भारत और यूरोपीय संघ (EU) के बीच 'मदर ऑफ ऑल डील्स' कहे जाने वाले मुक्त व्यापार समझौते (FTA) का मसौदा शुक्रवार को जारी कर दिया गया है. इसके तहत दोनों पक्ष एक-दूसरे को पांच साल के लिए 'मोस्ट फेवर्ड नेशन' का दर्जा देंगे, जिससे द्विपक्षीय व्यापार और आर्थिक संबंधों को नई ऊंचाई मिलेगी. इस समझौते से भारत के 93 प्रतिशत निर्यात को शुल्क-मुक्त प्रवेश मिलेगा और यूरोपीय कारों तथा वाइन पर आयात शुल्क में कटौती होगी. ये जानकारी शुक्रवार को जारी किए गए समझौते के ड्राफ्ट से सामने आई है.
दरअसल, जनवरी में यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन और यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा द्वारा नई दिल्ली की अपनी यात्रा के दौरान व्यापार समझौते के अंतिम मसौदे को आकार देने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ मैराथन बैठकें की थीं.
इसके बाद 27 जनवरी को भारत और यूरोपीय संघ ने अपने मुक्त व्यापार समझौते के लिए चल रही बातचीत के समापन की घोषणा की, जिसे 'मदर ऑफ ऑल डील्स' भी कहा जा रहा गया. इस समझौते के तहत, भारत के 93 प्रतिशत निर्यात 27 देशों के इस समूह में शुल्क-मुक्त प्रवेश करेंगे, जबकि यूरोपीय संघ में लग्जरी कारों और वाइन के आयात शुल्क में कमी आएगी.
'लग्जरी कारों की कीमत होगी कम'
इस समझौते का एक बड़ा आकर्षण यूरोपीय कारों पर आयात शुल्क में कटौती है. रिपोर्टों के अनुसार, प्रस्तावित समझौते के तहत भारत यूरोपीय संघ की कारों पर आयात शुल्क को मौजूदा 110% से घटाकर 40% तक कर सकता है.
सूत्रों का कहना है कि नई दिल्ली ने लगभग 16.3 लाख रुपये (17,739 डॉलर) से अधिक कीमत वाली चुनिंदा यूरोपीय संघ की कारों पर शुल्क में तत्काल कटौती करने पर सहमति जताई है और उम्मीद है कि समय के साथ ये शुल्क घटकर 10% तक हो जाएगा. इसके साथ ही यूरोपीय वाइन की कीमतों में भी कमी आएगी, जिससे भारतीय बाजार में इनकी पहुंच और आसान हो जाएगी.
भारत-EU में रिकॉर्ड द्विपक्षीय व्यापार
लगभग दो दशकों की बातचीत के बाद, ये सौदा दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था भारत को दूसरे सबसे बड़े आर्थिक ब्लॉक EU के साथ जोड़ देगा. ये लगभग 200 करोड़ लोगों का बाजार होगा, जो वैश्विक जीडीपी का 25 प्रतिशत और वैश्विक व्यापार का एक-तिहाई हिस्सा प्रतिनिधित्व करता है. वित्त वर्ष 2023-24 में भारत-EU द्विपक्षीय माल व्यापार 135 अरब डॉलर तक पहुंच गया था. ये समझौता ऐसे वक्त में हो रहा है जब अमेरिका की टैरिफ नीतियों के कारण वैश्विक व्यापार में अनिश्चितता बनी हुई है, जिनका असर भारत और 27 देशों के समूह दोनों पर पड़ा है, जिसके चलते नई दिल्ली और ब्रुसेल्स को आर्थिक सहयोग को और गहरा करने की प्रेरणा मिली है.
2007 में शुरू हुई थी डील पर चर्चा
बता दें कि भारत और यूरोपीय संघ के बीच FTA की बातचीत पहली बार 2007 में शुरू हुई थी, जिसे मतभेदों के चलते 2013 में रोक दिया गया था. लेकिन करीब एक दशक के अंतराल के बाद जून 2022 में फिर से बातचीत शुरू हुई थी और अब ये डील अंतिम रूप ले रही है.
अधिकारियों का मानना है कि ये समझौता न केवल व्यापार की मात्रा को बढ़ाएगा, बल्कि विभिन्न क्षेत्रों में संबंधों को गुणात्मक रूप से भी बदल देगा. इससे दोनों पक्षों को वैश्विक वाणिज्यिक चुनौतियों का सामना करने में मदद मिलेगी.