होली के अवसर पर भाईचारे का संदेश देने पर पाकिस्तानी प्रधानमंत्री नवाज शरीफ कट्टरपंथियों के निशाने पर आ गए हैं. उन पर ईशनिंदा का आरोप लगाकर कुफ्र का फतवा जारी किया गया है. पाकिस्तान अहले सुन्नत वा जामा के नेता एवं इत्तेहाद काउंसिल के सेक्रेटरी अल्लामा अशरफ जलाली ने तकरीर देते हुए कहा कि नवाज शरीफ ने न सिर्फ इस्लाम की निंदा की है, बल्कि पाकिस्तान की सैद्धांतिक विचारधारा की तौहीन की है.
दरअसल, 14 मार्च को भाईचारे का संदेश दिया था. कराची में होली के मौके पर आयोजित एक कार्यक्रम में शरीफ ने अपने संबोधन की शुरुआत 'हैप्पी होली' कहकर की थी. उन्होंने कहा था कि पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों की दुर्दशा किसी से छिपी नहीं है. खासकर उन्हें जबर्दस्ती इस्लाम में शामिल करने को लेकर पूरी दुनिया में आवाज उठती रही है. लेकिन नवाज शरीफ का कहना था कि पाकिस्तान इसलिए नहीं बनाया गया था कि एक धर्म बाकी दूसरे धर्मों पर हावी हो.
उन्होंने कहा था कि धर्म किसी से भी जबर्दस्ती नहीं करता और इस्लाम में जबरन धर्मांतरण अपराध है. शरीफ ने सहिष्णुता, धार्मिक सद्भाव और शांति से मिलजुलकर रहने की वकालत की थी. इस समारोह में गायत्री महामंत्र का भी पाठ किया गया था. इस दौरान पाक पीएम ने वहां मौजूद हिंदुओं को होली की शुभकामनाएं दी थी.
कई राजनेताओं के खिलाफ जारी हो चुके हैं फतवे
नवाज शरीफ पहले राजनेता नहीं हैं, जिनके खिलाफ कुफ्र का फतवा जारी किया है. इससे पहले भी पाकिस्तान में कई राजनेताओं के खिलाफ ऐसे फतवा जारी हो चुके हैं. मामले में पाक पीएम से माफी मांगने की मांग करते हुए
मौलवी जलाली ने कहा कि नवाज शरीफ ने पीएम पद की शपथ का भी उल्लंघन किया है. इससे पहले पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ के चेयरमैन इमरान खान के खिलाफ भी ईशनिंदा के आरोप में फतवा जारी किया जा चुका है.
हालांकि बाद में इमरान खान ने माफी मांग ली थी. ईशनिंदा के मुद्दे पर पाकिस्तान में हमेशा से विवाद रहा है.