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टर्मिनेशन, कानूनी लड़ाई और फिर वापसी... अमेरिका में धार्मिक उपदेश के आरोपी भारतवंशी प्रोफेसर ने ऐसे जीती जंग

भारतीय मूल के अमेरिकी प्रोफेसर जॉनसन टेक्सास के एक कॉलेज में बायलॉजी के प्रोफेसर हैं. उन्हें पिछले साल जनवरी में सेंट फिलिप कॉलेज ने टर्मिनेट कर दिया था. उन पर मानवों में जेंडर निर्धारण के लिए X और Y क्रोमोसोम के संबंध में धार्मिक ज्ञान देने का आरोप लगा था.

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भारतवंशी अमेरिकी प्रोफेसर जॉनसन
भारतवंशी अमेरिकी प्रोफेसर जॉनसन

भारतीय मूल के एक अमेरिकी प्रोफेसर ने कॉलेज से निकाले जाने के बाद दमदार वापसी की है. वह लगभग एक साल की कानूनी जंग जीतकर वापस अपने पद पर बहाल हुए हैं. भारतवंशी प्रोफेसर डॉ जॉनसन वर्के (Johnson Varkey)  को पिछले साल टेक्सास के एक कॉलेज ने टर्मिनेट कर दिया था. उन पर मानव प्रजनन प्रक्रिया को लेकर धार्मिक उपदेश देने का आरोप लगाया गया था. 

शिकायत के बाद कॉलेज से निकाले गए प्रोफेसर जॉनसन ने अपनी धार्मिक स्वतंत्रता का बचाव करते हुए टेक्सास के सेंट फिलिप कॉलेज के खिलाफ भेदभाव करने का मुकदमा दर्ज कराया था. इसके बाद चली कानूनी जंग में उन्हें अब जीत मिल गई है. 

कौन हैं प्रोफेसर जॉनसन वर्के?

भारतीय मूल के जॉनसन बायलॉजी के प्रोफेसर हैं. इस क्षेत्र में उनका 22 सालों का अनुभव है. वह सहायक प्रोफेसर के तौर पर टेक्सास के सेंट फिलिप कॉलेज के छात्रों को ह्यूमन एनाटॉमी और फियोलॉजी पढ़ा रहे हैं. 

उन्हें पिछले साल जनवरी में टेक्सास के सेंट फिलिप कॉलेज ने टर्मिनेट कर दिया था. उन पर मानवों में जेंडर निर्धारण के लिए X और Y क्रोमोसोम के संबंध में धार्मिक ज्ञान देने का आरोप लगा था.

क्या थे आरोप?

प्रोफेसर  जॉनसन के वकीलों के मुताबिक, वर्के लगातार ह्यूमन रिप्रोडक्टिव सिस्टम से जुड़े हुए वैज्ञानिक सिद्धांतों के बारे में पढ़ाते रहे हैं. लेकिन उन पर इस संबंध में धार्मिक ज्ञान देने का आरोप है. उन पर मानव प्रजनन प्रक्रिया को लेकर समलैंगिकों और ट्रांसजेंडर को लेकर भेदभावपूर्ण टिप्पणी करने, अबॉर्शन और महिलाओं के खिलाफ बयानबाजी करने का आरोप लगाया गया था. लेकिन इन आरोपों के बावजूद उनके वकीलों ने कहा कि उनके मुवक्किल प्रोफेसर जॉनसन ने ह्यूमन जेंडर और सेक्सुअलिटी को लेकर अपने छात्रों के सामने कभी भी अपने निजी विचार नहीं रखे.

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