस का दाम 3.78 डॉलर प्रति गैलन (3.78 लीटर ) पहुंचा हुआ है. पिछले सप्ताह से कीमतों में बेशक थोड़ी कमी आई है, लेकिन पिछले महीने यह उछाल पर था.
अमेरिका की एक स्वतंत्र ऊर्जा शौध फर्म क्लियर व्यू एनर्जी पार्टनर्स के अनुसार, चुनाव में सीनेट का भविष्य तय करने वाले अमेरिका के दो राज्य नवादा और पेंसिलवेनिया ऊर्जा कीमतों को लेकर काफी संवेदनशील हैं.
चिंता की बात है कि अमेरिका में अगर लोग सस्ते गैस की मांग भी करते हैं तो भी ऐसा करना काफी मुश्किल है, क्योंकि वैश्विक अर्थव्यवस्था मौजूदा समय में काफी कमजोर है, जिस वजह से सप्लाई नहीं बढ़ाई जा सकती है.