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सुषमा की पाक का दो टूक- एक ओर अलगाववादियों से बैठक, दूसरी तरफ वार्ता संभव नहीं

विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने पाकिस्तान को खरी-खरी सुनाई है. गुरुवार को न्यूयॉर्क में पाकिस्तान के सुरक्षा सलाहकार सरताज अजीज ने कहा था कि अगर भारत पहले पहल करे तो पाकिस्तान बातचीत को तैयार है. इस पर सुषमा ने कहा कि पहल में आगे-पीछे कुछ नहीं होता. सुषमा ने कहा कि एक तरफ अलगाववादियों से बैठक और दूसरी तरफ बातचीत संभव नहीं है.

विदेश मंत्री सुषमा स्वराज विदेश मंत्री सुषमा स्वराज

विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने पाकिस्तान को खरी-खरी सुनाई है. गुरुवार को न्यूयॉर्क में पाकिस्तान के सुरक्षा सलाहकार सरताज अजीज ने कहा था कि अगर भारत पहले पहल करे तो पाकिस्तान बातचीत को तैयार है. इस पर सुषमा ने कहा कि पहल में आगे-पीछे कुछ नहीं होता. सुषमा ने कहा कि एक तरफ अलगाववादियों से बैठक और दूसरी तरफ बातचीत संभव नहीं है.

सुषमा स्वराज ने कहा कि पाकिस्तान ने अलगाववादियों से मुलाकात करके बातचीत के माहौल को बिगाड़ा. नई सरकार ने पाकिस्तान से बातचीत की पहल की. पर पाकिस्तान ने इसे मौके को हाथ से जाने दिया. पड़ोसी मुल्क के कदम से विश्वास का माहौल बिगड़ा.

सरताज अजीज के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए उन्होंने कहा, 'पहले या दूसरे का सवाल नहीं है. हमने बातचीत बंद करने के फैसले पर पहले ही साफ कर दिया है कि ऐसा करना जरूरी था. हमने बातचीत की पहल की, पर इसे बिगाड़ा पाकिस्तान ने.'

सुषमा स्वराज ने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने खुद शपथ ग्रहण समारोह में पाकिस्तानी पीएम नवाज शरीफ को न्योता दिया. दोनों देशों के प्रधानमंत्री की द्विपक्षीय वार्ता के दौरान यह चर्चा हुई कि वाघा-अटारी बॉर्डर के जरिए व्यापार की शुरुआत होनी चाहिए. बैठक में पीएम शरीफ ने सुझाया कि दोनों देशों के विदेश सचिव के बीच वार्ता होनी चाहिए. हम इस पर राजी हो गए.

पाकिस्तान पर सवाल उठाते हुए उन्होंने कहा, '25 अगस्त को होने वाली सचिव स्तरीय वार्ता से ठीक 4 दिन  पहले पाकिस्तानी राजदूत अलगाववादियों नेताओं से बात करते हैं. तो बातचीत का माहौल किसने बिगाड़ा?'

वहीं सरताज अजीज का कहना है कि पाकिस्तानी अधिकारियों के हुर्रियत नेताओं से मिलने में कुछ भी नया नहीं है. यह पिछले 20 साल से होता आया है.

इस पर सुषमा स्वराज ने कहा, 'जहां तक हुर्रियत नेताओं से बातचीत का मुद्दा है तो पाकिस्तान से आने वाले नेता ऐसा करते थे. लेकिन पहली बार ऐसा हुआ जब पीएम नवाज शरीफ आए पर उन्होंने अलगाववादियों से बात नहीं की. वह भारत का इशारा समझ रहे थे. तभी तो बातचीत की पहल को एक दिशा मिली. लेकिन किसी वार्ता से ठीक पहले पाकिस्तानी एंबेसडर हुर्रियत नेता से मिले, ऐसा पहले कभी नहीं हुआ था.'

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