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सवा महीने भी नहीं बीते, ड्रैगन ने डोकलाम पर लिख डाली धोखे की दास्तान

म्यांमार के डोकलाम पठार से चीन की गिद्ध दृष्टि अभी तक हटी नहीं थी. उसने सैनिकों को पीछे हटाने का समझौता करके इसका भ्रम पैदा किया था. चीन या तो समझता नहीं है या सोचता नहीं है या फिर सुधरने को तैयार नहीं है.

ड्रैगन ने भोंका खंजर ड्रैगन ने भोंका खंजर

चीन ने वही किया जिसकी पहले से ही आशंका थी. उसने अपना वादा तोड़कर भारत की पीठ में खंजर भोंका है. डोकलाम पर समझौते के सवा महीने भी नहीं बीते हैं कि उसने धोखे की दास्तान लिख डाली. 28 अगस्त के समझौते को तोड़कर उसने डोकलाम के पास भारी संख्या में सैनिकों की तैनाती कर डाली है.

म्यांमार के डोकलाम पठार से चीन की गिद्ध दृष्टि अभी तक हटी नहीं थी. उसने सैनिकों को पीछे हटाने का समझौता करके इसका भ्रम पैदा किया था. चीन या तो समझता नहीं है या सोचता नहीं है या फिर सुधरने को तैयार नहीं है. खैर जो भी हो, लेकिन अंतर्राष्ट्रीय संबंधों का जितना मज़ाक उसने उड़ाया है, वह दुनिया के लिए एक मिसाल है.

मोदी की बीजिंग यात्रा के बाद फिर रंग में आया ड्रैगन

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की बीजिंग यात्रा के बाद चीन डोकलाम पर फिर से अपने पुराने रंग में आ गया है. चीन ने पिछले महीने ही किया गया अपना वादा तोड़ दिया है. उसने वादा किया था कि भारत और चीन अपने-अपने सैनिकों को पीछे हटा लेंगे और डोकलाम में फिर दखल नहीं देंगे. लगता है कि चीन एक बार फिर से भारत के सब्र का इम्तिहान लेने पर आमादा है. चीन ने न सिर्फ डोकलाम में फिर से अपने सैनिकों की तैनाती की है, बल्कि उनकी तादाद लगातार बढ़ाता जा रहा है.

पिछली बार 73 दिन तक चली थी तनातनी

इस इलाके में 73 दिनों तक भारत और चीन की सेनाओं के बीच तनातनी चली थी. 28 अगस्त को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की चीन यात्रा से पहले एक समझौते के तहत दोनों देशों ने सैन्य विवाद को सुलझाने का वादा किया था, लेकिन चीन ने उस वादे की पीठ में खंजर भोंक डाला है.

बृहस्पतिवार को ही PM मोदी ने किया था डोकलाम का जिक्र

प्रधानमंत्री ने बृहस्पतिवार को ही अपने भाषण के दौरान डोकलाम विवाद को सुलझाने को लेकर अपनी पीठ थपथपाई थी. उन्होंने कहा था कि कुछ लोग डोकलाम प्रकरण पर निराशा फैला रहे हैं. हालांकि हकीकत यह है कि चीन डोकलाम में सड़कें बना रहा था और वह इसको हरहाल में पूरा करना चाहता है. उसने सारे साजो सामान उतार दिए थे और काम भी शुरू कर दिया था, लेकिन भारत के सैनिकों ने सारा काम रोक दिया था.

ड्रैगन ने दी थी युद्ध तक की धमकी

मामले को लेकर दोनों देशों के सैनिक आमने-सामने आ गए थे और इसके बाद तनाव बढ़ता चला गया था. 73 दिनों तक यह स्थिति कायम रही थी. अलग-अलग तरीके से चीन ने भारत पर पीछे हटने के तमाम दबाव बनाए. उसने भारत को युद्ध तक की धमकी दी. साथ ही साल 1962 की हार की भी याद दिलाई. पीएलए की ताकत की धौंस भी दी, लेकिन भारत बिना कुछ कहे इसे हवा में उड़ाता रहा. आखिरकार एक शर्मनाक स्थिति में चीन को भारत के साथ पीछे हटने का समझौता करना पड़ा, लेकिन यह समझौता असल में एक धोखा था, जो अब खुलकर सामने आ गया है.

चीन की हरकतों से भारत अलर्ट

चीन की हरकतें देखकर भारत के कान खड़े हो चुके हैं. अभी चीन ने डोकलाम पर लगभग 500 सैनिकों को तैनात किया है. भारत ने भी जवाबी कार्रवाई की तैयारी शुरू कर दी है, लेकिन चीन का यह धोखा हमारे लिए बहुत बड़ा झटका है. वो भी इतनी जल्दी. क्योंकि चीन ने इस बात की भनक तक नहीं लगने दी है कि वो आखिर चाहता क्या है और क्या वाकई सैनिक टकराव के रास्ते पर बढ़ना चाहता है?

क्या है मामला

डोकलाम इलाके को भूटान और चीन दोनों ही अपना अपना इलाका बताते हैं. भारत कहता है कि डोकलाम भूटान का है और भूटान की रक्षा हमारी जिम्मेदारी. भारत इस मुद्दे पर भूटान का समर्थन करता है और साफ कर चुका है कि वो ऐसे किसी भी निर्माण को बर्दाश्त नहीं करेगा, जिससे चीन चिकन नेक तक पहुंच जाए, जोकि डोकलाम के ठीक दक्षिण में स्थित है.

चीन की इसी चाल के खिलाफ भारत ने अपनी सेना उतारी थी. हालांकि भारी फजीहत के ढाई महीने बाद उसे अपनी सेना पीछे हटानी पड़ी थी, लेकिन लगता है कि बीजिंग वो बेइज्जती भूल गया है. इस मसले पर एक बात तो तय है कि चीन को फिर से शर्मिंदगी झेलनी पड़ेगी.

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