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अपने दोस्त पाकिस्तान से ही भिड़ गया तालिबान, देश के भीतर इमरान खान से लोग बोले- और दिलाओ मान्यता

इमरान खान की सरकार जहां एक तरफ तालिबान की सरकार को मान्यता दिलाने में लगी है, वहीं दूसरी तरफ, दोनों देशों के सैनिकों के बीच सीमा पर तकरार की स्थिति है. विपक्ष ने इसे मुद्दा बनाते हुए सरकार को सदन में घेरा है.

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तालिबान की सेना ने पाकिस्तान की सेना के लगाए बाड़ उखाड़ दिए हैं (Photo-Reuters) तालिबान की सेना ने पाकिस्तान की सेना के लगाए बाड़ उखाड़ दिए हैं (Photo-Reuters)
स्टोरी हाइलाइट्स
  • सीमा पर विवाद की गूंज पाकिस्तान की संसद तक
  • विपक्षी सांसद रजा रब्बानी ने इमरान खान सरकार से मांगा जवाब
  • कहा- तालिबान को समर्थन देने में इतनी जल्दबाजी क्यों

अफगानिस्तान में तालिबान की वापसी के बाद से उसकी सरकार को मान्यता दिलाने के लिए सबसे ज्यादा कोशिशें पाकिस्तान की तरफ से ही हुई हैं लेकिन अब सीमा विवाद को लेकर दोनों आमने-सामने आ गए हैं. बुधवार को तालिबान ने सीमा पर पाकिस्तानी सेना को बाड़ा बनाने से रोका तो पाकिस्तान के सैनिकों ने गोलीबारी कर दी. अब पाकिस्तान के भीतर ही तालिबान को लेकर विदेश नीति पर सवाल खड़े होने लगे हैं. 

पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (पीपीपी) के सांसद रजा रब्बानी ने शुक्रवार को अफगान तालिबान को समर्थन देने को लेकर इमरान खान सरकार की जल्दबाजी पर सवाल उठाया है. उन्होंने कहा कि जब अफगानिस्तान की तालिबान सरकार दोनों देशों के बीच की सीमा को नहीं मानती, फिर सरकार जल्दबाजी में क्यों है? संसद के एक सत्र को संबोधित करते हुए रब्बानी ने विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी से कहा कि वो सदन को पाकिस्तान-अफगानिस्तान के बीच हालिया सीमा विवाद को लेकर स्थिति स्पष्ट करें.

सीमा विवाद को लेकर पाकिस्तान की संसद में उठे सवाल

अफगानिस्तान और पाकिस्तान की सेनाओं के बीच रविवार को सीमा पर कंटीले तारों का बाड़ा लगाने को लेकर विवाद खड़ा हो गया था. तालिबान सरकार की सेना ने पाकिस्तानी सेना को दोनों देशों के बीच बाड़ लगाने से रोक दिया था. पाकिस्तानी अधिकारियों ने अभी तक इस घटना पर कोई टिप्पणी नहीं की है. इसी बात को लेकर संसद में रब्बानी ने सवाल किया, 'वो लोग सीमा रेखा मानने को तैयार नहीं हैं तो हम क्यों जल्दबाजी कर रहे है?'

पीपीपी के सांसद ने सदन में तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) को लेकर भी चिंता जताई है. टीटीपी को लेकर हाल में ऐसी खबरें आईं कि आतंकवादी संगठन अफगानिस्तान में संगठित हो रहा है.

दोनों देशों के बीच क्या है पूरा विवाद?

पाकिस्तान की सरकार और तालिबान के संबंध मजबूत माने जाते हैं. पाकिस्तान पर पूर्व में ये भी आरोप लगते रहे हैं कि वो तालिबान को संसाधन मुहैया कराता है. तालिबान की सरकार बनने के बाद से पाकिस्तान लगातार उसे अंतरराष्ट्रीय मान्यता दिलाने की कोशिश में लगा हुआ है. हालांकि, अब दोनों देशों के रिश्तों में सीमा को लेकर दरार पैदा होने लगी है.

दोनों देशों के बीच ब्रिटिश काल में डूरंड रेखा नाम से एक सीमा रेखा का निर्धारण किया गया था. हालांकि, अफगानिस्तान इस सीमा को नहीं मानता. ब्रिटिश काल में भी इस सीमा निर्धारण का काफी विरोध हुआ था. तालिबान की सरकार के विरोध के बावजूद पाकिस्तान ने 2, 600 किलोमीटर के अधिकांश हिस्से पर बाड़ा लगा दिया है. 

तालिबान की सेना ने उखाड़ फेंके हैं पाकिस्तान के द्वारा लगाए गए बाड़े

तालिबान की सेना ने पूर्वी नंगरहार के गुश्ता जिले में पाकिस्तान सेनी की तरफ से लगाए गए बाड़ को उखाड़ दिया है. सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हो रहा है जिसमें तालिबान के वरिष्ठ अधिकारियों पाकिस्तानी सेना के अधिकारियों को सीमा पर दोबारा घेराबंदी न करने की चेतावनी दे रहे हैं.

इसके बाद तालिबानी सैनिक कंटीली तारों का बंडल लेकर अपने कैंपों की तरफ लौट गए. अफगानिस्तान के रक्षा मंत्रालय ने पाकिस्तान द्वारा बाड़ा लगाने की घटना को गैर कानूनी करार दिया है. 

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