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कुलभूषण जाधव मामला: ICJ में PAK को झटका, केस स्थगित करने की मांग खारिज

भारतीय नागरिक कुलभूषण जाधव के मामले में अंतरराष्ट्रीय न्यायालय में चार दिनों तक लगातार सुनवाई होगी. पहले दिन भारत ने अपना पक्ष रखते हुए पाकिस्तान पर वियना संधि के उल्लंघन का आरोप लगाया तो वही दूसरे दिन न्यायालय ने पाकिस्तान की तरफ से केस को स्थगित करने की मांग खारिज कर दी. अब बुधवार को भारत की तरफ से दूसरे दौर की जिरह होगी.

आईसीजे में पाक का पक्ष रखते ख्वार कुरैशी आईसीजे में पाक का पक्ष रखते ख्वार कुरैशी

जासूसी के आरोप में पाकिस्तान की जेल में बंद कुलभूषण जाधव केस में अंतरराष्ट्रीय न्यायालय ने मामले को स्थगित करने की पाकिस्तान की मांग खारिज कर दी है.  इससे हेग स्थित अंतरराष्ट्रीय न्यायालय में दूसरे दिन की सुनवाई के दौरान पाकिस्तान ने अपना पक्ष रखा. आईसीजे में पाकिस्तान के अटॉर्नी जनरल अनवर मंसूर खान ने आरोप लगया कि जाधव भारतीय खुफिया एजेंसी रॉ के अधिकारी हैं और रॉ ने उन्हें बलूचिस्तान पर हमला करवाने के लिए भेजा था. अब इस मामले में बुधवार को भारत की तरफ से दूसरे दौर की जिरह में अपनी बात रखी जाएगी

पाकिस्तान का पक्ष रखते हुए ख्वार कुरैशी ने अंग्रेजी अखबार इंडियन एक्सप्रेस में 30 सितंबर, 2016 में छपे NSA अजीत डोभाल के फरवरी 2014 के एक बयान का हवाला दिया जिसमें उन्होंने कहा था कि पाकिस्तान की कमजोरी भारत से कहीं ज्यादा है जब उसे पता चलेगा कि भारत ने रक्षात्मक रवैये से आक्रामक रवैया अख्तियार कर लिया तो यह उसके लिए महंगा साबित होगा. आप (पाकिस्तान) एक मुंबई करेंगे तो आप बसलूचिस्तान खो सकते हैं. इसमें कोई न्यूक्लियर वार नहीं होगी और न ही सेना की जरूरत होगी. यदि आप चाले चलना जानते हैं तो हम आपसे बेहतर जानते हैं.

कुरैशी ने वरिष्ठ पत्रकार प्रवीन स्वामी द्वारा अंग्रेजी मैगजीन फ्रंटलाइन में जनवरी, 2018 के लेख का हवाला दिया. जिसमें दावा किया गया था कि पाकिस्तान को निशाना बनाने के लिए 2013 से भारतीय खुफिया एजेंसी रॉ कोवर्ट प्लान पर काम कर रही थी, जिसे 2014 में NSA अजीत डोभाल ने क्रियान्वित किया. इस लेख में दावा किया गया था कि कमांडर जाधव ने ईरान के चाबहार में 2003 में अपने बिजनेस सेट किया जिसने कुछ कमाई भी. कुरैशी ने कहा कि अपने बयान में जाधव ने ये बात मानी है. इसके बाद इस लेख में यह भी दावा किया गया कि कमांडर जाधव ने मुस्लिम नाम के पासपोर्ट पर अपनी मां की संपत्ती का पता दिया. हालांकि भारत की तरफ से 3 फरवरी, 2018 को इन दावों को खारिज कर दिया गया था.  

अंतरराष्ट्रीय न्यायालय में ख्वार कुरैशी ने पाकिस्तान का पक्ष रखते हुए अंग्रेजी वेबसाइट दि क्विंट में 5 जनवरी, 2018 को चंदन नंदी द्वारा लिखे एक लेख का हवाला दिया जिसमें दावा किया गया था कि कुलभूषण जाधव के रॉ के लिए काम करने के राज से तभी पर्दा हट गया जब उसे ईरान के चाबहार से गिरफ्तार किया गया. लेख में दावा किया गया कि पूर्व रॉ चीफ और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों ने मुंबई में जाधव की मां से संपर्क कर उनसे अपने बेटे के केस के बारे में किसी से भी जिक्र करने से मना किया था. इसके अलावा दूसरा सबूत जाधव का दूसरा पासपोर्ट था जो हुसैन मुबारक पटेल के नाम पर था. यह पासपोर्ट 2003 में जारी किया गया और इसे 2014 में रिन्यू किया गया था.

कुरैशी ने कहा कि हमारा शक और इस बात से और मजबूत होता है कि हुसैन मुबारक पटेल के पासपोर्ट में मुंबई में रहने वाली जाधव की मां का पता है. लिहाजा पासपोर्ट के मुद्दे पर सफाई और सबूत पेश करने का दबाव भारत पर है. कुरैशी से पहले अनवर मंसूर खान ने भारत पर आरोप लगाया कि 2014 में पेशावर के आर्मी स्कूल में हुए हमले में भारत का हाथ था.

गौरतलब है कि कुलभूषण जाधव के मुद्दे पर अंतरराष्ट्रीय न्यायालय में 4 दिनों की सुनवाई सोमवार से शुरू हुई थी. पहले दिन भारत का पक्ष रखते हुए वरिष्ठ वकील हरीश साल्वे ने कहा कि पाकिस्तान ने इस मामले में कुलभूषण जाधव द्वारा 13 बार गुजारिश के बावजूद काउंसलर एक्सेस नही दिया, जो कि वियना संधि का उल्लंघन है. इसके साथ ही साल्वे ने जाधव को निर्दोष बताया जिसे फंसाने के लिए पाकिस्तान प्रोपेगेंडा चला रहा है.  

आपको बता दें कि भारतीय नौसेना के अधिकारी कुलभूषण जाधव को जासूसी के मामले में पाकिस्तान स्थित मिलिटरी कोर्ट ने अप्रैल 2017 में मौत की सजा सुनाई थी. जिसके खिलाफ भारत ने मई 2017 में अंतरराष्ट्रीय न्यायालय में अपील की थी.

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