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लाहौर में रैली के दौरान भड़क उठी हिंसा, दागे गए 2500 आंसू गैस के गोले, 2 पुलिसकर्मी समेत 6 की मौत

पाकिस्तान के लाहौर में शुक्रवार को एक रैली के दौरान भयंकर हिंसा देखने को मिली. इस हिंसक झड़प में पुलिस के दो जवान समेत 6 लोगों की मौके पर ही मौत हो गई. दरअसल शुक्रवार को इस्लामिक संगठन तहरीक ए लब्बैक ने एक रैली निकाली थी.

लाहौर में रैली के दौरान भड़क उठी हिंसा ( सांकेतिक फोटो) लाहौर में रैली के दौरान भड़क उठी हिंसा ( सांकेतिक फोटो)
स्टोरी हाइलाइट्स
  • लाहौर में रैली के दौरान भड़क उठी हिंसा
  • 2 पुलिसकर्मी समेत चार की मौत

पाकिस्तान के लाहौर में शुक्रवार को एक रैली के दौरान भयंकर हिंसा देखने को मिली. इस हिंसक झड़प में पुलिस के दो जवान समेत चार लोगों की मौके पर ही मौत हो गई. दरअसल शुक्रवार को इस्लामिक संगठन तहरीक ए लब्बैक ने एक रैली निकाली थी. मांग की गई थी कि पाकिस्तानी सरकार उनके नेता साद रिजवी को रिहा कर दे.

पाकिस्तानी सरकार को इस प्रदर्शन की भनक पहले से थी, ऐसे में पुलिस को पहले ही मौके पर तैनात कर दिया गया था. उदेश्य सिर्फ एक था, इन प्रदर्शनकारियों को इस्लामाबाद आने से रोकना था. अब उसी उदेश्य को पूरा करने के लिए पुलिस की तरफ से 2500 गैस के गोले दाग दिए गए. हमले के दौरान तहरीक ए लब्बैक के चार लोगों ने अपनी जान गंवाई, वहीं पुलिस के दो जवान भी मारे गए.

जानकारी के लिए बता दें कि पिछले साल साद रिजवी को गिरफ्तार किया गया था. जब पाकिस्तान में फ्रांस के खिलाफ प्रदर्शन चल रहा था, तब रिजवी ने भी उसमें सक्रिय भूमिका निभाई थी. ऐसे में उसे गिरफ्तार कर लिया गया था. अब उसी की रिहाई के लिए शुक्रवार को ये प्रदर्शन हुआ जहां पर बड़े स्तर पर हिंसा हो गई. बताया गया है कि 15 लोग बुरी तरह घायल भी हो गए हैं जिनकी स्थिति नाजुक बताई जा रही है.

इस समय लाहौर में बड़े स्तर पर घेराबंदी कर दी गई है. दोनों एंट्री और एक्सिट प्वाइंट पर कंटेनर लगा दिए गए हैं. पूरी कोशिश है कि टीटीपी के प्रदर्शनकारी आगे ना बढ़ पाए. वैसे इस हिंसा से बचा जा सकता था अगर पाकिस्तान सरकार समय रहते अपने एक वादे को पूरा कर देती.

दरअसल जिस समय टीटीपी की तरफ से रिजवी की रिहाई की मांग हुई थी, उसके साथ-साथ फ्रांस के राजदूत के निष्कासन की भी अपील की थी. उस मांग के बाद ही पाकिस्तान सरकार ने नेशनल एसेंबली में एक प्रस्ताव पास करने की कोशिश की थी. लेकिन तब स्पीकर ने फ्रांस राजदूत के निष्कासन को लेकर एक कमेटी का गठन कर दिया और दोनों विपक्ष और सरकार से बातचीत के जरिए मसले को सुलझाने का निर्देश दिया. लेकिन अब तक एक भी मीटिंग नहीं हुई है और ये मांग अधूरी रह गई है. नतीजा ये हुआ कि शुक्रवार को लाहौर में ये हिंसा हो गई जिसमें कुल 6 लोगों ने अब तक अपनी जान गंवा दी.

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