स्ट्रेट ऑफ होर्मुज दुनिया के सबसे अहम समुद्री रास्तों में गिना जाता है. इसे लेकर ईरान ने एक बड़ा दावा किया है. ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड्स नेवी का कहना है कि पिछले 24 घंटे में इस रास्ते से 25 जहाज गुजरे. इन सभी जहाजों ने पहले ईरान से मंजूरी ली थी. इसके बाद ही उन्होंने अपना सफर तय किया. इन जहाजों में तेल टैंकर, कंटेनर शिप और दूसरे कारोबारी जहाज भी शामिल थे. इस समय मिडिल ईस्ट में भारी तनाव बना हुआ है. ऐसे माहौल में ईरान का यह दावा काफी अहम माना जा रहा है.
ईरान की IRGC नेवी ने शनिवार को बयान जारी कर कहा कि पिछले 24 घंटे में गुजरे 25 जहाजों में तेल टैंकर, कंटेनर शिप और दूसरे कारोबारी जहाज शामिल थे. ईरान के मुताबिक, इन जहाजों को जरूरी मंजूरी और सुरक्षा समन्वय के बाद स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजरने दिया गया. ईरानी नौसेना का कहना है कि इलाके में तनाव के बावजूद इस अहम समुद्री रास्ते पर उसकी निगरानी और कंट्रोल मजबूत बना हुआ है.
दरअसल, यह पूरा विवाद फरवरी 2026 में शुरू हुआ था, जब अमेरिका-इजरायल ने ईरान पर हमला किया था. उसके बाद गुस्से में आकर ईरान ने अपने दुश्मनों और उनके साथी देशों के लिए होर्मुज के इस रास्ते को पूरी तरह बंद कर दिया था. अब वहां से गुजरने के लिए ईरान ने एक नया नियम बना दिया है, जिसके तहत हर जहाज की पूरी जानकारी जांची जा रही है.
होर्मुज से गुजरने के लिए अब क्यों जरूरी हो रही मंजूरी?
रॉयटर्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान ने इस रास्ते से सुरक्षित गुजरने के लिए कई स्तर का एक नया सिस्टम बनाया है. रिपोर्ट में दावा किया गया है कि जहाजों से माल, झंडा, मालिक और गंतव्य जैसी जानकारी मांगी जाती है. कुछ मामलों में जहाजों की जांच भी हो सकती है. रिपोर्ट के अनुसार, ईरान कथित तौर पर यह भी देख रहा है कि किसी जहाज का अमेरिका या इजरायल से कोई संबंध तो नहीं है. वहीं, चीन और रूस जैसे देशों से जुड़े जहाजों को प्राथमिकता मिलने की भी बात कही गई है. हालांकि, इस पर अलग-अलग देशों और एजेंसियों की अपनी राय है.
भारत समेत कई देशों के लिए होर्मुज बेहद अहम है, क्योंकि खाड़ी क्षेत्र से आने वाला तेल और गैस इसी रास्ते से गुजरता है. ऐसे में यहां बढ़ता तनाव सिर्फ मिडिल ईस्ट नहीं, बल्कि दुनिया की अर्थव्यवस्था और तेल की कीमतों पर भी असर डाल सकता है.