इराक का दूसरा सबसे बड़ा शहर मोसुल इन दिनों दशकों की सबसे भीषण जंग का गवाह बन रहा है. शहर पर कब्जे के लिए इराकी गठबंधन की सेनाओं और आईएसआईएस के बीच खूनी संघर्ष में आम शहरी दोनों तरफ से पिस रहे हैं.
आसमान से बरस रही मौत
यूएन के मुताबिक शहर के पश्चिमी हिस्से में छिड़ी लड़ाई में 17 फरवरी के बाद 300 से ज्यादा लोग मारे गए हैं, जबकि 273 से ज्यादा घायल हुए हैं. खबरों के मुताबिक इनमें से करीब 240 लोग 17 मार्च को अमेरिकी हवाई हमले का शिकार बने हैं. अमेरिकी रक्षा मंत्रालय के मुताबिक इन हमलों के जरिये अल-जदीदा जिले में आईएसआईएस के 25 ठिकाने नेस्तनाबूद किये गए थे. लेकिन अंतरराष्ट्रीय मीडिया इनमें सैकड़ों नागरिकों के मारे जाने की पुष्टि कर रहा है. इराकी रक्षा मंत्रालय भी 61 मौतों की तस्दीक कर चुका है. खुद अमेरिकी अधिकारी मान रहे हैं कि ये हालिया सालों में यूएस के किसी भी युद्ध अभियान के दौरान नागरिकों की मौत का सबसे बड़ा मामला है.
दोनों तरफ से फंसे लोग
जंग से भागने की कोशिश कर रहे लोग दोनों तरफ की गोलियों का शिकार हो रहे हैं. टिगरिस नदी को पार करने की कोशिश करने वाले हर शख्स को आईएसआईएस के आतंकी गोलियों का निशाना बना रहे हैं. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक इराकी सेना भी उन्हें आतंकी मानकर देखते ही गोली मार रही है. जो लोग शहर में बचे हुए हैं उन्हें आईएसआईएस के आतंकी ढाल की तरह इस्तेमाल कर रहे हैं.
भुखमरी का शिकार हो रहे लोग
जंग के चलते पश्चिमी मोसुल में खाने-पीने की चीजों की भारी किल्लत हो गई है. लोगों के कूड़ा बीनकर पेट भरने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है. दूध, सब्जियां और फल बाजार से गायब हैं. सबसे बुरा हाल बच्चों का है. महिलाओं को सड़कों पर भीख मांगने के लिए निकलना पड़ रहा है. ज्यादातर लोग ब्रेड और पानी पर गुजारा कर रहे हैं. शहर में पानी के बदले नागरिकों से पेट्रोल लिया जा रहा है औरह बिजली कई महीनों से गुल है.
करीब 6 महीने से जारी है ऑपरेशन
मोसुल की जंग का ये ताजा ऑपरेशन अक्टूबर 2016 से चल रहा है. इराक और अमेरिका की सेनाओं के अलावा इसमें कुर्द लड़ाके भी शामिल हैं. शहर पर 2014 में आईएसआईएस के कब्जे के बाद साल 2015 और 2016 की शुरुआत में भी मोसुल को छुड़ाने के लिए ऑपरेशन हो चुके हैं. इन अभियानों में शहर के आसपास के इलाकों को आजाद करवाया गया है. अब मोसुल का सिर्फ पश्चिमी हिस्सा आतंकियों के कब्जे में है.