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अफगानिस्तान में भारतीय लेखिका सुष्मिता बनर्जी की हत्या, तालिबान पर लिखी थी किताब

अफगानिस्तान में भारतीय लेखिका सुष्मिता बनर्जी की गुरुवार को आतंकवादियों ने गोली मारकर हत्या कर दी. 49 साल की सुष्मिता ने तालिबान के चंगुल से बच निकलने पर आधारित किताब लिखी थी, जिस पर 2003 में फिल्म भी बन चुकी है.

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सुष्मिता बनर्जी सुष्मिता बनर्जी

अफगानिस्तान में भारतीय लेखिका सुष्मिता बनर्जी की गुरुवार को आतंकवादियों ने गोली मारकर हत्या कर दी. 49 साल की सुष्मिता ने तालिबान के चंगुल से बच निकलने पर आधारित किताब लिखी थी, जिस पर 2003 में फिल्म भी बन चुकी है.

पुलिस के मुताबिक, सुष्मिता की पक्तिका प्रांत में उनके घर के बाहर हत्या की गई. उन्होंने अफगान कारोबारी जांबाज खान से शादी की थी और उनके साथ रहने के लिए वह हाल ही में अफगानिस्तान पहुंची थीं.

तालिबान ने की हत्या!
बीबीसी ने पुलिस के हवाले से खबर दी है कि तालिबानी आतंकवादी प्रांतीय राजधानी खाराना में उनके घर पहुंचे और उनके पति और परिवार के दूसरे सदस्यों को बांध दिया. इसके बाद उन्होंने सुष्मिता को घर से बाहर निकालकर उन्हें गोली मार दी.

महिलाओं की जिंदगी पर बना रही थी फिल्म
पुलिस ने बताया कि आतंकवादियों ने सुष्मिता के शव को एक धार्मिक स्कूल के पास फेंक दिया. किसी संगठन ने उनकी हत्या की जिम्मेदारी नहीं ली है. एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बताया कि सुष्मिता पक्तिका प्रांत में स्वास्थ्य कर्मी के तौर पर काम कर रही थीं और अपने काम के तहत ही स्थानीय महिलाओं की जिंदगी पर फिल्म भी बना रही थीं.

क्या लिखा था उस किताब में
बनर्जी की किताब 'काबुलीवालार बंगाली बू' 1995 में उनके तालिबान से बच भागने की घटना पर आधारित है. 2003 में इस पर फिल्म भी बन चुकी है, 'एसकेप फ्रॉम तालिबान'. फिल्म में मनीषा कोइराला ने लीड रोल निभाया था.

शादी के बाद सुष्मिता 1989 में कोलकाता से अफगानिस्तान शिफ्ट हो गई थीं. अंग्रेजी अखबार इंडियन एक्सप्रेस में छपी खबर के मुताबिक, उन्होंने अपनी किताब में लिखा है, '1993 में तालिबानी आतंकियों ने मेरा दवाखाना बंद करवा दिया, जो मैं अपने घर से चला रही थीं और मुझे 'नैतिक रूप से गिरी हुई औरत' करार दिया.'

उन्होंने लिखा है, 'फिर एक रात मैं सुरंग बनाकर वहां से भाग निकली. काबुल के पास मुझे पकड़ लिया गया. 15 तालिबानियों ने मुझसे पूछताछ की. मैं उन्हें इस बात के लिए मनाने में कामयाब रही कि मैं भारतीय हूं, इसलिए मुझे अपने देश लौटने का पूरा अधिकार है.'

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