कुछ महीने पहले जब इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने अपने देश में चुनाव से महज चंद रोज पहले भारत आने का कार्यक्रम बनाया था तब यह माना गया था कि वह भारत के दौरे पर आकर अपने मतदाताओं को रिझाना चाहते हैं, हालांकि नेतन्याहू का यह कार्यक्रम चुनाव से ठीक पहले स्थगित हो गया. नेतन्याहू अब चुनाव के बाद भारत के दौरे पर आएंगे.
इजराइल में चुनाव से करीब 15 दिन पहले बेंजामिन नेतन्याहू ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को फोन कर अपनी संभावित यात्रा रद्द करने की जानकारी दी. वह 9 सितंबर को भारत के दौरे पर आने वाले थे. इजराइल में पिछले दिनों बेंजामिन नेतन्याहू की प्रधानमंत्री मोदी के साथ का बैनर खूब चर्चा में रहा था.

6 महीने में दूसरी बार चुनाव
दुनिया के ताकतवर देशों में शुमार किए जाने वाले इजराइल महज 6 महीने के अंदर दूसरी बार चुनाव का सामना करने जा रहा है. सितंबर के तीसरे हफ्ते (17 सितंबर) में इस यहूदी देश में आम चुनाव होने जा रहा है. अप्रैल में हुए आम चुनाव में प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू गठबंधन वाली सरकार बनाने में नाकाम रहे थे और यही कारण है कि 6 महीने के अंदर ही देश में एक और आम चुनाव होने जा रहा है.
अप्रैल में हुए चुनाव में किसी भी पार्टी या गठबंधन को पूर्ण बहुमत नहीं मिला, जिस कारण बहुमत वाली सरकार नहीं बन सकी. हालांकि पूर्ण बहुमत नहीं मिलने के बावजूद नेतन्याहू रिकॉर्ड पांचवीं बार प्रधानमंत्री बनने में कामयाब रहे, लेकिन 6 महीने में उन्हें एक और चुनाव का सामना करना पड़ेगा.
सरकार बनाने में मिली नाकामी
प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के मई के अंत में गठबंधन सरकार बनाने में नाकाम रहने के बाद इजराइली सांसदों ने अभूतपूर्व कदम उठाते हुए नेसेट (इजराइली संसद) भंग करने के पक्ष में मतदान कर दिया जिससे नेतन्याहू इजराइली इतिहास में पहले नामित प्रधानमंत्री बन गए क्योंकि वह बहुमत वाली सरकार बनाने में असफल रहे. इजराइली संसद नेसेट भंग करने के कारण अब 17 सितंबर को फिर से आम चुनाव कराए जा रहे हैं.
इजराइली सांसद करीब एक महीने (अप्रैल) पहले ही निर्वाचित हुए थे. उन्होंने 21वीं नेसेट को भंग करने और इसी कैलेंडर वर्ष में दूसरी बार आम चुनाव कराने के पक्ष में 45 के मुकाबले 74 मतों से प्रस्ताव पारित किया. नेतन्याहू ने 9 अप्रैल को हुए चुनाव में रिकॉर्ड पांचवीं बार जीत हासिल की थी.
एक विधेयक को लेकर बना गतिरोध
हालांकि उनकी यह जीत अस्थायी साबित हुई क्योंकि वह चरम पुरातनपंथी यहूदी शिक्षण संस्थानों के छात्रों को सेना में अनिवार्य भर्ती से छूट देने संबंधी एक सैन्य विधेयक को लेकर गतिरोध को तोड़ने में नाकाम रहे. इस कारण उनके और इजराइल के पूर्व रक्षा मंत्री अविग्दोर लिबरमैन के बीच विधेयक को लेकर मतभेद हो गया और गठबंधन नहीं हो सका.
राष्ट्रवादी दल यिजराइल बेतेन्यू पार्टी के अविग्दोर लिबरमैन ने अति-धर्मनिष्ठ यहूदी दलों के साथ आने की यह शर्त रखी थी कि उन्हें अनिवार्य सैन्य सेवा में छूट देने के अपने मसौदे में परिवर्तन करने होंगे.
यिजराइल बेतेन्यू पार्टी के हटने के कारण बेंजामिन नेतन्याहू 120 सदस्यीय सदन में केवल 60 सांसदों का समर्थन ही हासिल कर सके और केवल एक मत से बहुमत हासिल नहीं कर सके. नेतन्याहू की सत्तारुढ़ लिकुड पार्टी के नवगठित नेसेट को भंग करने के कारण राष्ट्रपति रुवेन रिवलिन नई सरकार के गठन के लिए किसी अन्य को आमंत्रित नहीं कर सके.
अब जब देश में फिर से चुनाव होने जा रहा है तो बेंजामिन नेतन्याहू को फिर से सरकार बनाने के लिए विपक्षी गठबंधन ब्लू एंड व्हाइट से ज्यादा सीट हासिल करनी होगी. यह गठबंधन इस साल की शुरुआत में बना था.